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विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस: खुदकुशी के केस 10% बढ़े, संवाद से हो सकते हैं कम…

World Suicide Prevention Day Suicide Cases Increase By 10 Communication May Reduce

By आराधना शर्मा 
Updated Date

लखनऊ: देश में आत्महत्या के मामले बढ़ते जा रहे हैं। नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक देश में आत्महत्या के केस बीते साल की तुलना में 10.4 प्रतिशत बढ़े हैं। हालांकि अपने यूपी में महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, तमिलनाडू, कर्नाटक की तुलना में काफी कम केस हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक आत्महत्या की मानसिकता रखने वाले ऐसे किसी व्यक्ति से संवाद करने से काफी मामले कम हो सकते हैं और इसके लिए समाज का हर व्यक्ति भागीदार हो सकता है।

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मनोचिकित्सक डॉ अलीम सिद्दीकी के मुताबिक आत्महत्या करने वाला व्यक्ति तीन स्टेज में होता है। पहली- वह मझधार में होता है कि करूं या न करूं। दूसरी- आत्महत्या का ख्याल आया और फिर चला गया और तीसरी- आत्महत्या का पुख्ता इरादा कर चुका होता है। पहली दो स्टेज वाले व्यक्ति को बातचीत कर ऐसा कदम उठाने से रोका जा सकता है।
उन्होंने कहा कि ऐसी मानसिकता वाले व्यक्ति से संवाद कर उसे बचाया जा सकता है। यह संवाद समाज का हर व्यक्ति कर सकता है। इसके लिए डाक्टर होना जरूरी नहीं है।

डॉ अलीम ने बताया कि नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक देश में आत्महत्या के केस बीते साल की तुलना में 10.4 प्रतिशत बढ़े हैं। इसमें पारिवारिक मामले, बीमारियों व नशे के कारण 50 प्रतिशत से अधिक लोगों ने खुदकुशी की है। साफ है कि समाज को इन मुद्दों को एड्रेस करना होगा। उन्होंने कहा कि अवसाद (डिप्रेशन) भी आत्महत्या का एक बड़ा कारण है लेकिन ऐसा देखा गया है कि अवसाद खत्म होने पर इंसान में आत्महत्या करने की चाह खत्म हो जाती है।

जिंदगी के प्रति रखें संतुलित नजरिया

उन्होंने कहा कि आत्महत्या को रोका जा सकता है। आत्महत्या के पीछे मनोवैज्ञानिक, सामाजिक, आर्थिक, पारिवारिक, व्यक्तिगत, सांस्कृतिक एवं परिस्थकीय कारण होते हैं। जिंदगी के प्रति संतुलित नजरिया रखें। अच्छा और बुरा दोनों ही जिंदगी के पहलू हैं। अपनी गलतियों से सीखें। नकारात्मक सोच को जरिया न बनाएं।

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आत्महत्या के चेतावनी संकेत

  •  निराशा, क्रोधी होना, बदले की भावना
  • लापरवाह व्यवहार या बिना सोचे ज़ोखिमपूर्ण गतिविधियों में भाग लेना
  • फंसा महसूस करना जैसे कि कोई रास्ता नहीं है
  • शराब या मादक पदार्थों के उपयोग में बढ़ोत्तरी, मित्र
  • परिवार और समाज से अलग होना
  • चिंता, व्याकुलता, सोने में परेशानी या हर समय सोते रहना और अचानक स्वभाव में बदलाव

एनसीआरबी का डेटा

  • महराष्ट्र 13.6%
  • तमिलनाडू 9.7%
  • पश्चिम बंगाल 9.1%
  • मध्यप्रदेश 9.0%
  • कर्नाटक 8.1%
  • उत्तर प्रदेश 3.9%

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