दुनिया के Top 10 Cashless Countries, जानिए कैशलेस का मतलब

नई दिल्ली। भारत में 9 नंवबर से 500 और 1000 रुपए की नोट करेंसी पर लागू हुई बंदी के बाद से एक शब्द कैशलेस इकोनॉमी बहुत चर्चा में है। कैशलेस से बहुत हद तक स्पष्ट हो जाता है कि यह प्रक्रिया बिना नोटों और नगदी के लेन देन को संभव बनाती है। बिना किसी मुद्रा या नोट करेंसी के किसी वस्तु की कीमत चुकाने के आजकल कई माध्यम मौजूद हैं, जिन्हें दुनिया के कई अग्रणी देश प्रयोग में ला रहे हैं। जिससे इन देशों में टैक्स चोरी पर बहुत हद तक लगाम कसी है तो वहीं आम आदमी को भी नकली करेंसी जैसे नुकसानों से दो चार नहीं होना पड़ रहा।




आइये जानते हैं दुनिया के कौन से टॉप 10 देश हैं जहां कैशलेस इकोनॉमी बड़े स्तर पर मौजूद है।

  • बेल्जियम — 93 प्रतिशत लेनदेन कैशलेस यानी बिना नगदी के होते हैं।
  • कनाडा— 90 प्रतिशत लेनदेन कैशलेस
  • ब्रिटेन — 89 प्रतिशत लेनदेन कैशलेस है। यहां सबसे बड़ा करेंसी नोट 50 पौंड का है।
  • स्वीडन— 89 प्रतिशत लेनदेन कैशलेस है।
  • आॅस्ट्रेलिया— 86 प्रतिशत लेनदेन कैशलेस
  • नीदरलैण्ड— 85 प्रतिशत लेनदेन कैशलेस
  • अमेरिका— 80 प्रतिशत लेनदेन कैशलेस
  • जर्मनी — 76 प्रतिशत लेनदेन कैशलेस
  • दक्षिणी कोरिया— 70 प्रतिशत लेनदेन कैशलेस

कैशलेस लेनदेन के लिए ये हैं माध्यम—

मोबाइल बैंकिंग— अपने बैंक खाते को मोबाइल नंबर से जोड़कर एसएमएस के माध्यम से दूसरे व्यक्ति को मोबाइल नंबर पर भुगतान किया जा सकता है। नोटबंदी के बाद भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम ने यूपीआई नामक सेवा शुरू की है। जिसके माध्यम से उपभोक्ता अपने बैंक खाते से किसी भी बैंक में मौजूद दूसरे खाते में 50 हजार से लेकर 1 लाख रुपए तक का भुगतान कर सकता है। ट्रांसफर होने वाली रकम तुरंत दूसरे खाते में पहुंच जाती है।




क्रेडिट और डेबिट कार्ड से भुगतान— अगर आपके पास क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड है तो आप इन कार्ड के माध्यम से उन जगहों पर खरीददारी के लिए प्रयोग कर सकते हैं जहां कार्ड मशीन द्वारा भुगतान स्वीकार करने का विकल्प मौजूद हो। शहरी क्षेत्रों में अधिकांश बड़े प्रतिष्ठान और मल्टी ब्रांड शोरूम कार्ड मशीन से भुगतान स्वीकार करते हैं। अभी तक हमारे देश में इन कार्डस का प्रयोग बेहद सीमित है। केवल 4 प्रतिशत भुगतान कार्ड्स के माध्यम से होते हैं।

एप बैंकिंग— एप बैंकिंग ऐसी सुविधा है जो आजकल हर बैंक नि:शुल्क अपने उपभोक्ताओं को उपलब्ध करवा रही है। इसके लिए एक स्मार्टफोन और इंटरनेट की आवश्यकता होती है। जिसके माध्यम से उपभोक्ता को बैंक का आधिकारिक एप डाउनलोड कर दिए निर्देशों के अनुसार अपनी एप बैंकिंग शुरू करवानी होती है। एप बैंकिंग के माध्यम से 50 हजार से लेकर 1 लाख रूपए तक के भुगतान एक समय में हो सकते हैं। एप बैंकिंग में भुगतान सीमा बैंकों के नियामानुसार अलग हो सकती है।




ई वॉलट— ई वॉलट ऐसे मोबाइल एपलीकेशन हैं जो आपको आसानी से रोजमर्रा की जरूरतों के लिए होने वाले भुगतानों को करने की आजादी देते हैं। ये एप किसी चैटिंग एप की तरह होते हैं। जिसमें आप केवल मोबाइल नंबर या कोड स्कैन के जरिए अपने दुकानदार को भुगतान कर सकते हैं। इन ई वॉलेट एप्स में आप अपने डेबिटकार्ड्स के माध्यम से रकम ट्रांसफर कर भुगतान कर सकते हैं। ई वॉलेट एप्स मोबाइल रीचार्ज, मूवी टिकट, बिल पेमेन्टस को लेकर समय समय पर कई तरह के आॅफर्स भी चलाते हैं। इन दिनों पे टीएम, फ्रीचार्ज, वीजा एप, मोबीक्विक और चिल्लर जैसे ई वॉलट यूजर्स के बीच पसंद किए जा रहे हैं।

नेट बैंकिंग— बड़े पेमेंटस के लिए नेट बैंकिंग बेहद सुरक्षित और आसान तरीका है। इसमें आप अपने कम्प्यूटर पर अपनी बैंक की वेबसाइट पर जाकर किसी भी बैंक में अपने बैंक खाते से सीधे रकम ट्रांसफर कर सकते हैं। यह सेवा शुरू करवाने के लिए आपको अपने बैंक अधिकारियों से संपर्क करना पड़ेगा जिसके बाद आप बैंक द्वारा तय सीमा तक आॅन लॉइन लेन देन कर सकते हैं।




इन सभी बैंकिंग तरीकों को अपनाने के लिए आपको थोड़ा सा तकनीकि ज्ञान और अंग्रेजी भाषा का सामान्य ज्ञान होना आवश्यक है। अगर किसी भी परिस्थिति में आपको किसी प्रकार का संदेह होता है तो आप तुरंत अपने बैंक के कस्टमर केयर नंबर पर कॉल कर अपनी पेरशानी का हल निकाल सकते हैं।




कैशलेस होने से पहले ध्यान रखें ये बातें—

  • पासवर्ड किसी को न बताएं।
  • अपने पासवर्ड समय समय पर बदलते रहें।
  • अपने डेबिट और क्रेडिट कार्ड का पिन समय समय पर बदलते रहें।
  • अपने बैंक पासबुक को अपडेट करते रहें।
  • बैंक कस्टमर केयर के नंबर अपने मोबाइल में सुरक्षित रखें।
  • एकबार भुगतान होने पर अगर पैसे कट जाएं तो बार—बार प्रयास न करें।