साल 2016: रेल हादसों की रही भरमार, वो मंजर याद कर कांप जाती है रूह

नई दिल्ली। वैसे तो इस साल देश में घटित घटनाओं की फेहरिस्त काफी लंबी है। अगर बात की जाये भारतीय रेलवे की तो यह साल रेल हादसों से देशवासियों को बड़े घाव दे गया। साल 2016 खत्म होने में अभी तीन दिन शेष बचे हैं और अब तक देश में कुल एक दर्जन ट्रेन दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। हर दुर्घटना के बाद मुआवजे की घोषणा और जांच होने की बात कहकर सरकार और रेल महकमा अपना पल्ला झाड लेता है, लेकिन रेल हादसे बदस्तूर जारी हैं।




ताजा मामला आज सुबह का है, यूपी के कानपुर से दिल्ली की ओर आ रही अजमेर-सियालदह एक्सप्रेस रूरा स्टेशन के पास बुधवार तड़के दुर्घटनाग्रस्त हो गई। अजमेर-सियालदह एक्सप्रेस के 13 डिब्बे पटरी से उतर गए। इस हादसे में 40 यात्री घायल हो गए हैं और दो लोगों की मौत हो गयी।

Year 2016 Lots Of Railway Accident :

इस साल रेल दुर्घटनाओं का ब्यौरा:

5 फरवरी: तमिलनाडु के वेल्लोर जिले में कन्याकुमारी-बेंगलुरु के अनेकों कोच पटरी से उतर गए, जिसमें 10 लोग घायल हो गए थे।

1 मई: उत्तर प्रदेश के हापुड़ के पास पुरानी दिल्ली-फैजाबाद एक्सप्रेस के 8 कोच पटरी से उतर गए थे। रेलवे अधिकारियों ने बताया 12 पैसेंजर घायल हो गए थे।

6 मई: पत्तबिरम के निकट एक उपनगरीय ट्रेन से चेन्नई सेंट्रल- तिरुवनंतपुरम केंद्रीय सुपरफास्ट की टक्कर हो गई थी। हादसे में सात यात्री घायल हो गए थे।

19 मई: भारी बारिश के कारण बने लैंडस्लिप की वजह से असम जाने वाली कन्याकुमारी-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस नागरक्वाल के पास पटरी से उतर गयी। हालांकि इस दुर्घटना में किसी के मरने या घायल होने की खबर
नहीं मिली।




26 जुलाई: पूर्वी उत्तर प्रदेश में बिना फाटक वाले रेलवे क्रॉसिंग पर एक स्कूली वैन की टक्कर ट्रेन से हो गयी जिसमें 8 बच्चों की मौत हो गयी। इन बच्चों की उम्र 10 साल से अधिक नहीं थी।




28 अगस्त: कारुकुट्टी स्टेशन के पास तिरुअनंतपुरम-मैंगलोर एक्सप्रेस पटरी से उतर गयी। इस दुर्घटना से किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ। दुर्घटना के बाद, बसें व स्थानीय ट्रेनों के जरिए सवारियों को
नजदीकी शहरों में पहुंचाया गया।




20 सितंबर: कोल्लम के पास स्थित करुणागाप्पल्ली स्टेशन पर गुड्स ट्रेन पटरी से उतर गयी, जिसकी वजह से तिरुअनंतपुरम और अर्नाकुलम के बीच रेल ट्रैफिक में रुकावट रही।




30 सितंबर: कटक के पास काठोजोडी स्टेशन पर भुवनेश्वर-भदरक पैसेंजर ट्रेन और गुड्स ट्रेन की आपस में टक्कर हो गयी, जिससे दो जीआरपी कर्मचारियों की मौत हो गयी थी। इस हादसे में करीब 27 लोग
घायल हो गए थे। अधिकारियों के अनुसार, दोनों ट्रेन एक ही ट्रैक पर थी।




5 अक्टूबर: पुणे जाने वाली जम्मू तवी-पुणे झेलम एक्सप्रेस के 9 कोच और एक पेंट्री कार के पटरी से उतर जाने से तीन लोग घायल हो गए थे।

20 नवंबर: हाल के कुछ वर्षों में यह सबसे बुरा रेल हादसा था, जिसमें कानपुर देहात में पटना-इंदौर एक्सप्रेस की 14 बोगियां पटरी से उतर गयी और 140 से अधिक लोगों की मौत हो गयी। 180 लोग घायल हो गए।




6 दिसंबर: बिहार के राजेंद्र नगर से गुवाहाटी जाने वाली कैपिटल एक्सप्रेस उत्तरी बंगाल में पटरी से उतर गयी जिसमें कम से कम दो की मौत हो गयी और 10 लोग घायल हो गए।

मुआवजा हुआ दोगुना, हादसे नहीं हुए कम

राहत के लिए रेल मंत्रालय ने रेल दुर्घटना में मिलने वाला मुआवजा भी दोगुना कर दिया है। इसके लिए नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है। रेलवे ने घायलों के मुआवजे की अधिकतम सीमा भी बढ़ा दी है। अब रेल दुर्घटना में मृत्यु होने पर 8 लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा, पहले मृतक के परिजन को 4 लाख रुपये मिलते थे।




रेल दुर्घटना में घायलों के मुआवजे की अधिकतम सीमा 6.40 लाख रुपये से बढ़ाकर 7.20 लाख रुपये कर दी गई है। मुआवजे से जुड़े नए नियम 1 जनवरी 2017 से लागू होंगे और वैध टिकट धारकों को ही मुआवजा मिलेगा। फिलहाल मुआवजे की रकम तो बढ़ी लेकिन रेल हादसों में कमी नहीं हुई।

नई दिल्ली। वैसे तो इस साल देश में घटित घटनाओं की फेहरिस्त काफी लंबी है। अगर बात की जाये भारतीय रेलवे की तो यह साल रेल हादसों से देशवासियों को बड़े घाव दे गया। साल 2016 खत्म होने में अभी तीन दिन शेष बचे हैं और अब तक देश में कुल एक दर्जन ट्रेन दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। हर दुर्घटना के बाद मुआवजे की घोषणा और जांच होने की बात कहकर सरकार और रेल महकमा अपना पल्ला झाड लेता है, लेकिन रेल हादसे बदस्तूर जारी हैं। ताजा मामला आज सुबह का है, यूपी के कानपुर से दिल्ली की ओर आ रही अजमेर-सियालदह एक्सप्रेस रूरा स्टेशन के पास बुधवार तड़के दुर्घटनाग्रस्त हो गई। अजमेर-सियालदह एक्सप्रेस के 13 डिब्बे पटरी से उतर गए। इस हादसे में 40 यात्री घायल हो गए हैं और दो लोगों की मौत हो गयी।

इस साल रेल दुर्घटनाओं का ब्यौरा:

5 फरवरी: तमिलनाडु के वेल्लोर जिले में कन्याकुमारी-बेंगलुरु के अनेकों कोच पटरी से उतर गए, जिसमें 10 लोग घायल हो गए थे।1 मई: उत्तर प्रदेश के हापुड़ के पास पुरानी दिल्ली-फैजाबाद एक्सप्रेस के 8 कोच पटरी से उतर गए थे। रेलवे अधिकारियों ने बताया 12 पैसेंजर घायल हो गए थे।6 मई: पत्तबिरम के निकट एक उपनगरीय ट्रेन से चेन्नई सेंट्रल- तिरुवनंतपुरम केंद्रीय सुपरफास्ट की टक्कर हो गई थी। हादसे में सात यात्री घायल हो गए थे।19 मई: भारी बारिश के कारण बने लैंडस्लिप की वजह से असम जाने वाली कन्याकुमारी-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस नागरक्वाल के पास पटरी से उतर गयी। हालांकि इस दुर्घटना में किसी के मरने या घायल होने की खबर नहीं मिली। 26 जुलाई: पूर्वी उत्तर प्रदेश में बिना फाटक वाले रेलवे क्रॉसिंग पर एक स्कूली वैन की टक्कर ट्रेन से हो गयी जिसमें 8 बच्चों की मौत हो गयी। इन बच्चों की उम्र 10 साल से अधिक नहीं थी। 28 अगस्त: कारुकुट्टी स्टेशन के पास तिरुअनंतपुरम-मैंगलोर एक्सप्रेस पटरी से उतर गयी। इस दुर्घटना से किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ। दुर्घटना के बाद, बसें व स्थानीय ट्रेनों के जरिए सवारियों को नजदीकी शहरों में पहुंचाया गया। 20 सितंबर: कोल्लम के पास स्थित करुणागाप्पल्ली स्टेशन पर गुड्स ट्रेन पटरी से उतर गयी, जिसकी वजह से तिरुअनंतपुरम और अर्नाकुलम के बीच रेल ट्रैफिक में रुकावट रही। 30 सितंबर: कटक के पास काठोजोडी स्टेशन पर भुवनेश्वर-भदरक पैसेंजर ट्रेन और गुड्स ट्रेन की आपस में टक्कर हो गयी, जिससे दो जीआरपी कर्मचारियों की मौत हो गयी थी। इस हादसे में करीब 27 लोग घायल हो गए थे। अधिकारियों के अनुसार, दोनों ट्रेन एक ही ट्रैक पर थी। 5 अक्टूबर: पुणे जाने वाली जम्मू तवी-पुणे झेलम एक्सप्रेस के 9 कोच और एक पेंट्री कार के पटरी से उतर जाने से तीन लोग घायल हो गए थे।20 नवंबर: हाल के कुछ वर्षों में यह सबसे बुरा रेल हादसा था, जिसमें कानपुर देहात में पटना-इंदौर एक्सप्रेस की 14 बोगियां पटरी से उतर गयी और 140 से अधिक लोगों की मौत हो गयी। 180 लोग घायल हो गए। 6 दिसंबर: बिहार के राजेंद्र नगर से गुवाहाटी जाने वाली कैपिटल एक्सप्रेस उत्तरी बंगाल में पटरी से उतर गयी जिसमें कम से कम दो की मौत हो गयी और 10 लोग घायल हो गए।

मुआवजा हुआ दोगुना, हादसे नहीं हुए कम

राहत के लिए रेल मंत्रालय ने रेल दुर्घटना में मिलने वाला मुआवजा भी दोगुना कर दिया है। इसके लिए नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है। रेलवे ने घायलों के मुआवजे की अधिकतम सीमा भी बढ़ा दी है। अब रेल दुर्घटना में मृत्यु होने पर 8 लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा, पहले मृतक के परिजन को 4 लाख रुपये मिलते थे। रेल दुर्घटना में घायलों के मुआवजे की अधिकतम सीमा 6.40 लाख रुपये से बढ़ाकर 7.20 लाख रुपये कर दी गई है। मुआवजे से जुड़े नए नियम 1 जनवरी 2017 से लागू होंगे और वैध टिकट धारकों को ही मुआवजा मिलेगा। फिलहाल मुआवजे की रकम तो बढ़ी लेकिन रेल हादसों में कमी नहीं हुई।