ये कैसी मजबूरी, 15 दिन के बच्चे को मां ने 45 हजार में बेचा

बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली के मीरगंज इलाके से एक ऐसा मामला सामने आया है जहां कर्ज चुकाने के लिए मां ने अपने कलेजे के टुकड़े की ही कीमत लगा दी। मीरगंज की एक महिला ने पति के इलाज के लिए अपने 15 दिन के बच्चे को 45 हजार रुपये में बेच दिया। इस मामले से ये साफ हो रहा है कि आज भी भारत में गरीबी का क्या आलम है। डीएम के निर्देश पर नवाबगंज के एसडीएम कुंवर पंकज और सीओ पीतमपाल सिंह हाफिजगंज गांव खोह ढकिया में हरस्वरूप मौर्या के घर पहुंचे और पूरी जानकारी ली।

Woman Sells Her Baby For The Treatment Of Husband In Bareilly Uttar Pradesh :

यह है पूरा मामला

इस मामले का खुलासा तब हुआ जब पड़ोसियों को बच्चा नहीं दिखा तो दंपती से उसके बारे में पूछा और पूरी सच्चाई सामने आई। मामला हाफिजगंज के गांव ढकिया का है। 9 अक्टूबर को काम करते वक्त खटीमा में निर्माणाधीन मकान की दीवार का एक हिस्सा हरस्वरूप मौर्य के ऊपर गिर गया, जिसमें वो गंभीर रूप से घायल हो गया। इस घटना के बाद से कमर के नीचे का हिस्से ने काम करना बंद कर दिया। पैसों की कमी की वजह से इलाज ठीक से नहीं हो सका। घर में अकेले कमाने वाले हरस्वरूप के बीमार होने से घरवालों के सामने पैसे की परेशानी आने लगी।

हरस्वरूप मौर्य मजदूरी करते थे उन्होने अफसरों को बताया कि ‘बेचते नहीं तो क्या करते, हमारे पास दूसरा कोई चारा नहीं था। समय पर इलाज न होने की वजह से अब पैरों ने काम करना भी बंद कर दिया है। नौकरी करने के लायक भी नहीं बचा हूं।’ बातचीत के दौरान पता चला कि उसके पास न जमीन है न ही राशन कार्ड है। दो साल पहले गांव में जमीन के पट्टे हुए, उसने कोशिश की। पट्टा आवंटन की लिस्ट में उसका नाम नहीं आया।

इस बीच 14 दिसम्बर को हरस्वरूप की पत्नी संजू ने अपने तीसरे बेटे को जन्म दिया। इस दंपती को मदद की उम्मीद थी, न ही पति के हालत सुधरने की आस। मां ने अपने कलेजे के टुकड़े को 42 हजार रुपए में में बेच दिया, ताकि बीमार पति हरस्वरूप का इलाज करा सके। महिला का कहना है कि बेटे को बेचने के अलावा कोई और रास्ता उसके पास नहीं था। हमारे पास पैसे आए, इसलिए हमने बेटे को बेच दिया। पति के इलाज के लिए पैसे नहीं थे। नवजात को बेचने की खबर लगते ही प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे पीड़ित परिवार को हरसंभव मदद का भरोसा दिया।

बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली के मीरगंज इलाके से एक ऐसा मामला सामने आया है जहां कर्ज चुकाने के लिए मां ने अपने कलेजे के टुकड़े की ही कीमत लगा दी। मीरगंज की एक महिला ने पति के इलाज के लिए अपने 15 दिन के बच्चे को 45 हजार रुपये में बेच दिया। इस मामले से ये साफ हो रहा है कि आज भी भारत में गरीबी का क्या आलम है। डीएम के निर्देश पर नवाबगंज के एसडीएम कुंवर पंकज और सीओ पीतमपाल सिंह हाफिजगंज गांव खोह ढकिया में हरस्वरूप मौर्या के घर पहुंचे और पूरी जानकारी ली।यह है पूरा मामलाइस मामले का खुलासा तब हुआ जब पड़ोसियों को बच्चा नहीं दिखा तो दंपती से उसके बारे में पूछा और पूरी सच्चाई सामने आई। मामला हाफिजगंज के गांव ढकिया का है। 9 अक्टूबर को काम करते वक्त खटीमा में निर्माणाधीन मकान की दीवार का एक हिस्सा हरस्वरूप मौर्य के ऊपर गिर गया, जिसमें वो गंभीर रूप से घायल हो गया। इस घटना के बाद से कमर के नीचे का हिस्से ने काम करना बंद कर दिया। पैसों की कमी की वजह से इलाज ठीक से नहीं हो सका। घर में अकेले कमाने वाले हरस्वरूप के बीमार होने से घरवालों के सामने पैसे की परेशानी आने लगी।हरस्वरूप मौर्य मजदूरी करते थे उन्होने अफसरों को बताया कि 'बेचते नहीं तो क्या करते, हमारे पास दूसरा कोई चारा नहीं था। समय पर इलाज न होने की वजह से अब पैरों ने काम करना भी बंद कर दिया है। नौकरी करने के लायक भी नहीं बचा हूं।' बातचीत के दौरान पता चला कि उसके पास न जमीन है न ही राशन कार्ड है। दो साल पहले गांव में जमीन के पट्टे हुए, उसने कोशिश की। पट्टा आवंटन की लिस्ट में उसका नाम नहीं आया।इस बीच 14 दिसम्बर को हरस्वरूप की पत्नी संजू ने अपने तीसरे बेटे को जन्म दिया। इस दंपती को मदद की उम्मीद थी, न ही पति के हालत सुधरने की आस। मां ने अपने कलेजे के टुकड़े को 42 हजार रुपए में में बेच दिया, ताकि बीमार पति हरस्वरूप का इलाज करा सके। महिला का कहना है कि बेटे को बेचने के अलावा कोई और रास्ता उसके पास नहीं था। हमारे पास पैसे आए, इसलिए हमने बेटे को बेच दिया। पति के इलाज के लिए पैसे नहीं थे। नवजात को बेचने की खबर लगते ही प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे पीड़ित परिवार को हरसंभव मदद का भरोसा दिया।