मंत्रिमंडल विस्तार के पहले इस्तीफों से लगने लगे कयास, क्या भ्रष्टाचार में लिप्त थे पांचों मंत्री

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मंत्रिमंडल विस्तार के पहले इस्तीफों से लगने लगे कयास, क्या भ्रष्टाचार में लिप्त थे पांचों मंत्री

लखनऊ। योगी सरकार के मंत्रिमंडल के विस्तार से पहले पांच मंत्रियों के इस्तीफ़ों ने सियासी समीकरण बदल दिये हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि इन मंत्रियों के इस्तीफो को सरकार की पारदर्शिता नीति से जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों की मानें तो योगी सरकार के मंत्रिमंडल में साफ छवि के नेताओं को अहम ज़िम्मेदारी सौंपने की तैयारी की जा रही है। हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि सूबे में भ्रष्टाचार में लिप्त चाहे वो नौकरशाह हों या सरकार में पदस्थ लोग, उन्हे किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

Yogi Government Mantrimandal Vistar :

बीते दिनों मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा तेज थी, जिसे अचानक टाल दिया गया। अंदरखाने चर्चा इस बात की ज़ोरों से थी कि मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले नए चेहरों का चयन नहीं हो सका था। फिलहाल बुधवार को मंत्रिमंडल विस्तार का पत्र भी राज्यपाल को सौंप दिया गया है। सूत्रों की मानें तो मंत्रीमंडल के इस विस्तार में आधा दर्जन से ज्यादा नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि इसमें कुछ मंत्रियों का कद बढ़ाने के साथ ही कुछ लोगों के विभागों में परिवर्तन किया जा सकता है।

मंत्रीमंडल के विस्तार से पहले ही कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल ने इस्तीफा दे दिया है। राजेश अग्रवाल ने अपने स्वास्थ्य कारणों का हवाल देते हुए इस्तीफा सौंपा है। उन्होने कहा कि उनकी उम्र 75 होने वाली है, जिसके चलते उन्होने ये फैसला लिया है, ताकि कुछ नए और उर्जावान चेहरों को मौका दिया जा सके।

वहीं मंगलवार शाम को अनुपमा जायसवाल, चेतन चौहान, मुकुट बिहारी वर्मा और स्वाति सिंह ने मंत्रीमंडल से इस्तीफा दे दिया। फिलहाल इन लोगों ने इस्तीफा क्यों दिया है, इसको लेकर तरह—तरह की चर्चाएं चल रही है। वजह ये है कि इनमें से ज्यादातर लोग अभी कम उम्र के ही है, ऐसे में उनका इस्तीफा राजनैतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

लखनऊ। योगी सरकार के मंत्रिमंडल के विस्तार से पहले पांच मंत्रियों के इस्तीफ़ों ने सियासी समीकरण बदल दिये हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि इन मंत्रियों के इस्तीफो को सरकार की पारदर्शिता नीति से जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों की मानें तो योगी सरकार के मंत्रिमंडल में साफ छवि के नेताओं को अहम ज़िम्मेदारी सौंपने की तैयारी की जा रही है। हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि सूबे में भ्रष्टाचार में लिप्त चाहे वो नौकरशाह हों या सरकार में पदस्थ लोग, उन्हे किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। बीते दिनों मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा तेज थी, जिसे अचानक टाल दिया गया। अंदरखाने चर्चा इस बात की ज़ोरों से थी कि मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले नए चेहरों का चयन नहीं हो सका था। फिलहाल बुधवार को मंत्रिमंडल विस्तार का पत्र भी राज्यपाल को सौंप दिया गया है। सूत्रों की मानें तो मंत्रीमंडल के इस विस्तार में आधा दर्जन से ज्यादा नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि इसमें कुछ मंत्रियों का कद बढ़ाने के साथ ही कुछ लोगों के विभागों में परिवर्तन किया जा सकता है। मंत्रीमंडल के विस्तार से पहले ही कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल ने इस्तीफा दे दिया है। राजेश अग्रवाल ने अपने स्वास्थ्य कारणों का हवाल देते हुए इस्तीफा सौंपा है। उन्होने कहा कि उनकी उम्र 75 होने वाली है, जिसके चलते उन्होने ये फैसला लिया है, ताकि कुछ नए और उर्जावान चेहरों को मौका दिया जा सके। वहीं मंगलवार शाम को अनुपमा जायसवाल, चेतन चौहान, मुकुट बिहारी वर्मा और स्वाति सिंह ने मंत्रीमंडल से इस्तीफा दे दिया। फिलहाल इन लोगों ने इस्तीफा क्यों दिया है, इसको लेकर तरह—तरह की चर्चाएं चल रही है। वजह ये है कि इनमें से ज्यादातर लोग अभी कम उम्र के ही है, ऐसे में उनका इस्तीफा राजनैतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।