महिला ने फर्जी मार्कशीट पर 33 साल तक रेलवे में की नौकरी, रिटायरमेंट से पहले ऐसे खुला राज

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महिला ने फर्जी मार्कशीट पर 33 साल तक रेलवे में की नौकरी, रिटायरमेंट से पहले ऐसे खुला राज

नई दिल्ली। महिला ने फर्जी मार्कशीट लगाकर रेलवे में नौकरी प्राप्त कर ली। धीरे धीरे प्रमोशन पाकर वह कार्यालय अधीक्षक के पद तक पहुंच गई। महिला कुछ माह में रिटायर होने वाली थी लेकिन उसके भतीजे ने भर्ती होने के 33 साल बाद सारा मामला खोल दिया। पहाड़गंज पुलिस ने 59 साल की कमलेश देवी को गिरफ्तार कर लिया।

Woman Has Worked In Railway For 33 Years On Fake Marksheet This Is Revealed Before Retirement :

पुलिस के मुताबिक पहाड़गंज थाने में बीते साल नवंबर में कोर्ट के आदेश पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ था।
महिला के भतीजे सुभाष ने एफआईआर में कहा कि उनकी बुआ कमलेश देवी वर्ष 1986 में चतुर्थ श्रेणी के पद पर रेलवे में भर्ती हुई थीं, लेकिन असलियत में वह सिर्फ छठीं पास ही हैं। अपने दावे के समर्थन में सुभाष ने उन शिक्षण संस्थानों से सूचना का अधिकार के तहत प्राप्त जवाब की प्रति भी लगाई थी, जिनमें आरोपी महिला ने शिक्षा लेने का दावा किया था।

पुलिस ने बताया कि महिला ने प्रौढ़ स्कूल का प्रमाण पत्र लगाया था। करीब 11 माह की जांच के बाद पुलिस ने महिला को किनारी बाजार मोरी गेट से गिरफ्तार कर लिया।

इस मामले की पैरवी करने वाला सुभाष आरोपी महिला कमलेश देवी के सगे भाई का बेटा है। आनंद पर्वत इलाके में कमलेश देवी का सुभाष के पिता से संपत्ति विवाद चल रहा था। वर्ष 1990 में सुभाष की शादी तय हुई। उसने अपनी बुआ से उसके घर में सामान रखने की अनुमति मांगी, मगर बुआ ने गैरकानूनी तरीके से घर में घुसने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया। जब पुलिस ने सुभाष को गिरफ्तार किया, तब वह नेवी में सेलर की नौकरी ज्वाइन करने वाला था। इस मुकदमे की सुनवाई के दौरान उसके छोटे भाई ने आत्महत्या कर ली। आर्थिक तंगी के कारण सुभाष अपनी पत्नी का इलाज तक नहीं करा पाया, जिसकी वजह से वे संतान सुख से वंचित रह गया।

नई दिल्ली। महिला ने फर्जी मार्कशीट लगाकर रेलवे में नौकरी प्राप्त कर ली। धीरे धीरे प्रमोशन पाकर वह कार्यालय अधीक्षक के पद तक पहुंच गई। महिला कुछ माह में रिटायर होने वाली थी लेकिन उसके भतीजे ने भर्ती होने के 33 साल बाद सारा मामला खोल दिया। पहाड़गंज पुलिस ने 59 साल की कमलेश देवी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक पहाड़गंज थाने में बीते साल नवंबर में कोर्ट के आदेश पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ था। महिला के भतीजे सुभाष ने एफआईआर में कहा कि उनकी बुआ कमलेश देवी वर्ष 1986 में चतुर्थ श्रेणी के पद पर रेलवे में भर्ती हुई थीं, लेकिन असलियत में वह सिर्फ छठीं पास ही हैं। अपने दावे के समर्थन में सुभाष ने उन शिक्षण संस्थानों से सूचना का अधिकार के तहत प्राप्त जवाब की प्रति भी लगाई थी, जिनमें आरोपी महिला ने शिक्षा लेने का दावा किया था। पुलिस ने बताया कि महिला ने प्रौढ़ स्कूल का प्रमाण पत्र लगाया था। करीब 11 माह की जांच के बाद पुलिस ने महिला को किनारी बाजार मोरी गेट से गिरफ्तार कर लिया। इस मामले की पैरवी करने वाला सुभाष आरोपी महिला कमलेश देवी के सगे भाई का बेटा है। आनंद पर्वत इलाके में कमलेश देवी का सुभाष के पिता से संपत्ति विवाद चल रहा था। वर्ष 1990 में सुभाष की शादी तय हुई। उसने अपनी बुआ से उसके घर में सामान रखने की अनुमति मांगी, मगर बुआ ने गैरकानूनी तरीके से घर में घुसने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया। जब पुलिस ने सुभाष को गिरफ्तार किया, तब वह नेवी में सेलर की नौकरी ज्वाइन करने वाला था। इस मुकदमे की सुनवाई के दौरान उसके छोटे भाई ने आत्महत्या कर ली। आर्थिक तंगी के कारण सुभाष अपनी पत्नी का इलाज तक नहीं करा पाया, जिसकी वजह से वे संतान सुख से वंचित रह गया।