अलीगढ़: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ स्थित राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय से जुड़ी रानी लक्ष्मी बाई स्कूटी योजना को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ ने योजना के तहत छात्राओं के चयन में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। संघ का दावा है कि कई संबद्ध महाविद्यालयों में नियमित कक्षाएं नहीं चलने के बावजूद छात्राओं को अच्छे अंक मिले और उनके नाम स्कूटी योजना के लिए भेजे गए।
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राजा महेंद्र प्रताप विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (रंपुटा) के अध्यक्ष प्रो. ओमवीर सिंह ने प्रेस वार्ता में योजना की चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि जिले में कुल 1039 छात्राओं को योजना के तहत चयनित किया गया है। इनमें वित्त पोषित महाविद्यालयों की 1033 छात्राएं शामिल हैं। वहीं, डीएस कॉलेज की चार, टीकाराम महाविद्यालय की एक और हाथरस के आरडी कॉलेज की एक छात्रा का चयन हुआ है। विश्वविद्यालय परिसर से किसी भी छात्रा का चयन नहीं होने पर भी संघ ने सवाल खड़े किए हैं।
नकल माफिया की सक्रियता का आरोप
शिक्षक संघ का आरोप है कि जिन महाविद्यालयों में नियमित कक्षाएं संचालित नहीं होतीं और छात्राओं की उपस्थिति भी कम रहती है, वहां इतनी बड़ी संख्या में छात्राओं को अच्छे अंक कैसे मिले। संघ ने आशंका जताई कि परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं और पूरे मामले की जांच कराई जानी चाहिए। रंपुटा के अनुसार, उसके हस्ताक्षर अभियान में चार हजार से अधिक छात्राओं ने अपनी शिकायतें दर्ज कराई हैं।
परीक्षा केंद्रों के चयन पर भी सवाल
संघ ने कुलपति प्रो. नरेंद्र बहादुर सिंह पर कुछ चुनिंदा महाविद्यालयों को बार-बार परीक्षा केंद्र बनाए जाने का आरोप भी लगाया है। रंपुटा का दावा है कि विश्वविद्यालय से संबद्ध करीब 38 महाविद्यालयों को लगातार परीक्षा केंद्र बनाया जा रहा है। वहीं, कुलपति प्रो. एनबी सिंह ने आरोपों पर कहा कि कोई भी आरोप लगा सकता है। विश्वविद्यालय नियमों के अनुसार काम कर रहा है और जो कमियां सामने आएंगी, उन्हें दूर किया जाएगा।
फिलहाल, स्कूटी योजना के चयन और परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठे इन सवालों के बीच मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। आरोपों की आधिकारिक जांच और उसके निष्कर्ष सामने आने के बाद ही कथित अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।