बीच जंगल मौत के मुंह में खुली नींद, हिम्मत के दम पर जीती जिन्दगी

नई दिल्ली। वाइल्डलाइफ का रोमांच ही अलग होता है। जिसे इस रोमांच की आदत हो जाए वह बार बार जान का जोखिम लेकर इस रोमांच का अनुभव करने की कोशिश करता है। अमेरिका के डेनवर में रहने वाले 19 वर्षीय डायलन को भी वाइल्ड लाइफ के रोमांच से ऐसा प्यार हुआ कि उन्होंने इसी अपना करियर बना लिया। जिसके बाद वह वाइल्डलाइफ कैंप आयोजित कराने वाली एक कंपनी में बतौर गाइड ज्वाइन कर लिया।

डायलन बताते हैं कैंप में रात को सोने के दौरान उनके साथ एक हादसा हो गया। सुबह करीब 4 बजे सिर में कुछ चुभने के दर्द और चबाने की आवाज के साथ उनकी नींद खुली। आंख खेला तो वह ​अपने स्लीपिंग बैग के भीतर थे और बाहर से किसी जानवर ने उसके सिर को अपने जबड़े में दबा रखा था। इससे पहले की वह स्लीपिंग बैग से बाहर निकल कर मदद के लिए चिल्लाते जानवर ने अपने दांत उसके चेहरे में जमा दिए थे।

डायलन बताते है कि असहनीय पीड़ा के बीच उन्हें महसूस हुआ कि कोई बहुत ताकतर जानवर उन्हें कैंप से जंगल की ओर खींचकर ले जाने की कोशिश कर रहा है। आनन फानन में स्लीपिंग बैग को खेलकर उसने अपने शरीर को बाहर निकाला और अपने हाथों से जानवर पर एक के बाद एक वार करना शुरू कर दिया। जल्द ही उसने भांप लिया कि वह जिस जानवर के कब्जे में है वह एक विशालकाय काला भालू है।

डायलन का कहना है कि दर्द के कारण उसके मुंह से निकली चीखों ने आस पास रो रहे लोगों को भी जगा दिया। इसी दौरान उसके और भालू के बीच जोर आजमाइश चल रही थी। डायलन को भालू के जबड़े में फंसा देखकर कैंप अन्य लोगों ने भी शोर मचाना शुरू कर दिया। शोर सुनकर भालू डायलन को अपने जबड़े में दबाकर तेजी से जंगल की ओर बढ़ने लगा। तभी डायलन ने हिम्मत से काम लेते हुए भालू की आंखों पर अपनी उंगलियों से वार किया। आंखों पर हुए वार से भालू की पकड़ कुछ ढ़ीली पड़ती देख डायलन ने आंखों पर हमला करना जारी रखा और आखिरकार वह भालू की पकड़ से छूट गया।

भालू के हमले में बुरी तरह से घायल हुए डायलन अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हैं। अपने चेहरे पर अब भी नजर आ रहे भालू के दांतों के निशान को दिखाते हुए डायलन कहते हैं कि उस कैंप में ज्यादातर सदस्य 12 से 15 साल के स्कूली बच्चे थे। जिनके लिए वाइल्ड लाइफ का पहला अनुभव था। अच्छा ये रहा कि भालू ने हमला उन बच्चों पर नहीं किया।