आपके मन में भी है सवाल- आखिर क्यों इस बार गर्मी में तापमान कम है, ? जानिए इसकी वजह

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नई दिल्ली: पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है, भारत में भी मामले एक लाख तक जा पहुंचे हैं । लेकिन एक बात जो नोटिस हो रही है वो है मौसम में बदलाव । इस बार तापमान उतना तेजी से नहीं बढ़ रहा है, जितना की हर वर्ष में अब तक हो जाया करता था । कई मध्‍यम वर्गीय घरों में एसी भी चलना शुरू नहीं हुआ है, पंखे से काम चल रहा है । क्‍या आपके मन में भी ये सवाल उठ रहा है कि आखिर क्‍यों गर्मी में इस बार तापमान उतनी तेजी से नहीं बढ़ रहा है । लेकिन कम तापमान खुशी का कारण नहीं है बल्कि आने वाले संकट की ओर इशारा कर रहा है ।

You Also Have A Question Why The Temperature Is Lower This Summer Know The Reason :

इस साल मई महीने में अब तक झुलसा देने वाली गर्मी महसूस नहीं हो रही है । इसकी वजह है वेस्टर्न डिस्टर्बेंस यानि पश्छिम विक्षोभ । वैज्ञानिकों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ की वजह से ही उत्तर और पूर्वी भारत में बारिश, ओले, आंधी, तूफान आता है । सामान्य तौर पर यह जनवरी, फरवरी, मार्च तक ही रहता है । मार्च के बाद यह खत्म होने लगता है और तापमान बढ़ने लगता है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ है मौसम विभाग के अनुसार मार्च और अप्रैल के महीने में इस बार 354 बार भारी बारिश हुई है, जो कि 56.5 मिलिमीटर से अधिक दर्ज की गई है, यह सामान्य स्थिति से अलग है।

हैरान करने वाली बात ये है कि भारत में अब भी भारी बारिश का अनुमान है, मौसम विभाग के अनुसार तकरीबन आधा भारत येलो या फिर ऑरेंज जोन में आ रहा है, यानि यहां भारी बारिश की संभावना है । पिछले दिनों भारत के कई उत्‍तर पूर्वी राज्‍यों में भारी बारिश के साथ ओले गिरे हैं । हैरान करने वाली बात ये कि मई के महीने में भी हिमाचल और शिमला में बर्फ गिरती रही । जाहिर है ये स्थिति कहीं से भी सामान्‍य नहीं है । मौसम विभाग के अनुसार इस बार गर्मी एक डिग्री ज्‍यादा होनी थी, लेकिन इससे उलट उत्तर भारत में औसत तापमान तकरीबन 4-5 डिग्री कम है ।

पश्चिमी विक्षोभ भूमध्य सागर और कैस्पियन सागर से होकर भारत पहुंचने वाला एक तरह का अतिरिक्त उष्णकटिबंधीय तूफान है । यह तूफान ईरान, अफगानिस्तान होते हुए भारत आता है, और जब यह हिमालय पर पहुंचता है तो भारी बारिश व बर्फबारी का कारण बनता है । लेकिन यह मानसून की बारिश नहीं होती है, हालांकि इसके बारे में सटीक तौर पर बता पाना काफी मुश्किल होता है । खास बात ये है कि पूरे यूरोप और एशिया में तापमान सामान्य से अधिक है, सिर्फ भारत में ऐसा नहीं है ।

नई दिल्ली: पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है, भारत में भी मामले एक लाख तक जा पहुंचे हैं । लेकिन एक बात जो नोटिस हो रही है वो है मौसम में बदलाव । इस बार तापमान उतना तेजी से नहीं बढ़ रहा है, जितना की हर वर्ष में अब तक हो जाया करता था । कई मध्‍यम वर्गीय घरों में एसी भी चलना शुरू नहीं हुआ है, पंखे से काम चल रहा है । क्‍या आपके मन में भी ये सवाल उठ रहा है कि आखिर क्‍यों गर्मी में इस बार तापमान उतनी तेजी से नहीं बढ़ रहा है । लेकिन कम तापमान खुशी का कारण नहीं है बल्कि आने वाले संकट की ओर इशारा कर रहा है । इस साल मई महीने में अब तक झुलसा देने वाली गर्मी महसूस नहीं हो रही है । इसकी वजह है वेस्टर्न डिस्टर्बेंस यानि पश्छिम विक्षोभ । वैज्ञानिकों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ की वजह से ही उत्तर और पूर्वी भारत में बारिश, ओले, आंधी, तूफान आता है । सामान्य तौर पर यह जनवरी, फरवरी, मार्च तक ही रहता है । मार्च के बाद यह खत्म होने लगता है और तापमान बढ़ने लगता है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ है मौसम विभाग के अनुसार मार्च और अप्रैल के महीने में इस बार 354 बार भारी बारिश हुई है, जो कि 56.5 मिलिमीटर से अधिक दर्ज की गई है, यह सामान्य स्थिति से अलग है। हैरान करने वाली बात ये है कि भारत में अब भी भारी बारिश का अनुमान है, मौसम विभाग के अनुसार तकरीबन आधा भारत येलो या फिर ऑरेंज जोन में आ रहा है, यानि यहां भारी बारिश की संभावना है । पिछले दिनों भारत के कई उत्‍तर पूर्वी राज्‍यों में भारी बारिश के साथ ओले गिरे हैं । हैरान करने वाली बात ये कि मई के महीने में भी हिमाचल और शिमला में बर्फ गिरती रही । जाहिर है ये स्थिति कहीं से भी सामान्‍य नहीं है । मौसम विभाग के अनुसार इस बार गर्मी एक डिग्री ज्‍यादा होनी थी, लेकिन इससे उलट उत्तर भारत में औसत तापमान तकरीबन 4-5 डिग्री कम है । पश्चिमी विक्षोभ भूमध्य सागर और कैस्पियन सागर से होकर भारत पहुंचने वाला एक तरह का अतिरिक्त उष्णकटिबंधीय तूफान है । यह तूफान ईरान, अफगानिस्तान होते हुए भारत आता है, और जब यह हिमालय पर पहुंचता है तो भारी बारिश व बर्फबारी का कारण बनता है । लेकिन यह मानसून की बारिश नहीं होती है, हालांकि इसके बारे में सटीक तौर पर बता पाना काफी मुश्किल होता है । खास बात ये है कि पूरे यूरोप और एशिया में तापमान सामान्य से अधिक है, सिर्फ भारत में ऐसा नहीं है ।