दो महीने बाद गोरखनाथ मठ पहुंचे योगी, प्रदेश की सुरक्षा का लगातार निभा रहे दायित्व

CM Yogi
दो महीने बाद गोरखनाथ मठ पहुंचे योगी, प्रदेश की सुरक्षा का लगातार निभा रहे दायित्व

गोरखपुर। कोरोना वायरस की महामारी के चलते पिछले 2 महीनो से देशभर में लौकडाउन चल रहा है. इसी के चलते प्रदेश की सुरक्षा का दायित्व निभा रहे गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पिछले दो महीने से गोरखनाथ पीठ नही पहुंच पाये. यहां तक कि इसी दौरान उनके पिता का निधन हो गया फिर भी वो पिता के अंतिम संस्कार में नही गये, उन्होने राजधर्म निभाना ज्यादा जरूरी समझा. लेकिन शुक्रवार दोपहर बाद वह गोरखनाथ पीठ पहुंचे और शनिवार की सुबह शक्ति मंदिर में श्रद्धा एवं विधि विधान के साथ रुद्राभिषेक भी किया. इस दौरान उन्होंने देवाधि देव भगवान शिव से कोरोना वायरस के संक्रमण से जूझ रही संपूर्ण विश्व के कल्याण कल्याण, उद्धार, समृद्धि एवं शांति के लिए प्रार्थना की.

Yogi Reached Gorakhnath Math After Two Months :

बता दें कि गोरक्षपीठाधीश्वर का दायित्व संभालने के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि वह लगातार दो महीने अपनी पीठ (गोरक्षनाथ) मठ और अपनों से दूर रहे. इसके पहले अपने पूज्य गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ के इलाज और बतौर सांसद एक-दो विदेश प्रवास के दौरान ही ऐसा हुआ. पर यह अंतराल तीन से चार हफ्तों का ही रहा होगा. बताया जाता है कि हमेशा वह संसद के सत्रों में हर रविवार को ट्रेन के जरिए दिल्ली के लिए जाते थे और सप्ताहांत में गोरखपुर लौट आते थे. मुख्यमंत्री बनने के बाद भी नियमित अंतराल पर उनका गोरखपुर आना-जाना लगा रहता है.

शुक्रवार को वज गोरखनाथ पीठ पहुंचे तो उन्होंने सोशल डिस्टेसिंग के मानकों का पूरी तरह ख्याल रखा. बाहर के जो लोग उनके आने पर अक्सर उनसे मिलने आते हैं, वह भी इस बार नही आये.आते ही उन्होंने तुरंत कोरोना के संक्रमण से बचाव, संक्रमित लोगों के इलाज, प्रवासी मजदूरों की वापसी, दक्षता के अनुसार उनको दिये जाने वाले रोजगार, कम्यूनिटी किचन, क्वारंटाइन केंद्रों की व्यवस्था, प्रवासी श्रमिकों और लॉकडाउन से प्रभावित लोगों के लिए दिये जाने वाले भरण-पोषण (1000 रुपये) राशन, नये राशन कार्डों की प्रगति आदि के बारे में संबंधित अधिकारियों से चर्चा की और जरूरी निर्देश भी दिये.

सीएम ने इस दौरान वहां चल रहे विकास कार्यों की भी समीक्षा की. साथ ही महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद और गुरु गोरक्षनाथ चिकित्सालय के पदाधिकारियों के साथ भी बैठक की. उनसे लॉकडाउन के बीच विद्यालयों में शिक्षण कार्यो एवं चिकित्सालयों में मरीजों की देखभाल की जानकारी ली. निर्माणाधीन मेडिकल कालेज की प्रगति के बारे में भी जाना, बारी-बारी देर रात तक इन बैठकों का सिलसिला जारी रहा.

गोरखपुर। कोरोना वायरस की महामारी के चलते पिछले 2 महीनो से देशभर में लौकडाउन चल रहा है. इसी के चलते प्रदेश की सुरक्षा का दायित्व निभा रहे गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पिछले दो महीने से गोरखनाथ पीठ नही पहुंच पाये. यहां तक कि इसी दौरान उनके पिता का निधन हो गया फिर भी वो पिता के अंतिम संस्कार में नही गये, उन्होने राजधर्म निभाना ज्यादा जरूरी समझा. लेकिन शुक्रवार दोपहर बाद वह गोरखनाथ पीठ पहुंचे और शनिवार की सुबह शक्ति मंदिर में श्रद्धा एवं विधि विधान के साथ रुद्राभिषेक भी किया. इस दौरान उन्होंने देवाधि देव भगवान शिव से कोरोना वायरस के संक्रमण से जूझ रही संपूर्ण विश्व के कल्याण कल्याण, उद्धार, समृद्धि एवं शांति के लिए प्रार्थना की. बता दें कि गोरक्षपीठाधीश्वर का दायित्व संभालने के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि वह लगातार दो महीने अपनी पीठ (गोरक्षनाथ) मठ और अपनों से दूर रहे. इसके पहले अपने पूज्य गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ के इलाज और बतौर सांसद एक-दो विदेश प्रवास के दौरान ही ऐसा हुआ. पर यह अंतराल तीन से चार हफ्तों का ही रहा होगा. बताया जाता है कि हमेशा वह संसद के सत्रों में हर रविवार को ट्रेन के जरिए दिल्ली के लिए जाते थे और सप्ताहांत में गोरखपुर लौट आते थे. मुख्यमंत्री बनने के बाद भी नियमित अंतराल पर उनका गोरखपुर आना-जाना लगा रहता है. शुक्रवार को वज गोरखनाथ पीठ पहुंचे तो उन्होंने सोशल डिस्टेसिंग के मानकों का पूरी तरह ख्याल रखा. बाहर के जो लोग उनके आने पर अक्सर उनसे मिलने आते हैं, वह भी इस बार नही आये.आते ही उन्होंने तुरंत कोरोना के संक्रमण से बचाव, संक्रमित लोगों के इलाज, प्रवासी मजदूरों की वापसी, दक्षता के अनुसार उनको दिये जाने वाले रोजगार, कम्यूनिटी किचन, क्वारंटाइन केंद्रों की व्यवस्था, प्रवासी श्रमिकों और लॉकडाउन से प्रभावित लोगों के लिए दिये जाने वाले भरण-पोषण (1000 रुपये) राशन, नये राशन कार्डों की प्रगति आदि के बारे में संबंधित अधिकारियों से चर्चा की और जरूरी निर्देश भी दिये. सीएम ने इस दौरान वहां चल रहे विकास कार्यों की भी समीक्षा की. साथ ही महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद और गुरु गोरक्षनाथ चिकित्सालय के पदाधिकारियों के साथ भी बैठक की. उनसे लॉकडाउन के बीच विद्यालयों में शिक्षण कार्यो एवं चिकित्सालयों में मरीजों की देखभाल की जानकारी ली. निर्माणाधीन मेडिकल कालेज की प्रगति के बारे में भी जाना, बारी-बारी देर रात तक इन बैठकों का सिलसिला जारी रहा.