PWD के छह हजार करोड़ के कामों में हेरफेर की आशंका, सीएम योगी ने दिये जांच के आदेश

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PWD के छह हजार करोड़ के कामों में हेरफेर की आशंका, सीएम योगी ने दिये जांच के आदेश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में छह हजार करोड़ के कामों के लिए कराई गए ई-टेंडरों के जांच के आदेश दे दिये हैं। जांच की बात सामने आने के बाद विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। बताते चलें कि साल 2017-18 और 2018-19 में पीडब्ल्यूडी ने ई-टेंडर के जरिये सड़क निर्माण के करीब छह हजार करोड़ रुपये के काम किए हैं।

Yogi Adityanath Orders Investigation In Pwd Tender Case :

दरअसल, ई-टेंडर में हेरफेर को लेकर शासन को शिकायत मिली है। शिकायत में जिक्र किया गया है कि कई ठेकेदारों ने टेंडर हासिल कर दूसरों को काम सौंप दिया और बिलों में भी हेरफेर किया गया। जिसके चलते काम भी प्रभावित हुआ है। आरोप है कि इस तरह की अड़चनें पैदा कर दी गईं कि उनका टेंडर पास ही नहीं हो सका। इस तरह ई-टेंडर में भी ठेकेदारों या फर्मों की एंट्री को सीमित किया गया।

जांच में इन बातों पर किया जाएगा गौर-

ऑडिट में देखा जाएगा कि ई-टेंडर हासिल करने में किसी तरह का हेरफेर तो नहीं किया गया है। इस बात को भी जांच के दायरे में रखा जाएगा कि ई-टेंडर स्वीकार करने के लिए अधिकृत अधिकारी ने अपने डिजिटल साइन करने में देरी तो नहीं की, जिसके चलते कोई ठेकेदार दौड़ से बाहर हो गया हो। ऑडिट में इन सभी बिंदुओं की गहन जांच की जाएगी। जिन कार्यों के लिए सिंगल टेंडर आने पर भी ठेके दिए गए, उनकी भी जांच होगी ताकि पता किया जा सके कि ऐसा किसी दबाव के चलते तो नहीं हुआ।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में छह हजार करोड़ के कामों के लिए कराई गए ई-टेंडरों के जांच के आदेश दे दिये हैं। जांच की बात सामने आने के बाद विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। बताते चलें कि साल 2017-18 और 2018-19 में पीडब्ल्यूडी ने ई-टेंडर के जरिये सड़क निर्माण के करीब छह हजार करोड़ रुपये के काम किए हैं। दरअसल, ई-टेंडर में हेरफेर को लेकर शासन को शिकायत मिली है। शिकायत में जिक्र किया गया है कि कई ठेकेदारों ने टेंडर हासिल कर दूसरों को काम सौंप दिया और बिलों में भी हेरफेर किया गया। जिसके चलते काम भी प्रभावित हुआ है। आरोप है कि इस तरह की अड़चनें पैदा कर दी गईं कि उनका टेंडर पास ही नहीं हो सका। इस तरह ई-टेंडर में भी ठेकेदारों या फर्मों की एंट्री को सीमित किया गया। जांच में इन बातों पर किया जाएगा गौर- ऑडिट में देखा जाएगा कि ई-टेंडर हासिल करने में किसी तरह का हेरफेर तो नहीं किया गया है। इस बात को भी जांच के दायरे में रखा जाएगा कि ई-टेंडर स्वीकार करने के लिए अधिकृत अधिकारी ने अपने डिजिटल साइन करने में देरी तो नहीं की, जिसके चलते कोई ठेकेदार दौड़ से बाहर हो गया हो। ऑडिट में इन सभी बिंदुओं की गहन जांच की जाएगी। जिन कार्यों के लिए सिंगल टेंडर आने पर भी ठेके दिए गए, उनकी भी जांच होगी ताकि पता किया जा सके कि ऐसा किसी दबाव के चलते तो नहीं हुआ।