फिर इंसानियत हुई शर्मसार, मृत भ्रूण को लेकर अस्पताल के चक्कर लगाती रही महिला, इलाज न मिलने पर उसकी भी मौत

रायपुर। ओडिशा के बाद छत्तीसगढ़ में एक इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। छत्तीसगढ के कोरबा जिले में एक महिला मरे हुए भ्रूण को लेकर अस्पतालों के चक्कर लगाती रही। अंत में इलाज न मिलने से महिला ने भी दम तोड़ दिया। फिलहाल इस मामले को संज्ञान में लेते हुए छत्तीसगढ़ महिला आयोग ने जांच के आदेश दे दिए हैं।

बासीन गांव की रहने वाली 22 सरस्वती के पेट में करीब आठ माह का बच्चा पल रहा था। एक दिन अचानक उसके पेट में दर्द हुआ तो पहले तो घरवालों ने प्राथमिक उपचार किया लेकिन उससे भी कोई फायदा नहीं हुआ तो उसका पति गुलाबदास उसे लेकर जमुनादेवी मेमोरियल हॉस्पिटल ले गया जहां डॉक्टरों ने बताया कि सरस्वती के पेट में पल रहा भ्रूण मर गया। अस्पताल के स्टाफ ने गुलाबदास को सलाह दी कि वह दस हजार रुपए और खून का इंतजाम करे नहीं तो उसकी पत्नी की भी जान जा सकती है। यदि वह 10 हजार रुपए का इंतजाम नहीं कर पायेगा तो उसकी पत्नी को डॉक्टर नहीं देख पाएंगे।

जहां इस गरीब के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल है वहां वह दस हजार रुपए कहाँ से जुटा पायेगा। खैर वह पैसों के इंतजाम के लिए सगे-संबंधियों से संपर्क किया लेकिन सच है मुसीबत के वक्त कोई साथ नहीं देता। ऐसा गुलाबदास के साथ भी हुआ उसे भी कहीं से कोई रुपए नहीं मिले। उधर पत्नी के पेट में दर्द बढ़ता गया, थक हारकर उसने फिर उसी अस्पताल में अपनी पत्नी को दाखिल करवाने के लिए ले गया। लेकिन यहां तो धरती के भगवान् की उपाधि पाए लुटेरे बैठे हैं। बिना पैसे के हाथ भी नहीं लगाते।

उपचार में देरी होने से महिला के पेट में संक्रमण फैल गया तो डॉक्टरों ने उन्हे दूसरे अस्पताल मे जाने कि सलाह दी। इसके बाद पत्नी पति कृष्णा अस्पताल में गये लेकिन गंभीर हालत में मरीज को देखकर डॉक्टरों ने भर्ती करने से इन्कार कर दिया। फिर सरस्वती को सृष्टि अस्पताल ले जाया गया जहां तत्काल इलाज करने के बजाय अगले दिन के लिए टाल दिया गया। मंगलवार को महिला ने भी दम तोड़ दिया। गुलाबदास का आरोप है कि उसकी पत्नी की मौत डॉक्टरों की लापरवाही से हुई है। यदि वह समय से ऑपरेशन करते तो शायद उसकी सरस्वती बच सकती थी।

आपको बता दें कि यह कोई पहला मामला नहीं है जहां पैसों के चलते एक महिला ने दम तोड़ा हो। आये दिन आपको ऐसे मामले में अखबारों में देखने को मिल जाएंगे। बीते एक माह में देखा जाए तो आपको दसों ऐसे मामले देखने को मिलेंगे जिसमें पैसे के चलते किसी को 60 किमी तक अपनी पत्नी के शव को कंधे पर रखकर चलना पड़ा, तो कहीं पैसे को चलते बेटी के शव को कंधे पर चलना पड़ा। इतना ही नहीं एक ने तो बेटे के कफ़न के लिए भीख तक मांगी। फिलहाल सरकार को धन उगाही का केंद्र बने इन अस्पतालों पर रोक लगानी चाहिए और इनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।