लखनऊ। भदोही जिले के महाराजा चेतसिंह जिला अस्पताल गेट पर हुए प्रसव को लेकर उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य विभाग पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस मामले की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने भी इस वीडियो का संज्ञान लिया और जांच के बाद सीएमएस समेत पांच अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई की लेकिन इस मामले में भदोही के भ्रष्ट मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) भी सवालों के घेरे में हैं।
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भदोही के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. संतोष कुमार चक जिले में करीब 6 वर्षों से तैनात हैं। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरूस्त करने की जिम्मेदारी इनके ऊपर है लेकिन इन्होंने व्यवस्था को दुरूस्त करने की बजाए उसे और ज्यादा खराब कर दिया, जिसके कारण अस्पताल के गेट पर प्रसव जैसी घटनाएं हो रही हैं। इस तरह की घटनाओं के कारण सरकार और पूरे स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।
सीएमओ डॉ. संतोष कुमार चक को कौन दे रहा संरक्षण
दरअसल, भदोही के मुख्य चिकित्साअधिकारी योगी सरकार को बदनाम करने में जुट गए हैं। सबसे बड़ा सवाल ये है कि, इतनी बड़ी घटना होने के बाद भदोही के सीएमओ को कौन बचा रहा है? आखिर इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी इन पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। क्या सिर्फ छोटे कर्मचारियों और अधिकारियों पर कार्रवाई कर सरकार अपनी पीठ थपथपा लेगी या फिर ऐसे दागदार सीएमओ के खिलाफ भी कोई बड़ा एक्शन होगा?
विवादित सीएमओ एक जिले में इतने दिनों तक कैसे है तैनात
भदोही जिले के सीएमओ डॉ. संतोष कुमार चक का विवादों से पुराना नाता है। इनके ऊपर कई गंभीर आरोप भी लग चुके हैं इसके बाद भी करीब छह सालों से ये भदोही के सीएमओ की कुर्सी संभाल रहे हैं। सीएमओ पर कन्या भ्रूण हत्या कराने वालों से साठगांठ और कई चिकित्सकों को बिना ड्यूटी किए लाखों का वेतन का भुगतान करने सहित अन्य गंभीर आरोप लग चुके हैं।
डिप्टी सीएम से हो चुकी है शिकायत
भ्रष्टाचारी सीएमओ डॉ. संतोष कुमार चक की पहले भी कई बार डिप्टी सीएम से शिकायत हो चुकी है। नवंबर 2024 में इनके खिलाफ जनता दल यू के नेता भी डिप्टी सीएम से मिलकर शिकायत की थी। इन पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। उनका आरोप था कि, ये लंबे समय से यहां पर तैनात हैं। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में न तो डाक्टर समय से आ रहे हैं और न ही दवाओं का वितरण हो रहा है।
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