काली कमाई के धनकुबेर यादव सिंह के खिलाफ जांच तेज, रसूखदारों की बढ़ी मुश्किलें

लखनऊ। काली कमाई के धनकुबेर यादव सिंह की मुश्किलें जल्द ही बढ़ने वाली हैं| क्योंकि सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उनके खिलाफ साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए हैं। दोनों एजेंसियां जल्द ही भ्रष्टाचार से घिरे अधिकारियों और नेताओं को पूछताछ के लिए नोटिस देने की तैयारी कर रही हैं। इससे रसूखदारों की मुश्किल बढ़नी शुरू हो गई हैं।

सूत्रों की माने तो यादव सिंह को संरक्षण देने में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के भाई आनंद कुमार की सबसे अहम भूमिका रही है। आरोप है कि आनंद कुमार और उनकी पत्नी विचित्र लता की यादव सिंह के परिजनों की कंपनियों में हिस्सेदारी है। सीबीआइ ने इनके खिलाफ साक्ष्य तलाशने शुरू कर दिए हैं। संकेत मिले हैं कि बहुत जल्द सीबीआई आनंद कुमार और विचित्र लता से पूछताछ करेगी।

सूत्र यह भी बता रहे हैं कि यादव सिंह के मामले में कई नौकरशाह भी जाँच एजेंसी सीबीआई की हिट लिस्ट में हैं। इनमें कई सेवानिवृत्त भी हो गए हैं। सीबीआई इन सबको घेरने के लिए भी दस्तावेज जुटा रही है। सूत्रों का कहना है कि नोएडा में पूर्व में तैनात रहे एक अधिकारी ने यादव सिंह के जरिये काफी संपत्ति बनाई है। उन पर ईडी की भी निगाह लगी है।

इससे पहले ईडी ने सीबीआई से दागी अभियंता व उसके रिश्तेदारों के नाम से बनी फर्मों का ब्यौरा मांगा था। ईडी को मनी लॉन्ड्रिंग के साक्ष्य जुटाने हैं। यह अंदेशा है कि यादव सिंह ने इन्हीं फर्मों के जरिये अपनी काली कमाई का विदेश या कहीं और निवेश किया। सूत्र यह भी बता रहे हैं कि यादव सिंह से जुड़ी कंपनियों के निदेशक मंडल में रहने वाली सियासी हस्तियों से एक-एक कर पूछताछ की जाएगी। इस दौरान उनसे कंपनियों की संपत्तियों और बैंक खातों में आई रकम के बारे में सवाल किए जाएंगे। जैसे-जैसे काली कमाई सामने आती जाएगी, उसे जब्त करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों के मुताबिक, सीबीआई जांच के आधार पर ही ईडी अपनी भी तफ्तीश को आगे बढ़ाएगी। सीबीआई जांच से तालमेल के लिए ईडी के एक संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारी को लगाया गया है। विभिन्न कंपनियों के संबंध में सीबीआई की शुरुआती जांच के आधार पर ही ईडी अपनी तफ्तीश को आगे बढ़ा रही है। ईडी ने पीएमएल एक्ट के तहत केस दर्ज किया है और नोएडा अथारिटी से उन कंपनियों का ब्योरा मांगा है, जिन्हें वर्ष 2007 से 2012 तक काम दिया गया।

साथ ही ईडी के अधिकारी कंपनियों द्वारा नगदी निकासी और बैंक में जमा की गई धनराशि के बारे में भी पड़ताल शुरू की है। ईडी इसी आधार पर कई कंपनियों के निदेशक पद पर रही सियासी हस्तियों से भी पूछताछ करेगी। इसमें सपा के साथ ही बसपा के कई नेताओं के बेटे-बहुओं और भाइयों के नाम शामिल हैं। जांच से जुड़े ईडी के अधिकारियों ने कहा कि जरूरत हुई तो कई बड़ी सियासी हस्तियों से भी पूछताछ की जाएगी।

ईडी ने यादव सिंह की चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा हासिल कर इन्हें सूचीबद्ध करना शुरू कर दिया है। यह कार्यवाही इसलिए की जा रही है क्योंकि ईडी यादव सिंह के आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक पाए जाने वाली संपत्ति को जब्त करने की कार्रवाई करेगी। ईडी ने अभी तक हो रही जांच के दौरान सामने आए यादव सिंह व उसके परिवार के लोगों के नाम से बैंक खातों व लॉकरों की भी जानकारी जुटा ली है।

इनमें कितनी लेन-देन हुई है, इसका ब्यौरा संबंधित बैंकों से मांगा जा रहा है। ऐसे ही जो फर्में सामने आएंगी, उनमें कितनी रकम का किससे लेन-देन हुआ, यह पता किया जाएगा। इसके लिए ईडी यादव सिंह व उसके करीबियों के चार्टर्ड अकाउंटेंटों से पूछताछ भी करेगी। ईडी को पता चला है कि यादव सिंह व करीबियों के नाम से जो फर्में खुली हैं, उनका लेन-देन कोलकाता की कुछ कंपनियों से हुआ है, जिनका विदेश में लेन-देन है। ईडी इस तथ्य की पड़ताल कर रही है।