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CM योगी का बड़ा बयान,बोले- संत-संन्यासी की नहीं होती व्यक्तिगत प्रॉपर्टी , ‘धर्म की आड़ में छिपे हैं कालनेमि…’

By संतोष सिंह 
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मेरठ: प्रयागराज माघ मेले में ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Jyotishpeeth Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand Saraswati) से जुड़े हालिया विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) ने धर्म, राष्ट्र और सनातन पर स्पष्ट और सख्त संदेश दिया है। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में धर्म की आड़ लेकर सनातन धर्म को कमजोर करने की कोशिशें की जा रही हैं, ऐसे लोगों से समाज को सतर्क रहने की आवश्यकता है।

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सीएम योगी (CM Yogi)  ने इन तत्वों को ‘कालनेमि’ बताया और कहा कि ये लोग बाहर से धार्मिक दिखते हैं, लेकिन भीतर से धर्मविरोधी एजेंडे पर काम कर रहे हैं। योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने कहा कि एक योगी, संत या संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ भी नहीं होता। उन्होंने स्पष्ट कहा कि संन्यासी की कोई व्यक्तिगत संपत्ति नहीं होती, उसकी असली संपत्ति धर्म होता है और राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान होता है। उन्होंने यह भी कहा कि जो व्यक्ति धर्म के खिलाफ आचरण करता है, चाहे वह किसी भी रूप में क्यों न हो, उसे सनातन परंपरा का प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सनातन धर्म, सामाजिक समरसता और भारत की सांस्कृतिक विरासत पर विस्तार से अपने वचार रखे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संतों और श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि आज देश गुलामी की बेड़ियों से पूरी तरह मुक्त हो चुका है और अयोध्या में भव्य रूप से सनातन पताका लहरा रही है। उन्होंने इसे भारत की सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण का प्रतीक बताया।

काशी विश्वनाथ धाम का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय ऐसा था जब वहां एक साथ दस लोग भी दर्शन नहीं कर पाते थे, जबकि आज प्रतिदिन डेढ़ से दो लाख श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह बदलाव सनातन संस्कृति के सशक्त होने का परिणाम है। इसी तरह प्रयागराज में सामाजिक समरसता का अद्भुत उदाहरण देखने को मिल रहा है, जहां संतों के प्रताप से श्रद्धालुओं का सम्मान बढ़ा है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत का हित सनातन धर्म में ही निहित है। सनातन धर्म मजबूत होगा तो विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा और भारत भी अधिक सशक्त बनेगा। उन्होंने कहा कि चाहे धार्मिक नेतृत्व हो या राजनीतिक, देश की जिम्मेदारी ऐसे लोगों को मिलनी चाहिए जो भारत को फिर से उन ऊंचाइयों तक पहुंचा सकें, जहां वह दो हजार वर्ष पहले था।

नाथ पंथ की परंपरा का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन धर्म की विरासत में नाथ पंथ प्राचीनतम उपासना विधियों में से एक है, जिसने समाज को जीवन जीने की नई प्रेरणा दी। यही कारण है कि वृहत्तर भारत में उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक नाथ संन्यासियों के चिन्ह देखने को मिलते हैं। अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज देश “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को साकार होते हुए देख रहा है।

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