लखनऊ। यूपी के जिले बलिया में हालिया विधान परिषद चुनाव की मतदाता सूची में दर्ज एक अजीबोगरीब नाम को लेकर आपत्तिजनक स्थिति पैदा हो गई। इस मतदाता सूची में “राम ने यादव को मारा” जैसा विवादित नाम दर्ज होने पर AAP सांसद संजय सिंह ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और सॉफ्टवेयर पर सवाल उठाए। इसके बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) यूपी के आधिकारिक X हैंडल से एक तीखी टिप्पणी पोस्ट कर दी गई। इस अमर्यादित भाषा पर विवाद बढ़ने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने गलती स्वीकार करते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है और भविष्य में शालीन संवाद का वादा किया है।
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इस हैंडल के उद्धृत पोस्ट में टिप्पणियों की भाषा के स्तर और भाव और इनकी तीखी प्रकृति इस आधिकारिक हैंडल से अपेक्षित संचार की प्रकृति के अनुरूप नहीं है। पोस्ट में टिप्पणियों से उत्पन्न वास्तविक आक्रोश को अच्छी तरह से नोट किया गया है। हम इससे अचंभित और नाराज़ लोगों से ईमानदारी से माफी मांगते हैं। अब से हमारा संचार शालीन और औपचारिक होगा।
— CEO Uttar Pradesh (@ceoup) October 27, 2026
CEO यूपी ने स्वीकार किया कि पोस्ट में इस्तेमाल भाषा और कटु टिप्पणियां एक आधिकारिक हैंडल की गरिमा के अनुरूप नहीं थीं। पोस्ट से आहत लोगों से ईमानदारीपूर्वक माफी मांगते हुए कहा गया कि भविष्य में संवाद शालीन और औपचारिक रहेगा। सवाल यह है कि चुनाव जैसी संवेदनशील संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने वाले कार्यालय के आधिकारिक हैंडल से ऐसी भाषा आखिर इस्तेमाल कैसे हुई?
‘यादव’ नाम और CEO UP के विवादित जवाब पर भड़का गुस्सा मामले की शुरुआत बलिया विधान परिषद चुनाव की वोटर लिस्ट से हुई, जिसमें एक आपत्तिजनक नाम दर्ज था। इस पर AAP नेता राजेश यादव और सांसद संजय सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग से सवाल पूछा कि आखिर कंप्यूटर ने किसी यादव को ही क्यों निशाना बनाया।
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इसके जवाब में CEO उत्तर प्रदेश के आधिकारिक हैंडल से व्यंग्यात्मक अंदाज में लिखा गया कि कंप्यूटर जातिवादी नहीं है और किस्मत से गलती में भी जाति या किसी अल्पसंख्यक का भेदभाव नहीं हुआ। इस भाषा से लोगों में भारी आक्रोश फैल गया।
आधिकारिक हैंडल से माफी, संवाद को औपचारिक रखने का आश्वासन
बढ़ते जनाक्रोश और विवाद को देखते हुए CEO उत्तर प्रदेश ने दूसरा पोस्ट जारी कर खेद जताया। उन्होंने स्वीकार किया कि आधिकारिक X हैंडल से की गई टिप्पणियों की भाषा, भाव और तीखा लहजा एक सरकारी संस्थान की गरिमा के अनुरूप नहीं था। CEO ने कहा कि इससे अचंभित और नाराज लोगों से वे ईमानदारी से माफी मांगते हैं। चुनाव आयोग की ओर से आश्वासन दिया गया कि अब से आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर संवाद पूरी तरह शालीन, मर्यादित और औपचारिक रखा जाएगा।