Worship of the Shami tree on Dussehra: “बुराई पर अच्छाई की जीत का महापर्व—दशहरा! हम सब जानते हैं कि इस दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था और मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार किया था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शास्त्रों में दशहरे के दिन कुछ विशेष काम करने को बेहद शुभ माना गया है? मान्यता है कि इस दिन किए गए कुछ छोटे-छोटे काम आपकी सोई हुई किस्मत को चमका सकते हैं और आपको सालभर हर काम में सफलता दिला सकते हैं! आइए जानते हैं इन पौराणिक मान्यताओं के बारे में।”
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हिन्दू धर्म में शमी के पेड़ की पूजा का विशेष महत्व है। यह पूजा मुख्य रूप से शनि दोष से मुक्ति, सुख-समृद्धि और विजय प्राप्ति के लिए की जाती है।
भगवान श्रीराम
लंका पर आक्रमण करने से पहले भगवान श्रीराम ने भी शमी के पेड़ की पूजा की थी। इसलिए इसे विजय का प्रतीक माना जाता है
पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन अर्जुन ने अज्ञातवास समाप्त होने पर शमी के पेड़ से अपने गांडीव धनुष को उतारा था और उसकी पूजा की थी। इसलिए आज के दिन क्षत्रिय अपने शस्त्रों की पूजा करते हैं। आधुनिक समय में आप अपनी आजीविका के साधन, जैसे—कलम, लैपटॉप या अपनी गाड़ियों की पूजा कर सकते हैं।
पूजा सामग्री
जल का कलश, रोली, चंदन, अक्षत (चावल), काले तिल, साबुत उड़द, कलावा (मौूली), पुष्प, धूप, और भोग के लिए गुड़ या मिश्री।
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दिशा
शमी का पौधा हमेशा घर की उत्तर या पूर्व दिशा में या मुख्य द्वार के बाईं ओर लगाना चाहिए।