एक अगस्त से सात दिन चलेगा ‘विश्व स्तनपान दिवस’

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एक अगस्त से सात दिन चलेगा 'विश्व स्तनपान दिवस'

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की सचिव वी. हेकाली झिमोमी ने आज कहा कि सरकार के निरन्तर प्रयासों और जागरूकता अभियानों के उपरान्त भी 75 प्रतिशत नवजातों को माताओं का दूध प्राप्त नहीं हो रहा है। इसके लिए बड़े स्तर पर जागरूकता फैलाने तथा परिवारों तक इसकी जानकारी पहुंचाने की आवश्यता है।

World Breastfeeding Week :

उन्होने यूनीसेफ और विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश में औसतन 25 प्रतिशत बच्चे ही जन्म के एक घंटे के अन्दर मां का स्तनपान कर पा रहे हैं, जो कि एक चिंताजनक विषय है, जब कि शत प्रतिशत नवजात शिशुओं को एक घंटे के भीतर स्तनपान करना चाहिये, माँ के प्रथम दूध में मौजूद पोषक तत्व और एंटीबॉडी बच्चे को दीर्घजीवी और निरोग बनाने में यह ‘प्रथम टीके’ की तरह कार्य करते हैं। जन्म के प्रथम घंटे में स्तनपान से वंचित बच्चों में बीमारी की संभावना अधिक होती है और उनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती है।

वी. हेकाली झिमोमी आज ‘विश्व स्तनपान दिवस’ की पूर्वसंध्या पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तर प्रदेश मुख्यालय के राज्य कार्यक्रम प्रबन्धन इकाई सभागार में एक प्रेस कांफ्रेंस को सम्बोधित कर रही थी। विश्व स्तनपान सप्ताह की पूर्व संध्या पर मीडिया से बात करते हुए, उत्तर प्रदेश सरकार की सचिव, ने कहा, “मां को जन्म के बाद उन महत्वपूर्ण मिनटों में स्तनपान कराने के लिए चिकित्सा ईकाई कर्मियों और परिवारीजनों से पर्याप्त समर्थन की आवश्यकता है। प्रसव के उपरान्त देखभाल की गुणवत्ता में सुधार हेतु राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सहयोग से समुदाय और स्वास्थ्य इकाई दोनों स्तर पर स्तनपान कराने के प्रचार हेतु सतत् प्रयास किये जा रहे हैं।”

राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों के साथ साझेदारी में स्वास्थ्य इकाई स्तर पर प्रत्येक नवजात को स्तनपान कराने के लिए एक राज्यव्यापी प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। राज्य में ससमय स्तनपान कराने की शुरुआत की दर- बुंदेलखंड के तीन जिलों – महोबा (42.1), बांदा (41) और ललितपुर (40) में अन्य जिलों की तुलना से बेहतर है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-4) के आंकड़ों के अनुसार (वर्ष 2015-16) जिला गोंडा (13.3), मेरठ (14.3), बिजनौर (14.7), हाथरस (15.3), शाहजहांपुर (15.8) सबसे कम है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की सचिव वी. हेकाली झिमोमी ने आज कहा कि सरकार के निरन्तर प्रयासों और जागरूकता अभियानों के उपरान्त भी 75 प्रतिशत नवजातों को माताओं का दूध प्राप्त नहीं हो रहा है। इसके लिए बड़े स्तर पर जागरूकता फैलाने तथा परिवारों तक इसकी जानकारी पहुंचाने की आवश्यता है।उन्होने यूनीसेफ और विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश में औसतन 25 प्रतिशत बच्चे ही जन्म के एक घंटे के अन्दर मां का स्तनपान कर पा रहे हैं, जो कि एक चिंताजनक विषय है, जब कि शत प्रतिशत नवजात शिशुओं को एक घंटे के भीतर स्तनपान करना चाहिये, माँ के प्रथम दूध में मौजूद पोषक तत्व और एंटीबॉडी बच्चे को दीर्घजीवी और निरोग बनाने में यह 'प्रथम टीके' की तरह कार्य करते हैं। जन्म के प्रथम घंटे में स्तनपान से वंचित बच्चों में बीमारी की संभावना अधिक होती है और उनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती है।वी. हेकाली झिमोमी आज 'विश्व स्तनपान दिवस' की पूर्वसंध्या पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तर प्रदेश मुख्यालय के राज्य कार्यक्रम प्रबन्धन इकाई सभागार में एक प्रेस कांफ्रेंस को सम्बोधित कर रही थी। विश्व स्तनपान सप्ताह की पूर्व संध्या पर मीडिया से बात करते हुए, उत्तर प्रदेश सरकार की सचिव, ने कहा, "मां को जन्म के बाद उन महत्वपूर्ण मिनटों में स्तनपान कराने के लिए चिकित्सा ईकाई कर्मियों और परिवारीजनों से पर्याप्त समर्थन की आवश्यकता है। प्रसव के उपरान्त देखभाल की गुणवत्ता में सुधार हेतु राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सहयोग से समुदाय और स्वास्थ्य इकाई दोनों स्तर पर स्तनपान कराने के प्रचार हेतु सतत् प्रयास किये जा रहे हैं।"राज्य चिकित्सा महाविद्यालयों के साथ साझेदारी में स्वास्थ्य इकाई स्तर पर प्रत्येक नवजात को स्तनपान कराने के लिए एक राज्यव्यापी प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। राज्य में ससमय स्तनपान कराने की शुरुआत की दर- बुंदेलखंड के तीन जिलों - महोबा (42.1), बांदा (41) और ललितपुर (40) में अन्य जिलों की तुलना से बेहतर है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-4) के आंकड़ों के अनुसार (वर्ष 2015-16) जिला गोंडा (13.3), मेरठ (14.3), बिजनौर (14.7), हाथरस (15.3), शाहजहांपुर (15.8) सबसे कम है।