नई दिल्ली। पड़ोसी देश नेपाल में प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाई है। भीषण बाढ़ और भीषण भूस्खलन के कारण स्थिति अत्यंत विकट बनी हुई है। इस भयानक तबाही में अब तक 1,290 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता हैं। मलबे और पानी के बीच राहत एवं बचाव दल लगातार लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं। इस त्रासदी में सबसे बड़ी चुनौती उन शवों की पहचान करना बन गई है, जो बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इस मानवीय संकट के समय भारत ने अपने पड़ोसी देश की ओर मदद का हाथ बढ़ाते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
पढ़ें :- UP में कांग्रेस को जल्द मिल सकता है नया प्रदेश अध्यक्ष, इन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा
भारत देगा ‘फ्री DNA प्रोफाइलिंग’ की सुविधा: आपदा में मारे गए और लापता लोगों की सटीक पहचान के लिए भारत सरकार ने ‘फ्री DNA प्रोफाइलिंग’ की सुविधा देने का ऐलान किया है। भारत का यह कदम उन परिवारों के लिए एक उम्मीद की किरण बना है, जो अपने प्रियजनों की खोज में भटक रहे हैं।
यह मानवीय और तकनीकी सहायता निम्नलिखित तरीके से काम करेगी।
निःशुल्क फॉरेंसिक जांच: भारत की केंद्रीय और राज्य स्तरीय फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं (Forensic Labs) में पीड़ित परिवारों के लिए यह सेवा पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध कराई जाएगी।
सगे संबंधियों के सैंपल: जिन लोगों के रिश्तेदार नेपाल आपदा में लापता हैं, वे भारत में अपने नजदीकी फॉरेंसिक केंद्र पर सैंपल दे सकते हैं। इसमें केवल माता-पिता, बच्चे या भाई-बहन (First-degree relatives) ही अपना सैंपल दे सकता है।
पढ़ें :- योगी सरकार पीडियाट्रिक ट्रॉमा इंटीग्रेशन से हर साल बचाएगी करीब 1,800 जानें, तैयार किया बाल ट्रॉमा केयर को इमरजेंसी स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने का रोडमैप
नेपाल प्रशासन को डेटा हस्तांतरण: इन सैंपलों से तैयार की गई DNA प्रोफाइल रिपोर्ट को नेपाल सरकार और स्थानीय प्रशासन के साथ साझा किया जाएगा। इससे अज्ञात शवों का मिलान कर उनकी सही पहचान जल्दी और सटीक रूप से हो सकेगी।
हर संभव मदद के लिए तत्पर भारत
नेपाल में बुनियादी ढांचा पूरी तरह तहस-नहस हो चुका है और जनजीवन को सामान्य होने में लंबा समय लग सकता है। संकट की इस घड़ी में भारत लगातार भोजन, दवाएं और अन्य आवश्यक राहत सामग्री नेपाल भेज रहा है। तकनीकी और फॉरेंसिक सहायता से शवों की पहचान की प्रक्रिया तेज होगी, जिससे पीड़ित परिवारों को अपने परिजनों का अंतिम संस्कार सम्मानपूर्वक करने का अवसर मिल सकेगा।
भारत का यह कदम न केवल दोनों देशों के मजबूत रिश्तों को दर्शाता है, बल्कि संकट के समय एक सच्चे मित्र की भूमिका को भी रेखांकित करता है।
रिपोर्ट : दीपांजली मिश्रा