हिमाचल में मतदान की बीच तेज हुई गुजरात की चुनावी राजनीति

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हिमाचल में मतदान की बीच तेज हुई गुजरात की चुनावी राजनीति

With Voting In Himachal Pradesh Gujarat Turns Center Of National Politics

नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश में 68 विधासभा सीटों पर मतदान जारी है। सुबह धीमी रफ्तार से शुरू हुई वोटिंग के प्रतिशत की बात की जाए तो सुबह 10 बजे तक 13 फीसदी से ज्यादा मतदान होने की जानकारी मिली है। एक ओर हिमाचल में मतदान शुरू होने के साथ चुनावी प्रचार थम चुका है तो दूसरी ओर राजनीतिक दलों ने गुजरात में अपना पूरा दमखम झोंकना शुरू कर दिया है।

हिमाचल प्रदेश में ताबड़ तोड़ चुनावी रैलियां करने के बाद भाजपा के दिग्गज नेताओं ने गुजरात में डेरा डाल दिया है। तो वहीं कांग्रेस भी चुनाव से पहले अपने समीकरणों को पुख्ता करने में जुट गई है। नोटबंदी, जीएसटी, दलितों पर अत्याचार और पाटीदारों के आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा को अब तक बैकफुट पर देखते हुए कांग्रेस ने जिस तरह की रणनीति तैयार की है उसी के तहत बुधवार की रात कपिल सिब्बल ने अहमदाबाद में पाटीदार आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल को मुलाकात के लिए बुलाया था।

सूत्रों की माने तो पहले से तय मानी जा रही कपिल सिब्बल और हार्दिक पटेल के बीच होने वाली इस बैठक में हार्दिक शामिल नहीं हुए। इसके बावजूद यह बैठक सुबह दो बजे तक चली। जिसमें पाटीदार आंदोलन से ​जुड़ी हार्दिक पटेल की टीम के 13 नेताओं ने कपिल सिब्बल के सामने अपनी मांगे रखीं थीं।

ऐसा कहा जा रहा था कि अगर कांग्रेस और पाटीदार आन्दोलन के नेता हार्दिक पटेल के बीच समझौता अंतिम पड़ाव पर है। कांग्रेस पाटीदार मतदाताओं के मोह में हार्दिक के चेहरे पर दांव लगाने को तैयार बैठी है, लेकिन समस्या 27 फीसदी आरक्षण को लेकर फंसी हुई है। हार्दिक कुछ कम पर भी संतोष करने को तैयार हैं लेकिन उनकी टीम के अन्य लोग इस बात पर अलग रॉय रखते हैं। जिस वजह से हार्दिक ने खुद पर बिकने के आरोप लगने से बचने के लिए अपनी टीम के 13 सदस्यों को बुधवार की रात हुई बैठक में भेजा।

हार्दिक पटेल ने कांग्रेस के चुनावी मंच पर खुले तौर पर आने से पहले पाटीदारों की मांगों को पूरा करने का आश्वासन देने की शर्त रखी थी। लेकिन गुजरात में लागू आरक्षण व्यवस्था के तहत संविधान के अनुसार 50 प्रतिशत की अधिकत सीमा तक पहुंच चुके ओबीसी, एससी और एसटी आरक्षण में पाटीदारों की हिस्सेदारी मांग ने कांग्रेस के जातीय गणित के बिगड़ने के संकेत दे दिए हैं।

पाटीदारों की मांग 27 फीसदी आरक्षण की है जिसके तहत सरकारी नौकरी और सरकारी कालेजों में उन्हें आरक्षित सीटों में 27 फीसदी हिस्सेदारी चाहिए है। पाटीदारों की यह मांग पहले से आरक्षण पा रही जातियों के नेताओं को रास नहीं आ रही। जिसके विकल्प स्वरूप कांग्रेस आर्थिक आधार पर पाटीदारों को आरक्षण देने का प्रस्तव रखा था। जिसे भाजपा सरकार पहले ही लागू कर चुकी है, और वर्तमान में यह फैसला सुप्रीम कोर्ट में चुनौती का सामना कर रहा है।

अब हार्दिक पटेल के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उनके आंदोलन को शांत करने के लिए भाजपा सरकार ने जो फार्मूला तैयार किया था, उसे नकारने खुद नकारने के बाद वह कैसे स्वीकार करें। अगर वह कांग्रेस द्वारा अपनाए गए भाजपा के फार्मूले को स्वीकार करते हैं तो भाजपा के बड़े पाटीदार नेता उन पर आंदोलन को बेंचने के आरोप लगाकर उनके लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर देंगे।

अल्पेश ठाकुर का साथ भी कांग्रेस की मजबूरी —

गुजरात में बड़े ओबीसी चेहरे के रूप में उभर के सामने आए अल्पेश ठाकुर पहले से कांग्रेस के पाले में आ चुके हैं और राहुल गांधी के साथ मंच भी साझा कर चुके हैं। चूंकि पाटीदारों की आरक्षण की मांग सीधे तौर पर ओबीसी आरक्षण पर केन्द्रित है इसलिए अल्पेश ठाकुर ओबीसी वोटरों के बीच अपनी साख को दांव पर लगाकर पाटीदारों के साथ कांग्रेस के लिए किसी तरह का समझौता स्वीकार नहीं करेंगे।

गुजरात में कांग्रेस जिन आंकड़ों के भरोसे अपनी जीत का सपना देख रही है, उन आंकड़ों का ​भविष्य रोज बनता बिगड़ता नजर आ रहा है। कांग्रेस की जरूरत अल्पेश ठाकुर भी हैं और हार्दिक पटेल भी। अब कांग्रेस आरक्षण की बिसात पर बैठी गुजरात की राजनीति में कौन सी चाल चलेगी यह आने वाला समय ही बताएगा।

नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश में 68 विधासभा सीटों पर मतदान जारी है। सुबह धीमी रफ्तार से शुरू हुई वोटिंग के प्रतिशत की बात की जाए तो सुबह 10 बजे तक 13 फीसदी से ज्यादा मतदान होने की जानकारी मिली है। एक ओर हिमाचल में मतदान शुरू होने के साथ चुनावी प्रचार थम चुका है तो दूसरी ओर राजनीतिक दलों ने गुजरात में अपना पूरा दमखम झोंकना शुरू कर दिया है। हिमाचल प्रदेश में ताबड़ तोड़ चुनावी रैलियां करने के बाद…