आप जानते हैं इस वन्यजीव के तेल का सच

हमारे समाज में फैली एक भ्रांति के कारण वन्यजीव सांडा अब शिकारियों की गिरफ्त में आ चुका है। सेक्स पॉवर बढ़ाने के नाम पर धड़ले के साथ सांडा का तेल बेचा जा रहा है। जबकि इसका वास्तविकता से कोई नाता नहीं है। दिखने में जितना ही यह डरावना है, वास्तव में यह होता है बहुत सीधा।

अक्सर आपको ऐसे विज्ञापन नजर आ जाते हैं, जिसमें यह दावा किया जाता है कि इसके तेल के इस्तेमाल से सेक्स की क्षमता में बढ़ोतरी होती है।

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विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें पॉली अन्सेच्युरेटेड फैटी एसिड होता है, जो जोड़ो और मांसपेशियों के दर्द में राहत देता है। इसके बावजूद लोग सांडा तेल के नाम से लोगों को भ्रमित कर रहे है। इसका वैज्ञानिक नाम युरोमेस्टिक हार्डवीकी है। सरीसृप परिवार का प्राणी छिपकली जैसा होता है।

ऐसे निकलते हैं तेल

सांडा का शिकार करने के बाद लोग उसका मांस खा लेते है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण माना जाने वाला तेल इसकी पूंछ के पास बनी एक थैली में होता है। इस थैली की चर्बी को गरम किया जाता है। गरम करने पर चर्बी से कुछ बूंद तेल निकल आता है।

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इन चंद बूंदों के लिए सांडा को अपनी जान देनी पड़ती है। ऐसी मान्यता है कि इससे सेक्स पॉवर बढ़ती है, लेकिन वास्तव में ऐसा कुछ नहीं होता।

नर सांडा की लम्बाई 2 फुट तक हो सकती है लेकिन मादा की कम होती है। इसके पास पंजे बड़े मजबूत होते हैं लेकिन उनका इस्तेमाल सिर्फ बिल खोदने के लिए करता है। कहा जाता है कि इसके तीन दांत होते हैं, एक ऊपर की तरफ और दो नीचे।

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