अमेरिका अगले तीन महीने में रद्द करेगा H-4 वीजा परमिट, भारतीयों की बढ़ेगी मुश्किल

अमेरिका अगले तीन महीने में रद्द करेगा H-4 वीजा परमिट, भारतीयों की बढ़ेगी मुश्किल
अमेरिका अगले तीन महीने में रद्द करेगा H-4 वीजा परमिट, भारतीयों की बढ़ेगी मुश्किल

Will End Permits For Families Of H 1b Visa Holders In 3 Months Us

नई दिल्ली। ट्रंप प्रशासन ने एक फेडरल कोर्ट को बताया है कि उसने H-4 वीजा होल्डर्स के वर्क परमिट को वापस लेने का फैसला किया है। बता दें कि एच-1 बी वीजा धारकों के पति या पत्नी को काम करने के लिए एच-4 वीजा जारी किया जाता है। एच-4 वीजा धारकों में भारतीय पेशेवरों की संख्या अधिक है। अमेरिका में रोजगार की कमी को लेकर फेडरल कोर्ट में डाली गई याचिका के जवाब में ट्रम्प प्रशासन ने यह जानकारी दी।

H-4 वीजा को यूएस सिटिजनशिप ऐंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) जारी करता है। यह H-1B वीजा होल्डर्स के निकट परिजनों (पति या पत्नी और 21 वर्ष से कम आयु के बच्चे) को दिया जाता है। इस वीजा की सबसे ज्यादा डिमांड भारतीय आईटी पेशेवरों में होती है।

डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्यॉरिटी (DHS) ने शुक्रवार को डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया के यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट को बताया कि H-1B वीजा होल्डरों के परिजनों को H-4 वीजा के जरिए मिलने वाले वर्क परमिट को वह खत्म करने जा रहा है और इस दिशा में ठोस और तेज कदम उठाए जा रहे हैं। DHS ने बताया कि नए नियमों को 3 महीने के भीतर वाइट हाउस के बजट का प्रबंधन करने वाले दफ्तर में जमा कर दिया जाएगा। डिपार्टमेंट ने कोर्ट से तब तक के लिए प्रस्तावित नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई रोकने का आग्रह किया है। दूसरी तरफ याचिका दाखिल करने वाले समूह ने कोर्ट से जल्द फैसले का आग्रह किया है।

मंत्रालय ने अदालत से अनुरोध किया कि तब तक वह ‘सेव जॉब्स यूएस’ की ओर से दाखिल वाद पर अपने आदेश को स्थगित कर दे। ‘सेव जॉब्स यूएस’ अमेरिकी कर्मचारियों का संगठन है जिसका दावा है कि सरकार की इस प्रकार की नीति से उनकी नौकरियों पर असर पड़ा है। ओबामा प्रशासन के दौरान यह नीति तैयार की गई थी।

ट्रंप प्रशासन फिलहाल एच-1बी वीजा पॉलिसी की समीक्षा कर रहा है। उसका मानना है कि कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों के स्थान पर दूसरे को नौकरियां देने के लिए इस नीति का दुरुपयोग कर रही हैं। ट्रंप प्रशासन सार्वजनिक तौर पर यह कह चुका है और अदालत में अवेदन में भी उसने स्पष्ट कहा है कि वह एच4 वीजा धारकों के वर्क परमिट को हटाना चाहता है।

आंकड़ों के मुताबिक 25 दिसंबर, 2017 को यूएस सिटिजनशिप ऐंड इमिग्रेशन सर्विसेज ने 1,26,853 एप्लिकशन को रोजकार के लिए एच-4 वीजा के तहत मंजूरी दी थी। मई 2015 में कानून लागू हुआ था। एच-4 वीजा के तहत रोजगार पाने वालों में 93 फीसदी भारतीय हैं। इसके अलावा 5 फीसदी लोग चीन के हैं। वहीं बाकी के 2 फीसदी दुनिया के बाकी देशों से हैं।

नई दिल्ली। ट्रंप प्रशासन ने एक फेडरल कोर्ट को बताया है कि उसने H-4 वीजा होल्डर्स के वर्क परमिट को वापस लेने का फैसला किया है। बता दें कि एच-1 बी वीजा धारकों के पति या पत्नी को काम करने के लिए एच-4 वीजा जारी किया जाता है। एच-4 वीजा धारकों में भारतीय पेशेवरों की संख्या अधिक है। अमेरिका में रोजगार की कमी को लेकर फेडरल कोर्ट में डाली गई याचिका के जवाब में ट्रम्प प्रशासन ने यह जानकारी दी।…