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PFI पर बैन लगाएगी योगी सरकार, उपमुख्यमंत्री बोले- हिंसा में इसका हाथ

Yogi Government To Ban Pfi Deputy Chief Minister Said Its Hand In Violence

By रवि तिवारी 
Updated Date

नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ विरोध के नाम पर यूपी में हुई हिंसा के मामले में योगी सरकार ने बड़ा फैसला किया है। हिंसा की साजिश में शामिल होने के आरोपी कट्टरपंथी संगठन पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर सरकार ने प्रतिबंध लगाने की तैयारी की है। उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि हिंसा के पीछे पीएफआई का हाथ था। सिमी के लोगों ने इस संगठन में शामिल होकर हिंसा फैलाई। जल्द ही सरकार इस संस्‍था पर प्रतिबंध लगाएगी।

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नाम बदलकर सिमी ने धरा नया रूप

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, पीएफआई नाम रखकर सिमी ने नया अवतार लिया है। सूबे में हुए बवाल और हिंसा के पीछे पीएफआई का ही हाथ था। जांच में ये बात सामने भी आ रही है। उन्होंने इस दौरान कड़े शब्दों में कहा कि सिमी किसी भी रूप में प्रकट होगा तो उसे कुचल दिया जाएगा। इस प्रदेश में किसी भी प्रकार का देशद्रोही आचरण बर्दास्त नहीं किया जाएगा। इसे प्रतिबंधित करने के प्रस्ताव पर काम चल रहा रहा है। जल्द ही इसे प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। 

उत्तर प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह ने गृह विभाग को चिट्ठी लिखकर पीएफआई पर बैन लगाने की सिफारिश की है डीजीपी के मुताबिक जांच में पता है कि 19 दिसंबर को हुए हिंसक प्रदर्शन में पीएफआई का हाथ था।

बता दें कि 15 दिसंबर को नागरिकता कानून के विरोध में अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में हिंसा में हुई। बाद में यह हिंसा अलग अलग प्रदेशों में भी फैल गई। इस हिंसा में करीब 15 लोग मारे गए थे। पीएफआई पर अभी झारखंड में पाबंदी है।

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पीएफआई है क्या?

पीएफआई का फुल फॉर्म पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया है, यह एक उग्र इस्लामी कट्टरपंथी संगठन है। दक्षिण भारत के राज्यों में संगठन काफी सक्रिय है, चुनाव भी लड़ता रहा है। उत्तर प्रदेश में पिछले 6 महीने में संगठन तेजी से फैला है। जहां तक पीएफआई के दावे का सवाल है तो पीएफआई दावा करता है कि वो एक ऐसा संगठन है जो लोगों को उनका हक दिलाने के लिए लड़ता है।

संगठन दावा करता है कि उसके काम सामिजक हितों वाले हैं। संगठन की वेबसाइट पर जाएंगे तो आपको इस तरह के कई वीडियो मिल जाएंगे लेकिन एक हकीकत ये भी है कि पीएफआई का नाम गैरकानूनी कामों में भी आ चुका है। झारखंड में तो इसकी गतिविधियों के चलते वहां की सरकार ने बैन लगा रखा है।

पुलिस के मुताबिक पीएफआई के लोगों ने यूपी में हुई हिंसा के दौरान सोशल मीडिया के जरिये लोगों को उकसाने और भड़काने का काम किया. यूपी में पीएफआई से जुड़े जो लोग गिरफ्तार किये गये हैं उनके बारे में पुलिस का कहना है कि उनके पास कई ऐसे दस्तावेज मिले हैं जो माहौल बिगाड़ने के लिए बांटे जा रहे थे। पुलिस के मुताबिक पीएफआई के लोगों ने अलग अलग शहरों में भड़काऊ पोस्टर भी लगवाए

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