योगी सरकार के 30 दिन पूरे होने पर समाजवादी पार्टी ने साधा निशाना

लखनऊ। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के 30 पूरे होने के साथ ही सत्ता से निर्वासित हुई समाजवादी पार्टी ने योगी सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने प्रेस नोट जारी कर कहा है कि प्रदेश में योगी सरकार ने 30 दिन बिता लिए, कैबिनेट की तीन बैठकें भी हो गई। सरकारी फाइलों में कई निर्णय दर्ज हो गए लेकिन योगी सरकार जमीन पर जनहित की कोई योजना नहीं ला पाई है। योगी सरकार ने अब तक दो ही काम किए हैं एक, पिछली सरकार के कामों पर स्याही फेरना और दूसरा कोई न कोई ऐसा विवाद खड़ा कर सांप्रदायिक और कट्टरतावादी ताकतों को खुराक देना। प्रदेश का किसान, गरीब, नौजवान सब भाजपा को सत्ता में लाकर अब पछता रहा है।



उन्होंने कहा कि भाजपा का मूल चरित्र वस्तुतः पूंजी परस्ती का है। इसलिए इसने गांव-किसान की उपेक्षा करना ही अपना राजधर्म बना लिया है। किसानों की कर्ज माफी के नाम पर लघु-सीमांत किसानों को ही भूल-भुलैया में फंसा दिया। आलू किसानों को समर्थन मूल्य देने का एलान तब किया जब किसान का आलू बिक चुका था और ज्यादातर फसल कोल्ड स्टोरेज में बंद हो गयी थी। गेहूँ खरीद केंद्रों की व्यवस्था भी जस की तस है। किसान अपना गेंहू लिए बेचने के लिए परेशान घूम रहा है। गन्ना किसान अभी तक अपने भुगतान के लिए मिलों के गेट पर सिर पटक रहा है।



उन्होंने कहा कि किसानों के साथ सबसे बड़ा धोखा तो यह है कि उसको आकस्मिक विपदा में राहत देने का कोई प्रयास भाजपा सरकार द्वारा नहीं किया जा रहा है। इन दिनों मौसम का पारा चढ़ा हुआ है। फर्रूखाबाद, सुल्तानपुर, चित्रकूट, गोरखपुर, कानपुर देहात, फैजाबाद, लखनऊ, नोएडा सहित दर्जनों जनपदों में आग लगने की घटनाएं हुई है जिनमें जनधन की व्यापक क्षति हुई है। गरीबों की झोपडि़यां जली तो उनकी सारी कमाई लुट गई। कई जगह पशु भी आग की चपेट में आ गए। कई किसानों की फसल तो खलिहान में हाईटेंशन तार गिरने से तबाह हो गई।

भाजपा सरकार को किसानों के प्रति संवेदनहीन करार देते हुए उन्होंने कहा कि यह सरकार केवल बयानबाजी से अपना काम चलाने के मूड में है। उसे किसानों, गरीबों और गांव से कोई हमदर्दी नहीं है। प्रदेश में जब पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार थी तो किसानों को प्राकृतिक आपदा से बचाने के लिए बाकायदा नीति बनी थी। बेमौसम बरसात, ओलावृष्टि के शिकार 30 लाख से ज्यादा किसानों को 5-5 लाख रूपयों की राहत बांटी गई थी। भाजपा सरकार महीने भर में किसानों के लिए एक भी लाभकारी निर्णय नहीं ले पाई है।