नई दिल्ली। गुजरात से राज्यसभा की तीन सीटों के लिए मंलगवार को मतदान होना है। मतदान को देखते हुए कांग्रेस ने बेंगलुरू भेजे अपने 44 विधायकों को वापस ​अहमदाबाद बुला लिया है। इन सभी विधायकों की अग्निपरीक्षा कल मतदान के समय होगी।

आंकड़ों की बात करें तो 182 विधायकों वाली गुजरात विधानसभा में भाजपा के 121, कांग्रेस के 57, एनसीपी के दो और एक—एक जदयू और निर्दलीय विधायक हैं। कांग्रेस के 6 विधायकों द्वारा इस्तीफा दिए जाने के बाद भी पार्टी राज्यसभा के उम्मीदवार बनाए गए अहमद पटेल की जीत के लिए पर्याप्त संख्याबल रखती है। 6 विधायकों के बाद बनी स्थिति में प्रत्येक उम्मीदवार को जीत के लिए 44 विधायकों के वोट की जरूरत होगी। जिसे ध्यान में रखते हुए कांग्रेस अपने 44 विधायकों को गुजरात से दूर भेेजकर उनका विश्वास जीतने के दावे करती नजर आ चुकी है।

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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सबसे अहम सलाहकार और राजनीतिक सचिव अहमद पटेल गुजरात कांग्रेस के सबसे कद्दावर नेता माने जाते हैं। लंबे समय से राज्यसभा में अपनी सीट ​को सुरक्षित बनाए रखने वाले पटेल को इस चुनाव में कांग्रेस के ही बागी विधायक बलवंत सिंह राजपूत ने चुनौती दे दी है। गुजरात विधानसभा में लंबे समय से ​नेता विपक्ष रहे शंकर सिंह बघेला के समधी राजपूत की पार्टी पर मजबूत पकड़ मानी जाती है। राजपूत के कद को देखते हुए ही भाजपा ने अहमद पटेल को हराने के लिए उन पर दांव लगा दिया है।

अमित शाह और स्मृति इरानी की जीत पक्की—

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गुजरात में भाजपा ने अपने तीन प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, केन्द्रीय मंत्री स्मृति इरानी और बलवंत सिंह राजपूत। अगर वोटों का गणित समझा जाए तो शाह और स्मृति इरानी की जीत पक्की है। वहीं बलवंत सिंह राजपूत को अपनी जीत पक्की करने के लिए 11 अन्य वोटों की जरूरत पड़ेगी। इन वोटों के लिए राजपूत कांग्रेस में मौजूद अपने पुराने विश्वासपात्रों पर भरोसा जगाए बैठे हैं। जिनमें 6 विधायक उनके पक्ष में पहले से ही बताए जा रहे हैं। बचे 5 वोटों गणित ने ही अहमद पटेल और राजपूत के बीच की लड़ाई को कांग्रेस की प्रतिष्ठा का सवाल बनाकर रख दिया है।

माना जा रहा है कि गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष रहे शंकर सिंह बाघेला के पार्टी से अलग होने के बाद उनके समर्थक कई कांग्रेसी विधायक राजपूत के पक्ष में वोट कर सकते हैं। कांग्रेस को भी इस बात का पूरा अंदाजा था। इसीलिए पार्टी हाईकमान ने अहमद पटेल को चुनाव जिताने के लिए आवश्यक 44 विधायकों को गुजरात से दूर बेंगलुरू भेज दिया था।

अब देखना ये होगा कि कांग्रेस अपने इन 44 विधायकों में से सभी का वोट अहमद पटेल के पक्ष में डलवा पाती है या नहीं? क्या कांग्रेस अपने विधायकों की बगावत को थामने में कामयाब हो पाएगी? क्या अहमद पटेल एकबार फिर राज्यसभा में अपनी सीट सुरक्षित कर पाएंगे? ऐसे कई सवाल होंगे जो आने वाले गुजरात विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की राजनीति की दिशा तय करेंगे।

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