शिक्षामित्रों को 17000 रुपए का मानदेय देने वाला शासनादेश फर्जी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की निर्वासित सरकार द्वारा शिक्षामित्रों को बतौर शिक्षक समायोजित किए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट द्वारा गैरकानूनी ठहराए जा चुका है। अदालत के फैसले के बाद शिक्षामित्रों के आंदोलन को शांत करवाने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ की ओर से आपसी बातचीत से रास्त निकालने की बात कही थी। लेकिन मंलगवार एक शासनादेश वॉयरल हुआ जिसमें शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाकर 17000 रुपए किए जाने का आदेश था। यह शासनादेश प्राइमरी टीचर डॉटकॉम के वॉटरमार्क के साथ वॉयरल किया ​गया।

शिक्षामित्रों के मानदेय को बढ़ाकर 17000 रुपए किए जाने को लेकर वॉयरल हो रहे इस शासनादेश की प्रमाणिकता पूरी तरह से संदिग्ध नजर आ रही है। इस विषय में बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से भी ऐसा कोई आदेश जारी किए जाने की पुष्टि नहीं हो पाई है।

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माना जा रहा है कि यह शासनादेश शिक्षामित्रों को भड़काने के लिए फर्जी तरीके से तैयार किया गया है। इस फर्जी आदेश में लिखा है कि शिक्षामित्रों के सामने खड़ी हुई रोजी रोटी की समस्या को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सभी शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाकर 17000 रुपए करने का फैसला लिया है। इस आॅर्डर की कॉपी सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अाधिकारियों को प्रेषित करते हुए कहा गया है कि इस आदेश के जारी होने के बाद 7 कार्यदिवसों के भीतर जो भी शिक्षामित्र अपनी ड्यूटी पर लौट आते हैं केवल उन्हीं की सेवाएँ ली जाएंगी। शेष शिक्षामित्र तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिए जाएंगे। कितने शिक्षामित्र अपनी ड्यूटी पर वापस लौटे और कितने नहीं इस बात की रिपोर्ट सभी बीएसए आॅफिस से शासन को भेजी जाएगी। यह फर्जी शासनदेश बेसिक शिक्षा परिषद् के सचिव संजय सिन्हा द्वारा जारी किया गया है।

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आपको बता दें कि इससे पहले योगी सरकार ने 1.73 लाख शिक्षामित्रों को अदालत के निर्णय से राहत देने का प्रयास करते हुए उनका मानदेय बढ़ाकर 10000 रुपए करने का प्रस्ताव दिया था। जिसे शिक्षामित्रों ने स्वीकार करने से इंकार कर दिया था। सीएम योगी और बेसिक शिक्षा मंत्री अरुणिमा जायसवाल ने शिक्षामित्रों के संगठन के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर बीच का रास्ता निकालने का आश्वासन दिया था।

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