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दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के बीच ज्ञानेश कुमार का छत्तीसगढ़ दौरा अचानक टला, चुनाव आयोग ने अपरिहार्य कारणों का दिया हवाला

By santosh singh 
Updated Date

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार (Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar) और चुनाव आयोग (Election Commission) के अन्य अधिकारियों का दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरा अचानक रद कर दिया गया है। यह दौरा 7 और 8 अक्टूबर को प्रस्तावित था, लेकिन चुनाव आयोग (Election Commission) ने इसे अपरिहार्य कारणों का हवाला देते हुए टाल दिया है। बता दें कि अपने इस दौरे के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar) और उनके साथ मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों को राज्य के कई अहम हिस्सों, खासकर दंतेवाड़ा, बस्तर और कवर्धा का दौरा करना था। वह दंतेवाड़ा के दंतेश्वरी माता मंदिर, बस्तर के चित्रकोट वॉटरफॉल, कवर्धा के भोरमदेव मंदिर भी जाने वाले थे।  इससे पहले ज्ञानेश कुमार का यूपी में मेरठ व वाराणसी दौरा टल चुका है।

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राज्य में तैयारी भी चल रही थी

इसके इतर, ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) के इस दौरे को लेकर राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने उन्हें ‘राज्य अतिथि’ घोषित किया था और सुरक्षा व प्रोटोकॉल की तमाम तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। लेकिन अब दौरा स्थगित होने के बाद नई तारीखों का एलान बाद में किया जाएगा।

क्यों टला यह दौरा असली विवाद क्या?

गौरतलब है कि CEC का यह दौरा ऐसे समय पर टला है जब चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (CEC Gyanesh Kumar) खुद एक बड़े प्रशासनिक और कानूनी विवाद के केंद्र में हैं। आरोप है कि आयोग के तीन सदस्यीय ढांचे में CEC ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) ने अन्य दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की असहमति के बावजूद कई अहम फैसले लिए।

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याचिकाकर्ताओं का दावा है कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच दोनों आयुक्तों ने कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की थी। सबसे बड़ा विवाद नए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन वाले ‘फॉर्म-6’ में कथित तौर पर बिना उचित प्रक्रिया के बदलाव करने को लेकर है।

अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

इतना ही नहीं, यह पूरा विवाद अब देश की  सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) तक पहुंच चुका है। 5 अक्टूबर को हुई सुनवाई में कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) को तत्काल निलंबित करने से तो इनकार कर दिया, लेकिन केंद्र सरकार, चुनाव आयोग (Election Commission)  और अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)  ने साफ किया है कि वह रिकॉर्ड देखकर यह जांचेगा कि फैसले सामूहिक सहमति से लिए गए थे या नहीं। नियमों के खिलाफ पाए जाने वाले फैसलों को रद्द भी किया जा सकता है।

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