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साल का तीसरा ग्रहण और गुरु पूर्णिमा एक ही दिन, जानिए इसके दुष्प्रभाव

By टीम पर्दाफाश 
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पीते महीने जून मे 2 ग्रहण लगने के बाद अब सक का तीसरा ग्रहण लगने वाला है आपको बता दें इस साल का तीसरा ग्रहण 5 जुलाई को लगने वाला है। इसी दिन गुरु पुर्णिमा भी है।

5 जुलाई को लगने वाले इस चंद्र ग्रहण में सूतक काल मान्य नहीं होगा यानि किसी भी प्रकार के शुभ कार्य वर्जित नहीं होंगे। पूजा पाठ और भोजन से जुड़े कार्य किया जा सकेंगे। लेकिन फिर भी संयम बरतने और नियमों का पालन करना जरूरी है।

आपको बताते चलें वैसे चंद्र ग्रहण लगने से 09 घंटे पहले ही सूतक काल शुरू हो जाता है, और सूतक काल लगने के बाद से कुछ भी खाना नहीं चाहिए। गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान सात्विक भोजन लेने की सलाह दी जाती है। वहीं, पानी में 8-10 तुलसी के पत्ते डालकर, उबाल कर पीना चाहिए।

ग्रहण का कुप्रभाव

मानव जीवन को काफी विचलित कर सकते हैं इतने ग्रहण। इस ग्रहणकाल में 6-6 ग्रहों (बुद्ध,गुरु,शुक्र,शनि और राहु-केतु) के वक्री होने से तूफान, भूकंप और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं, गृह युद्ध, अग्नि की घटनाओं,अनहोनी की संभावना बढ़ जाती है। पृथ्वी के अति महत्वपूर्ण व्यक्तियों पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
आगजनी, विवाद और तनाव, प्राकृतिक आपदाएं, युद्ध, विभिन्न नई बीमारियां होने के हालात बन सकते हैं।

क्या भारत मे दिखेगा ग्रहण

भारत में इस ग्रहण को नहीं देखा जा सकेगा। यह ग्रहण यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में दिखाई देगा। इस ग्रहण का कुल समय तकरीबन पौने तीन घंटे कहा जा रहा है।
जनवरी 2020 में पहला चन्द्र ग्रहण लगा था। इस वर्ष कुल 06 ग्रहण लगने वाले हैं। लेकिन शास्त्रों के अनुसार एक वर्ष में 3 या तीन से अधिक ग्रहण का लग्न किसी भी तरह से ठीक नहीं होता है।
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