Yogi Ji Diwyang Ki Guhar Kab Sunenge

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार है जो सबके साथ और सबसे विकास के फार्मूले पर काम करने का दावा कर रही है। लेकिन ​जिन दिव्यांगों को हर कदम साथ और सहारे की जरूरत है उनकी सुध लेने वाला आपकी सरकार में कोई मंत्री या अफसर तक नहीं है। सितंबर 2016 से सीएम अखिलेश यादव से मुलाकात की कोशिश कर रहे इस 90 प्रतिशत दिव्यांग का कहना है कि वह आप से मिलने की 10 कोशिशें कर चुका है, उनके मंत्रियों के यहां भी चक्कर लगा चुका है। हर बार उसकी एप्लीकेशन लेकर उसे भरोसा दे दिया जाता है। इस बार 7 अगस्त से वह लगातार सीएम योगी से मिलने की कोशिश कर रहा है।

शुक्रवार को सिविल अस्पताल के गलियारे में लेटे हुए इस दिव्यांग ने अपना नाम विशाल तिवारी और पता प्रतापगढ़ की पट्टी तहसील की पोस्ट सरलेखपुर और ग्राम गोईं पालियां बताया। इंटरमीडिएट तक शिक्षित और कम्प्यूटर डिप्लोमा होल्डर विशाल का कहना है कि उसे एक गंभीर बीमारी है। गरीब मां बाप की इकलौती संतान होने की वजह से उन्होंने अपनी सारी कमाई उसके इलाज में लगा दी। अब मां बाप इस काबिल नहीं रहे हैं कि उसके इलाज का खर्चा उठा सकें। इससे भी बड़ी चिंता उसे अपने भविष्य को लेकर है कि आखिर मां बाप के बाद उसकी देख रेख कौन करेगा। उसे सरकार से इलाज के लिए मदद की दरकार है, लेकिन सरकार है कि हर बार उसे अपने दरवाजे से वापस लौटा देती है।

90 प्रतिशत विकलांगता होने के बावजूद विशाल 11 दिनों से लगातार मुख्यमंत्री आवास तक जाता है। हर दिन मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाने की उम्मीद लिए पहुंचता है और वहां से उसे अगले दिन आने को कहा जाता है। विशाल के पास न तो लखनऊ में ठहरने को जगह है और न ही सहारा देने के लिए कोई साथी। इसलिए उसने मुख्यमंत्री आवास के पास ही सिविल हॉस्पिटल में ही अपनी रात गुजारना शुरू कर दिया है।

बकौल विशाल पिछले 11 दिनों से वह ई—रिक्शा करके मुख्यमंत्री आवास के बाहर सड़क तक पहुंचते हैं। इसके आगे 200 दूरी वह अपने दिव्यांग शरीर के साथ अकेले ही तय करते हैं। इतनी कोशिशों के बाद वह आज तक सीएम योगी तक नहीं पहुंच पाए। किसी के कहने से वह किसी मंत्री से भी मिलने गए लेकिन वहां उनकी चिट्ठी लेकर जाने को कहा गया। उससे बात करने के दौरान लगा कि वह हार नहीं मानेगा कल फिर से वह मुख्यमंत्री आवास तक जाने के लिए उसने सिविल अस्पताल में अपनी रात गुजारने की तैयारी कर ली है।

विशाल तक कैसे पहुंचा पर्दाफाश —

सिविल अस्पताल में किसी काम से गए आनंद मिश्रा ने लौटते समय विशाल को फर्श पर बिलकुल अकेले लेटा देखा, मानवीय संवेदना दिखाते हुए उन्होंने उसका हाल चाल ले लिया। बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ तो विशाल ने अपनी आपबीती आनंद को सुनाई। विशाल की शरीरिक विकलांगता और मजबूरी को देखते हुए आनंद ने उसकी मदद की ठानी और पर्दाफाश को पूरी जानकारी देते हुए विशाल को मदद दिलाने के लिए एक प्रयास करने को कहा। अगर आप ने भी पूरी कहानी पढ़ी है तो इसे सोशल मीडिया के माध्यम से शेयर कर विशाल की गुहार को सीएम योगी तक पहुंचाने के लिए शेयर करें। शायद आपके एक शेयर से विशाल को सरकारी मदद मिल जाए।

विशाल का मोबाइल नंबर — 7524093033