योगीराज में भी नहीं चूके नौकरशाह, बदल डाला संपत्ति ब्यौरे का प्रोफार्मा

लखनऊ। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कुर्सी संभालने के साथ ही अपने मंत्रिमंडल सदस्यों और नौकरशाहों को अपनी संपत्ति का ब्यौरा दाखिल करवाने की बात कही थी। जिसके लिए 6 अप्रैल तक का समय दिया गया था। शायद सीएम योगी की नियत को यूपी के नौकरशाह उनके अंदाज से ही भांप गए थे। इसीलिए पहले संपत्ति ब्यौरा जमा करवाने की तारीख बदलवाने की अपील की गई फिर प्रोफार्मा के उस हिस्से को संशोधित कर हटा दिया गया जिसे भरने में कई अफसरों को परेशानी हो रही थी।




जानकारों की माने तो नौकरशाहों के लिए केन्द्र सरकार के नियमानुसार प्रतिवर्ष अपनी संपत्ति का ब्यौरा देने अनिवार्य है। यह प्रक्रिया धीरे-धीरे एक औपचारिकता भर बन कर रह गई है। जिसे खानापूर्ति के लिए किया जाता रहा है, लेकिन यह पहला मौका है जब किसी प्रदेश सरकार ने अपनी नौकरशाही के सामने इस तरह की बाध्यता रखी। सीएम योगी आदित्यनाथ की इस पहल का स्वागत होना चाहिए था, लेकिन दशकों से सत्तारूढ़ दलों के राजनेताओं की चाटुकारता कर अपनी मनमानी करते रहे नौकरशाहों के लिए यह थोड़ा जटिल हो गया था।




एक हिन्दी समाचार पत्र की रिपोर्ट के मुताबिक आईएएस अधिकारियों को अपनी संपत्ति का ब्यौरा देने के लिए जो प्रोफार्मा दिया गया था, उसमें एक कॉलम संपत्तियों को अर्जित करने के वर्ष का विवरण देने के लिए रखा गया था। जिससे यह स्पष्ट हो सकता था कि किस वर्ष में उक्त अधिकारी ने ज्यादा कमाई की थी।




फिलहाल अधिकारियों के इस प्रयास को प्रथमदृष्ठया योगी आदित्यनाथ को गच्चा देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। अगर वह सीएम के प्रथम आदेश का ही पालन इस तरह से करेंगे तो आने वाले समय में उनकी कार्यशैली की दशा और दिशा कैसी होगी यह भविष्य ही बताएगा।