ताजमहल पर योगी सरकार की सफाई, कहा संरक्षित इमारतों के लिए केन्द्र की सहमति जरूरी

ताजमहल पर योगी सरकार की सफाई, कहा संरक्षित इमारतों के लिए केन्द्र की सहमति जरूरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ताजमहल को पर्यटन विकास योजना का हिस्सा न बनाए जाने को लेकर आने वाली खबरों पर प्रदेश सरकार ने स्पष्टीकरण दिया है। सरकार के प्रवक्ता ने बताया है कि प्रदेश सरकार ने विश्व बैंक के सहयोग से संचालित प्रो-पुअर पर्यटन योजना के तहत 370 करोड़ की लागत की पर्यटन विकास परियोजनाएं प्रस्तावित की हैं। जिनमें ताजमहल और ताजमहल क्षेत्र के विकास के लिए 156 करोड़ का प्रवधान किया गया है, चूंकि ताजमहल एक संरक्षित इमारतों और राष्ट्रीय धरोहर है और इससे जुड़ी परियोजनाओं को शुरू करने के लिए केन्द्र सरकार की सहमति लेना जरूरी है। इसलिए प्रदेश सरकार ने अपनी पर्यटन विकास पुस्तिका में ताजमहल का जिक्र नहीं किया है।

प्रदेश सरकार ने कहा है कि ताजमहल को लेकर केन्द्र सरकार को भेजा गए प्रस्ताव पर अगले 03 महीनों में स्वीकृति मिलने की अपेक्षा की जा रही है। जिसके बाद प्रदेश सरकार विश्व बैंक के सहयोग से स्वीकृत परियोजना के तहत ताजमहल और ताजमहल क्षेत्र के विकास का कार्य शुरू किया जाएगा।

{ यह भी पढ़ें:- संगीत सोम ने ताजमहल को बताया भारतीय संस्कृति पर धब्बा, ओवैसी ने किया पलटवार }

ताजमहल से जुड़ी विकास परियोजना के विषय में जानकारी देते हुए प्रदेश सरकार की ओर से बताया गया कि केवल ताजमहल से जुड़ी तमाम परियोजनाओं के लिए 156 करोड़ रुपए का प्रावधान प्रस्तावित है। जिसके तहत आगरा के कछपुरा तथा मेहताब बाग क्षेत्र के पुनरुद्धार के लिए 22 करोड़ 91 लाख रुपए की परियोजना तथा कछपुरा में 3 करोड़ रुपए की धनराशि से सीवेज ट्रीटमेण्ट प्लांट का निर्माण करवाया जाएगा।

ताजमहल और आगरा के किले के बीच शाहजहां पार्क तथा वाॅक-वे के पुनरुद्धार के लिए 22 करोड़ 66 लाख रुपए की परियोजना भी सम्मिलित की गई है। ताजमहल के पश्चिमी द्वार पर 107 करोड़ 49 लाख रुपए की धनराशि से आगन्तुक केन्द्र का निर्माण एवं पार्किंग व्यवस्था का पुनर्सुधार कराया जाएगा। इसके अलावा, रिवरफ्रण्ट विकास के साथ-साथ रामबाग से मेहताबाग क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं के विकास की परियोजना भी प्रस्तावित की गई है।

{ यह भी पढ़ें:- नाबालिग गैंगरेप पीड़िता ने किया सुसाइड, CM योगी ने दिया था सुरक्षा का भरोसा }