80 साल की उम्र में नौकरी ढूढ़ने की बात हास्यस्पद: यशवंत सिन्हा

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झूठ के सहारे नोटबंदी को सफल साबित किया जा रहा: यशवंत सिन्हा

नई दिल्ली। भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवत सिन्हा और केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के बीच आरोप और प्रत्यारोप का दौर जारी है। लेख के माध्यम से यशवंत सिन्हा के वार पर तिलमिलाए अरुण जेटली की गुरुवार को कहा था कि वह 80 साल की उम्र में नौकरी ढूंढ़ रहे हैं। अरुण जेटली के बयान पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए सिन्हा ने कहा कि शायद जेटली मेंरे विषय में नहीं जानते, उनका बयान बेहद हास्यस्पद है।

Yashwant Sinha States Arun Jaitleys Reaction Was A Joke :

यशवंत सिन्हा ने कहा, ‘जो लोग मुझे लेकर 80 साल में नौकरी ढूढ़ने के आरोप लगा रहे हैं, उन्हेें शायद नहीं मालूम कि मैने आईएएस रहते 12 साल पहले अपनी नौकरी छोड़ दी थी। 1989 में प्रधानमंत्री बने वीपी सिंह ने उन्हें मंत्री पद आॅफर किया था। राष्ट्रपति भवन में चल रहे शपथग्रहण समारोह में उन्हेंं लगा कि उनके साथ इंसाफ नहीं हो रहा है, इसलिए वह राष्ट्रपति भवन से चले आए थे। 2014 में भी उन्होंने स्वेच्छा से चुनावी राजनीति से खुद को अलग किया था। इसलिए जो लोग आज नौकरी ढूंढ़ने की बात कर रहे हैं उनके बयान हास्यस्पद हैं।’

उन्होंने कहा, ‘1985 में अपनी नौकरी छोड़ने के 15 दिन बाद उन्होंने निश्चित कर लिया था कि वह किस लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेगे। वहां से चुनाव लड़कर वह सांसद बने और फिर मंत्री। आगे अरुण जेटली का नाम लिए बिना कहते हैं कि जो लोग अटल जी की सरकार में केन्द्रीय राज्य मंत्री बनने के बाद संसद का हिस्सा बने और 25 साल की राजनीति के बाद लोकसभा क्षेत्र का चुनाव कर पाए वह क्या समझ पाएंगे कि मैने राजनीति में क्या संघर्ष किया है।’

उन्होंने कहा, ‘मैं राजनीतिक व्यक्ति हूं। मेरे घर पर लोग आते हैं नौकरी मांगने, सरकारी तो दूर की बात आजकल तो प्राइवेट नौकरी तक में सिफारिश करने को कहते हैं। जब नौकरी है नहीं तभी तो यह स्थिति बन रही है। इसलिए मैं कह सकता हूं कि बेरोजगारी की स्थिति बनी हुई है। जेटली जी के घर तो उनके संसदीय क्षेत्र के लोग पहुंचते नहीं होंगे इसलिए उन्हें जमीनी हकीकत का पता नहीं है।’

​अपने लेख पर पी चिदंबरम का साथ मिलने पर यशवंत सिन्हा ने कहा कि चिदंबरम से उनके रिश्ते कभी भी दोस्ताना नहीं रहे। वह हमेशा ही एक दूसरे के राजनीतिक प्रतिद्वन्दी रहे हैं। लेकिन सभी जानते हैं कि जो चिदंबरम उनके लेख का हवाला देकर जेटली पर निशाना साध रहे हैं वे उनके मित्र हैं। लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि अगर आपका प्रतिद्वन्दी आपकी किसी बात का समर्थन कर रहा है तो आप उसे रोक नहीं सकते। राजनीति में आप किसी का मुंह बंद नहीं करवा सकते।

नई दिल्ली। भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवत सिन्हा और केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के बीच आरोप और प्रत्यारोप का दौर जारी है। लेख के माध्यम से यशवंत सिन्हा के वार पर तिलमिलाए अरुण जेटली की गुरुवार को कहा था कि वह 80 साल की उम्र में नौकरी ढूंढ़ रहे हैं। अरुण जेटली के बयान पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए सिन्हा ने कहा कि शायद जेटली मेंरे विषय में नहीं जानते, उनका बयान बेहद हास्यस्पद है।यशवंत सिन्हा ने कहा, 'जो लोग मुझे लेकर 80 साल में नौकरी ढूढ़ने के आरोप लगा रहे हैं, उन्हेें शायद नहीं मालूम कि मैने आईएएस रहते 12 साल पहले अपनी नौकरी छोड़ दी थी। 1989 में प्रधानमंत्री बने वीपी सिंह ने उन्हें मंत्री पद आॅफर किया था। राष्ट्रपति भवन में चल रहे शपथग्रहण समारोह में उन्हेंं लगा कि उनके साथ इंसाफ नहीं हो रहा है, इसलिए वह राष्ट्रपति भवन से चले आए थे। 2014 में भी उन्होंने स्वेच्छा से चुनावी राजनीति से खुद को अलग किया था। इसलिए जो लोग आज नौकरी ढूंढ़ने की बात कर रहे हैं उनके बयान हास्यस्पद हैं।'उन्होंने कहा, '1985 में अपनी नौकरी छोड़ने के 15 दिन बाद उन्होंने निश्चित कर लिया था कि वह किस लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेगे। वहां से चुनाव लड़कर वह सांसद बने और फिर मंत्री। आगे अरुण जेटली का नाम लिए बिना कहते हैं कि जो लोग अटल जी की सरकार में केन्द्रीय राज्य मंत्री बनने के बाद संसद का हिस्सा बने और 25 साल की राजनीति के बाद लोकसभा क्षेत्र का चुनाव कर पाए वह क्या समझ पाएंगे कि मैने राजनीति में क्या संघर्ष किया है।'उन्होंने कहा, 'मैं राजनीतिक व्यक्ति हूं। मेरे घर पर लोग आते हैं नौकरी मांगने, सरकारी तो दूर की बात आजकल तो प्राइवेट नौकरी तक में सिफारिश करने को कहते हैं। जब नौकरी है नहीं तभी तो यह स्थिति बन रही है। इसलिए मैं कह सकता हूं कि बेरोजगारी की स्थिति बनी हुई है। जेटली जी के घर तो उनके संसदीय क्षेत्र के लोग पहुंचते नहीं होंगे इसलिए उन्हें जमीनी हकीकत का पता नहीं है।'​अपने लेख पर पी चिदंबरम का साथ मिलने पर यशवंत सिन्हा ने कहा कि चिदंबरम से उनके रिश्ते कभी भी दोस्ताना नहीं रहे। वह हमेशा ही एक दूसरे के राजनीतिक प्रतिद्वन्दी रहे हैं। लेकिन सभी जानते हैं कि जो चिदंबरम उनके लेख का हवाला देकर जेटली पर निशाना साध रहे हैं वे उनके मित्र हैं। लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि अगर आपका प्रतिद्वन्दी आपकी किसी बात का समर्थन कर रहा है तो आप उसे रोक नहीं सकते। राजनीति में आप किसी का मुंह बंद नहीं करवा सकते।