क्या बड़े शराब माफिया से डीलिंग के चलते फेल की गई शराब की दुकानों की लाटरी प्रक्रिया..?

37 आईएएसस अधिकारियों के तबादले
यूपी में 37 आईएएसस अधिकारियों के तबादले, डीएम गोरखपुर हटे
लखनऊ । यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने आबकारी विभाग पर हावी जिस शराब माफिया को चुनौती देते हुए नई आबकारी नीति लागू की थी, वह ध्वस्त हो चुकी है। यूपी के 75 जिलों में 8 मार्च को शराब की दुकानों के लिए होने वाली लाटरी की प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए सरकार ने जिस तरह से हर जिले में प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारियों की तैनाती की थी वह सब धरी रह गई। टेंडर डालने वालों ने हो…

लखनऊ । यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने आबकारी विभाग पर हावी जिस शराब माफिया को चुनौती देते हुए नई आबकारी नीति लागू की थी, वह ध्वस्त हो चुकी है। यूपी के 75 जिलों में 8 मार्च को शराब की दुकानों के लिए होने वाली लाटरी की प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए सरकार ने जिस तरह से हर जिले में प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारियों की तैनाती की थी वह सब धरी रह गई। टेंडर डालने वालों ने हो हंगामा किया, लेकिन सॉफ्टवेयर ऐसा फेल हुआ कि दो दिन बीतने के बाद भी चालू होने को तैयार नहीं है।

अब सवाल उठने लगा है कि करोड़ों रूपए खर्च कर तैयार किए गए तंत्र में आखिर ऐसी कौन सी समस्या आ गई कि जिसे दूर करने के लिए सरकार को अनिश्चितकाल के लिए लाटरी की प्रक्रिया को टालना पड़ गया। इस बीच खबरें आने लगीं हैं कि यह पूरा षड्यंत्र एक बड़े शराब कारोबारी को फायदा पहुंचाने के लिए रचा गया है। सरकार से लेकर अधिकारी तक सभी ने उस शराब माफिया के आगे घुटने टेक दिए हैं। जिसमें प्रमुख भूमिका आबकारी आयुक्त धीरज शाहू की सामने आ रही है, जिन्होंने सॉफ्टवेयर के फेल होने से लेकर सरकार को मैनेज करने तक का काम किया है।

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8 मार्च को निरस्त की गई ठेकों की लाटरी को 13 मार्च में होने की बात सामने आई थी। दो दिन बीतने के बाद स्पष्ट हुआ है कि 13 मार्च को होने वाली लाटरी को भी निरस्त कर दिया गया है। अंदरखाने से खबर आ रही है कि सरकार 17 तारीख को लॉटरी करवा सकती है। फिलहाल 17 मार्च को लाटरी करवाने की योजना भी ठंडे बस्ते में जाती नजर आ रही है।

शराब की दुकानों के लिए टेंडर डालने वालों को भी पैसा डूबने का डर—

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यूपी के 75 जिलों में शराब की दुकानों के लिए करीब साढ़े चार लाख टेंडर डाले गए हैं। योगी सरकार की पारदर्शिता के दावों को देखते हुए हजारों ऐसे लोगों ने शराब के कारोबार में हाथ आजमाना चाहा है जो इस कारोबार में बिलकुल नए हैं। बार बार लॉटरी प्रक्रिया के निरस्त होने से और सॉफ्टवेयर के फेल होने ने इन लोगों को को अपनी पूंजी के डूबने का डर सताने लगा है।

सरकार ने भी फूंक दिए करोड़ों—

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बाद लॉटरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार की ओर से हर जिले में लॉटरी स्थल पर एक प्रमुख सचिव स्तरीय अधिकारी और आबकारी विभाग के अधिकारियों को तैनात किया गया था। इन अधिकारियों के वहां आने जाने और ठहरने में सरकार की ओर से करोड़ों रूपए खर्च कर दिए गए। दोबारा लाटरी करवाने के लिए इन अधिकारियों को दोबारा आने जाने में एकबार फिर करोड़ों रूपए खर्च होंगे।

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करोड़ों के सरकारी राजस्व की भरपाई कौन करेगा—

लॉटरी सि​स्टम के फेल होने से प्रदेश सरकार को होने वाले करोड़ों के हालिया नुकसान की भरपाई और विश्वसनीयता पर उठने वाले सवालों का जवाब कौन देगा। आखिर सरकार आए दिन होने वाली ऐसी नाकामियों को पहले से ध्यान में क्यों नहीं रखती।

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