इन चार देशों में महिलाओं के साथ डिलिवरी के दौरान हुआ दुर्वव्यवहार, WHO के सर्वे में हुआ खुलासा

misbehaviour with delivery time
इन चार देशों में महिलाओं के साथ डिलिवरी के दौरान होता है दुर्वव्यवहार, WHO के सर्वे में हुआ अध्यन्न

नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चार देशों में कराए गए सर्वे के दौरान अध्यन्न में पाया गया कि एक तिहाई महिलाओं के साथ डिलिवरी के दौरान दुर्वव्यवहार किया जाता है। इस अध्ययन में 2,016 महिलाओं की परिस्थितियों को परखने के बाद पाया गया कि इनमें से 42 फ़ीसदी महिलाओं ने डिलिवरी के दौरान शारीरिक और शाब्दिक दुर्व्यवहार, लांछन और भेदभाव का सामना किया है।

Women In These Four Countries Are Abused During Delivery Study Done In Who Survey :

बता दें कि यह अध्ययन ‘द लांसेट’ सायंस जर्नल में प्रकाशित हुआ है। जिन चार देशों में सर्वे किया गया वो घाना, गिनी, म्यांमार और नाईजीरिया से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर प्रसव के दौरान महिलाओं के साथ दुर्वव्यवहार किए जाने की बात सामने आई है। यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार प्रसव के दौरान दाई की मदद सहित गुणवत्तापरक सहारे के अन्य ज़रिए जीवन और मौत के बीच का अंतर तय करते हैं।

इसके अलावा, 800 से ज़्यादा महिलाएं हर दिन प्रसव और मातृत्व के दौरान मौत का शिकार होती हैं। युवा व कम पढ़ी-लिखी महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार की संभावना ज़्यादा रहती है। साथ अध्यन्न में ये भी पाया गया कि 11 महिलाओं को उनकी नस्ल और जातीयता के आधार पर भेदभाव या कथित लांछन का सामना करना पड़ा है और 752 महिलाओं को किसी ना किसी रूप में शाब्दिक प्रताड़ना जैसे चिल्लाने डांटे जाने और मखौल उड़ाए जाने से भी गुजरना पड़ा है।

अध्यन्न में क़रीब 14 प्रतिशत महिलाओं को थप्पड़ या मुक़्का मारे जाने सहित अन्य शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी है। शोधकर्ताओं ने अपनी जांच में पया कि सीज़ेरियन ऑपरेशन से बच्चे होने के ऐसे 35 मामले सामने आए जिनमें मां की सहमति नहीं ली गई थी जबकि 2,611 केस ऐसे थे जिनमें बिना अनुमति के यौन अंग की जांच की गई।

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने रोकथाम के लिए बनाई ये रणनीति: 

– डिलिवरी वार्ड बनाते समय महिलाओं की ज़रूरतों का ध्यान रखा जाना

– चिकित्सा परीक्षणों के दौरान उनकी सहमति का ख़याल रखा जाना

– गुणवत्तापरक स्वास्थ्य सेवा के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को मदद प्रदान करना

– डिलिवरी पीड़ा और शिशु के जन्म के समय किसी के साथ का अधिकार सुनिश्चित करना

– ऐसी गुणवत्तापरक मातृत्व सेवाएं उपलब्ध कराना जहां दुर्व्यवहार के मामले अस्वीकार्य हों

नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चार देशों में कराए गए सर्वे के दौरान अध्यन्न में पाया गया कि एक तिहाई महिलाओं के साथ डिलिवरी के दौरान दुर्वव्यवहार किया जाता है। इस अध्ययन में 2,016 महिलाओं की परिस्थितियों को परखने के बाद पाया गया कि इनमें से 42 फ़ीसदी महिलाओं ने डिलिवरी के दौरान शारीरिक और शाब्दिक दुर्व्यवहार, लांछन और भेदभाव का सामना किया है। बता दें कि यह अध्ययन ‘द लांसेट’ सायंस जर्नल में प्रकाशित हुआ है। जिन चार देशों में सर्वे किया गया वो घाना, गिनी, म्यांमार और नाईजीरिया से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर प्रसव के दौरान महिलाओं के साथ दुर्वव्यवहार किए जाने की बात सामने आई है। यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार प्रसव के दौरान दाई की मदद सहित गुणवत्तापरक सहारे के अन्य ज़रिए जीवन और मौत के बीच का अंतर तय करते हैं। इसके अलावा, 800 से ज़्यादा महिलाएं हर दिन प्रसव और मातृत्व के दौरान मौत का शिकार होती हैं। युवा व कम पढ़ी-लिखी महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार की संभावना ज़्यादा रहती है। साथ अध्यन्न में ये भी पाया गया कि 11 महिलाओं को उनकी नस्ल और जातीयता के आधार पर भेदभाव या कथित लांछन का सामना करना पड़ा है और 752 महिलाओं को किसी ना किसी रूप में शाब्दिक प्रताड़ना जैसे चिल्लाने डांटे जाने और मखौल उड़ाए जाने से भी गुजरना पड़ा है। अध्यन्न में क़रीब 14 प्रतिशत महिलाओं को थप्पड़ या मुक़्का मारे जाने सहित अन्य शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी है। शोधकर्ताओं ने अपनी जांच में पया कि सीज़ेरियन ऑपरेशन से बच्चे होने के ऐसे 35 मामले सामने आए जिनमें मां की सहमति नहीं ली गई थी जबकि 2,611 केस ऐसे थे जिनमें बिना अनुमति के यौन अंग की जांच की गई।
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने रोकथाम के लिए बनाई ये रणनीति: 
- डिलिवरी वार्ड बनाते समय महिलाओं की ज़रूरतों का ध्यान रखा जाना - चिकित्सा परीक्षणों के दौरान उनकी सहमति का ख़याल रखा जाना - गुणवत्तापरक स्वास्थ्य सेवा के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को मदद प्रदान करना - डिलिवरी पीड़ा और शिशु के जन्म के समय किसी के साथ का अधिकार सुनिश्चित करना - ऐसी गुणवत्तापरक मातृत्व सेवाएं उपलब्ध कराना जहां दुर्व्यवहार के मामले अस्वीकार्य हों