कोटा में फंसे छात्रों को लाने के लिए योगी सरकार द्वारा बसों को भेजने का मामला निकला फर्जी

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कोटा में फंसे छात्रों को लाने के लिए योगी सरकार द्वारा बसों को भेजने का मामला निकला फर्जी

लखनऊ। राजस्थान के कोटा में फंसे छात्रों को लेकर उनके अभिवावक काफी चिंतित थे और वहां फंसे बच्चों ने भी ट्विटर पर #SendUsBackHome अभियान की शुरुआत की थी। आज सोशल मीडिया और कई मीडिया संस्थानो द्वारा ये जानकारी दी गयी कि योगी सरकार ने अभिवावकों और बच्चों की बात सुन ली और अब कोटा से छात्रों को लाने के लिए सैकड़ों बसें भेज रही है। लेकिन जब इस खबर की तहकीकात की गयी तो ये खबर फर्जी निकली। नोडल अधिकारी ने बताया कि उन्हे ऐसी कोई जानकारी नही मिली है।

Yogi Government Sending Fake Buses To Bring Students Trapped In Kota Fake Case :

खबर में बताया गया था कि उत्तर प्रदेश के बच्चो को लाने के लिए आज 250 से 300 बसें भेजी जा रही हैं। बताया गया था कि 25 मार्च से शुरू हुए लॉकडाउन की वजह से कोटा में यूपी, बिहार समेत कई प्रदेशों के हजारों बच्चे फंसे हैं। छात्रों की समस्या को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पिछले 2 दिनों से केंद्र की एजेंसियों से बात करने की कोशिश कर रहे थे, मगर उन्हें भी निराशा हाथ लग रही थी। अब केंद्रीय एजेंसियों के कहने पर कोटा से बच्चों को निकालने की प्रक्रिया शुरू हुई है।

इससे पहले खबर आई थी कि जम्मू कश्मीर प्रशासन कोटा में फंसे अपने राज्य के बच्चों को वापस बुलाना चाहती है मगर उन्हें परमिशन नहीं मिल पा रही है, जबकि बिहार सरकार ने कोटा से आने वाले बच्चों को लेने से मना कर दिया है। यह भी बताया गया था कि उत्तर प्रदेश सरकार की पहल के बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन की ओर से भी बच्चों को लाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

बता दें कि राजस्थान के कोटा में भी कोरोना का कहर बढ़ता चला जा रहा है, यहां अभी 64 कोरोना मरीज हो गये हैं। बता दें कि उत्तर प्रदेश-बिहार-झारखंड समेत देश के दूसरे राज्यों के हजारों छात्र मेडिकल और इंजीनियरिंग विषयों की कोचिंग के लिए यहां आते हैं। यह सभी छात्र 25 मार्च से फंसे हैं।

हालांकि जब नोडल अधिकारी बाबू लाल मीणा के सीयूजी नम्बंर पर पर्दाफाश न्यूज की तरफ से फोन किया गया तो कहा गया कि ऐसा कोई आदेश अभी तक जारी नही हुआ।

लखनऊ। राजस्थान के कोटा में फंसे छात्रों को लेकर उनके अभिवावक काफी चिंतित थे और वहां फंसे बच्चों ने भी ट्विटर पर #SendUsBackHome अभियान की शुरुआत की थी। आज सोशल मीडिया और कई मीडिया संस्थानो द्वारा ये जानकारी दी गयी कि योगी सरकार ने अभिवावकों और बच्चों की बात सुन ली और अब कोटा से छात्रों को लाने के लिए सैकड़ों बसें भेज रही है। लेकिन जब इस खबर की तहकीकात की गयी तो ये खबर फर्जी निकली। नोडल अधिकारी ने बताया कि उन्हे ऐसी कोई जानकारी नही मिली है। खबर में बताया गया था कि उत्तर प्रदेश के बच्चो को लाने के लिए आज 250 से 300 बसें भेजी जा रही हैं। बताया गया था कि 25 मार्च से शुरू हुए लॉकडाउन की वजह से कोटा में यूपी, बिहार समेत कई प्रदेशों के हजारों बच्चे फंसे हैं। छात्रों की समस्या को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पिछले 2 दिनों से केंद्र की एजेंसियों से बात करने की कोशिश कर रहे थे, मगर उन्हें भी निराशा हाथ लग रही थी। अब केंद्रीय एजेंसियों के कहने पर कोटा से बच्चों को निकालने की प्रक्रिया शुरू हुई है। इससे पहले खबर आई थी कि जम्मू कश्मीर प्रशासन कोटा में फंसे अपने राज्य के बच्चों को वापस बुलाना चाहती है मगर उन्हें परमिशन नहीं मिल पा रही है, जबकि बिहार सरकार ने कोटा से आने वाले बच्चों को लेने से मना कर दिया है। यह भी बताया गया था कि उत्तर प्रदेश सरकार की पहल के बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन की ओर से भी बच्चों को लाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। बता दें कि राजस्थान के कोटा में भी कोरोना का कहर बढ़ता चला जा रहा है, यहां अभी 64 कोरोना मरीज हो गये हैं। बता दें कि उत्तर प्रदेश-बिहार-झारखंड समेत देश के दूसरे राज्यों के हजारों छात्र मेडिकल और इंजीनियरिंग विषयों की कोचिंग के लिए यहां आते हैं। यह सभी छात्र 25 मार्च से फंसे हैं। हालांकि जब नोडल अधिकारी बाबू लाल मीणा के सीयूजी नम्बंर पर पर्दाफाश न्यूज की तरफ से फोन किया गया तो कहा गया कि ऐसा कोई आदेश अभी तक जारी नही हुआ।