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फाइलेरिया अभियान पर कार्यशाला कल, आठ जिलों में चलेगा फाइलेरिया उन्मूलन अभियान

By आराधना शर्मा 
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नई दिल्ली: फाइलेरिया निरोधी विशेष अभियान से पहले शुक्रवार को इस विषय पर एक वर्चुअल संवेदीकरण कार्यशाला आयोजित की जा रही है। यह कार्यशाला दोपहर साढ़े 12 बजे शुरू होगी जिसका जूम एप लिंक https://zoomus/j/94186189867 है। राज्यस्तरीय संचारी रोग नियंत्रण के नोडल अधिकारी डॉ वी.पी. सिंह की अध्यक्षता में आयोजित हो रही इस वर्चुअल संवेदीकरण कार्यशाला में राज्यस्तरीय और संबंधित आठ जिलों के पत्रकार शामिल होंगे।

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आपको बता दें, एडिशनल डायरेक्टर,¸ भारत सरकार डॉ नुपुर ने बताया कि उत्तर प्रदेश के आठ जनपदों फर्रुखाबाद, कन्नौज, इटावा, औरया, कौशाम्बी, गाजीपुर, रायबरेली व सुलतानपुर में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान 21 दिसंबर से शुरू हो रहा है। यह अभियान 1 जनवरी तक चलेगा। इस दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, एमपीडब्ल्यू, एएनएम, आशा एवं स्वयंसेवी कार्यकर्ता घर-घर जाकर फाइलेरिया रोग से बचाव के लिए लोगों को जागरूक करेंगी। साथ ही दवा खिलाएंगी।

उन्होंने बताया फाइलेरिया रोग में अक्सर हाथ या पैर बहुत ही ज़्यादा सूजन हो जाती है। इसलिए इस रोग को हाथी पांव भी कहते हैं। उन्होंने बताया कि यदि स्तन में लगातार सूजन बनी रहती है तो यह भी फाइलेरिया रोग हो सकता है। समय रहते अगर इसका इलाज नहीं किया गया तो इस समस्या के हल के लिए आपरेशन भी करना पड़ सकता है। यह बीमारी बढ़ने से शरीर का आकार खराब हो जाता है साथ ही मरीज अवसाद में जाने लगता है। उन्होंने बताया कि दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती और गंभीर रोग से बीमार व्यक्तियों को दवा सेवन नहीं कराया जाएगा। जिन व्यक्तियों के अंदर माइक्रो फायलेरिया के कीटाणु रहते है, उन्हें दवा सेवन करने पर कुछ प्रभाव जैसे- जी मचलाना, उल्टी आना, हल्का बुखार आना, चक्कर आना आदि हो सकता है। इससे घबराना नहीं चाहिए।

कैसे होता है फाइलेरिया

फाइलेरिया दुनिया की दूसरे नंबर की ऐसी बीमारी है जो बड़े पैमाने पर लोगों को विकलांग बना रही है।इस बीमारी का खतरा लगभग 60 करोड़ भारतीयों पर मंडरा रहा है। साथ ही कहा कि 21 राज्यों और केंद्र शासित राज्यों के 257 जिले फाइलेरिया से प्रभावित हैं। लिंफेटिक फाइलेरियासिस को ही आम बोलचाल की भाषा में फाइलेरिया कहा जाता है।

साथ ही कहा पिछले वर्ष 2019-20 में चले अभियान के दौरान लगभग 76,674 लोग इस बीमारी से ग्रसित मिले थे, जिसमें से 29,228 लोग हाईड्रोशील से ग्रसित थे, यानि यह बीमारी हमारे शरीर के किसी भी अंग को प्रभाबित कर सकती है। यह बीमारी मरीज को मृत समान बना देता है।

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साथ ही कहा कि फाइलेरिया की बीमारी क्यूलैक्स मच्छर के काटने से फैलती है, इस मच्छर के पनपने में मल, नालियों और गड्ढों का गंदा पानी मददगार होता है , इस मच्छर के लार्वा पानी में टेढ़े होकर तैरते रहते हैं। क्यूलैक्स मच्छर जब किसी व्यक्ति को काटता है तो वह फाइलेरिया के छोटे कृमि का लार्वा उसके अंदर पहुँचा देता है। संक्रमण पैदा करने वाले लार्वा के रुप में इनका विकास 10 से 15 दिनों के अंदर होता है। इस अवस्था में मच्छर बीमारी पैदा करने वाला होता है। इस तरह यह चक्र चलता रहता है।

फाइलेरिया के लक्षण

  • स्तन, एक या दोनों हाथ व पैरों में सूजन
  • कॅपकॅपी के साथ बुखार आना
  • गले में सूजन आना
  • गुप्तांग एवं जांघों के बीच गिल्टी होना तथा दर्द रहना
  • पुरूषों के अंडकोष में सूजन (हाइड्रोसिल) होना
  • पैरों व हाथों की लसिका वाहिकाएं लाल हो जाती हैं

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