जिम्बाब्वे के पूर्व राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे का 95 की उम्र में निधन

जिम्बाब्वे के पूर्व राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे का 95 की उम्र में निधन
जिम्बाब्वे के पूर्व राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे का 95 की उम्र में निधन

नई दिल्ली। जिम्बाब्वे के पूर्व राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे का सिंगापुर के एक अस्पताल में निधन हो गया। 95 वर्षीय रॉबर्ट मुगाबे पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे थे। मुगाबे 1980 से 1987 तक प्रधानमंत्री और 1987 से 2017 तक राष्ट्रपति रहे थे। यानी रॉबर्ट मुगाबे ने 37 सालों तक जिम्बाब्वे का नेतृत्व किया था।

Zimbabwe Former President Robert Mugabe Passes Away :

जिम्बाब्वे के राष्ट्रपति एमर्सन मनांगाग्वा ने उनकी मौत की खबर देते हुए ट्वीट में कहा, ‘बेहद दुख के साथ मैं ये सूचित करता हूं कि जिम्बाब्वे के जनक और पूर्व राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे नहीं रहे।’ उन्होंने लिखा कि ‘मुगाबे स्वतंत्रता के प्रतिक थे, वो एक ऐसे अफ्रीकी नेता थे जिन्होंने अपने लोगों की स्वतंत्रता और सशक्तिकरण में अपना जीवन बीता दिया। इस देश और महाद्वीप के इतिहास में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा। उनकी आत्मा को शांति मिले।’

याद दिला दें कि मुगाबे ने देश की आजादी की लड़ाई में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के बाद उन्होंने 37 सालों तक लगातार देश में शासन किया। उनके तानाशाही फैसलों ने देश की अर्थव्यवस्था और सेना का काफी नुकसान भी किया था। उन्हें शासन से हटाने के लिए देशभर में आंदोलन किया गया। जिसके बाद 2000 में जनमत संग्रह और 2008 के राष्ट्रपति चुनाव में बड़ी हार का सामना करना पड़ा था।

नई दिल्ली। जिम्बाब्वे के पूर्व राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे का सिंगापुर के एक अस्पताल में निधन हो गया। 95 वर्षीय रॉबर्ट मुगाबे पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे थे। मुगाबे 1980 से 1987 तक प्रधानमंत्री और 1987 से 2017 तक राष्ट्रपति रहे थे। यानी रॉबर्ट मुगाबे ने 37 सालों तक जिम्बाब्वे का नेतृत्व किया था। जिम्बाब्वे के राष्ट्रपति एमर्सन मनांगाग्वा ने उनकी मौत की खबर देते हुए ट्वीट में कहा, 'बेहद दुख के साथ मैं ये सूचित करता हूं कि जिम्बाब्वे के जनक और पूर्व राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे नहीं रहे।' उन्होंने लिखा कि 'मुगाबे स्वतंत्रता के प्रतिक थे, वो एक ऐसे अफ्रीकी नेता थे जिन्होंने अपने लोगों की स्वतंत्रता और सशक्तिकरण में अपना जीवन बीता दिया। इस देश और महाद्वीप के इतिहास में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा। उनकी आत्मा को शांति मिले।' याद दिला दें कि मुगाबे ने देश की आजादी की लड़ाई में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के बाद उन्होंने 37 सालों तक लगातार देश में शासन किया। उनके तानाशाही फैसलों ने देश की अर्थव्यवस्था और सेना का काफी नुकसान भी किया था। उन्हें शासन से हटाने के लिए देशभर में आंदोलन किया गया। जिसके बाद 2000 में जनमत संग्रह और 2008 के राष्ट्रपति चुनाव में बड़ी हार का सामना करना पड़ा था।