योगिनी एकादशी 2018: जानिए पूजन विधि, इसके लाभ और महत्त्व

लखनऊ। आषाढ़ माह के कृष्णपक्ष में पड़ने वाली एकादशी को योगिनी एकादशी कहा जाता है। इस बार यह एकादशी व्रत 9 जुलाई यानि सोमवार को पड़ा है। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति प्रदान होती है साथ ही सुख की प्राप्ति होती है।

Yogini Ekadashi 2018 Importance Of Yogini Ekadashi :

योगिनी एकादशी व्रत के लाभ

इस एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा-आराधना की जाती है। ऐसी मान्यता है जो भी इस योगिनी एकादशी पर व्रत रखता है उसे 88 हजार ब्राह्राणों को भोजन करवाने के बराबर का पुण्य-लाभ मिलता है। हिन्दू धर्म में एकादशी का विशेष महत्व होता है। वैसे तो पूरे वर्ष में 24 एकादशियां होती हैं लेकिन मलमास का महीना होने पर एकादिशयों की संख्या 26 हो जाती है। एकादशी का व्रत रखने से सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती है। जिसमें योगिनी एकादशी का विशेष महत्व होता है।

योगिनी एकादशी की व्रत कथा

योगिनी एकादशी के विषय में पुराणों में एक कथा है। जिसमें हेममाली नाम का एक माली था। जो काम भाव में लीन होकर ऐसी गलती कर बैठा कि उसे राजा कुबेर का श्राप मिला, जिससे उसे कुष्ठ रोग हो गया। तब एक ऋषि ने उसे योगिनी एकादशी का व्रत करने को कहा, मुनि के आदेश का पालन करते हुए हेममाली नें योगिनी एकादशी का व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से वह पूरी तरह से रोगमुक्त हो गया और उसे शाप से मुक्ति मिल गई। तभी से इस एकादशी का इतना महत्व है।

पूजन विधि

  • योगिनी एकादशी का व्रत की शुरुआत दशमी तिथि की रात से हो जाता है।
  • अगली सुबह उठकर नित्यक्रम करने के बाद स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
  • भगवान विष्णु की मूर्ति रखकर उन्हें स्नान कराकर भोग लगाएं।
  • इसके बाद फूल, धूप और दीपक से आरती उतारें। इसके बाद योगिनी एकादशी की कथा सुनें।
  • इसके अलावा इस एकादशी के दिन पीपल के पेड़ की पूजा जरूर करनी चाहिए क्योंकि ऐसा करने से सभी तरह के पाप नष्ट होते हैं।
लखनऊ। आषाढ़ माह के कृष्णपक्ष में पड़ने वाली एकादशी को योगिनी एकादशी कहा जाता है। इस बार यह एकादशी व्रत 9 जुलाई यानि सोमवार को पड़ा है। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति प्रदान होती है साथ ही सुख की प्राप्ति होती है। योगिनी एकादशी व्रत के लाभ इस एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा-आराधना की जाती है। ऐसी मान्यता है जो भी इस योगिनी एकादशी पर व्रत रखता है उसे 88 हजार ब्राह्राणों को भोजन करवाने के बराबर का पुण्य-लाभ मिलता है। हिन्दू धर्म में एकादशी का विशेष महत्व होता है। वैसे तो पूरे वर्ष में 24 एकादशियां होती हैं लेकिन मलमास का महीना होने पर एकादिशयों की संख्या 26 हो जाती है। एकादशी का व्रत रखने से सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती है। जिसमें योगिनी एकादशी का विशेष महत्व होता है। योगिनी एकादशी की व्रत कथा योगिनी एकादशी के विषय में पुराणों में एक कथा है। जिसमें हेममाली नाम का एक माली था। जो काम भाव में लीन होकर ऐसी गलती कर बैठा कि उसे राजा कुबेर का श्राप मिला, जिससे उसे कुष्ठ रोग हो गया। तब एक ऋषि ने उसे योगिनी एकादशी का व्रत करने को कहा, मुनि के आदेश का पालन करते हुए हेममाली नें योगिनी एकादशी का व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से वह पूरी तरह से रोगमुक्त हो गया और उसे शाप से मुक्ति मिल गई। तभी से इस एकादशी का इतना महत्व है। पूजन विधि
  • योगिनी एकादशी का व्रत की शुरुआत दशमी तिथि की रात से हो जाता है।
  • अगली सुबह उठकर नित्यक्रम करने के बाद स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
  • भगवान विष्णु की मूर्ति रखकर उन्हें स्नान कराकर भोग लगाएं।
  • इसके बाद फूल, धूप और दीपक से आरती उतारें। इसके बाद योगिनी एकादशी की कथा सुनें।
  • इसके अलावा इस एकादशी के दिन पीपल के पेड़ की पूजा जरूर करनी चाहिए क्योंकि ऐसा करने से सभी तरह के पाप नष्ट होते हैं।