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जौहर ट्रस्ट से आजम खान का इस्तीफा, बहन निकहत अफलाक को ट्रस्ट की सौंपी कमान

By संतोष सिंह 
Updated Date

रामपुर : यूपी की रामपुर जेल में बंद समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के वरिष्ठ नेता आजम खान (Azam Khan) , उनकी पत्नी डॉ. तंजीन फातिमा (Dr. Tanzeen Fatima) और छोटे बेटे अब्दुल्ला आजम (Abdullah Azam) ने शुक्रवार को मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट (Maulana Mohammad Ali Jauhar Trust) से इस्तीफा दे दिया है। वहीं नई कार्यकारिणी की घोषणा करते हुए आजम खान (Azam Khan) ने अपनी बहन निकहत अफलाक (Nikhat Aflaq) को ट्रस्ट का नया अध्यक्ष बना दिया है।

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बड़े बेटे मोहम्मद अदीब आजम को सचिव बना दिया है। यानी ट्रस्ट की जिम्मेदारी नई टीम को सौंपी गई है। समाजवादी पार्टी के विधायक नसीर अहमद खान को संयुक्त सचिव (Samajwadi Party MLA Nasir Ahmad Khan) , मुश्ताक अहमद सिद्दीकी को उपाध्यक्ष और जावेद उर रहमान खान को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. एसएन सलाम (Registrar of Mohammad Ali Jauhar University, Dr. S N Salam) ने पुष्टि की।

बता दें कि जौहर विश्वविद्यालय और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट (Maulana Mohammad Ali Jauhar Trust) की स्थापना मुलायम सिंह यादव, आजम खान, अमर सिंह, जयाप्रदा जैसे दिग्गजों ने मिलकर की थी। ट्रस्ट को 28 मई 2013 को NCMEI ने ग्रांट किया था। आजम खान का ड्रीम प्रोजेक्ट जौहर ट्रस्ट यूनिवर्सिटी के साथ-साथ रामपुर पब्लिक स्कूलों का मैनेजमेंट और संचालन भी करता है, लेकिन आजम खान को अपने खिलाफ चल रहे कानूनी केसों के कारण ट्रस्ट के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा है और किसी न किसी केस में आरोपी अन्य सदस्यों को भी ट्रस्ट से अलग करना पड़ा है। आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला डबल पैन कार्ड केस में रामपुर जेल में बंद हैं। ट्रस्ट पर भी किसानों की जमीन कब्जाने का केस चल रहा है।

कानूनी पचड़ों के कारण आजम खान ने छोड़ा पद

जौहर ट्रस्ट ( Jauhar Trust) पर इस समय करीब 30 केस चल रहे हैं, लेकिन आजम खान (Azam Khan) के रहते ट्रस्ट के कामकाज में समस्या आ रही थी। इसलिए आजम खान को ट्रस्ट से अलग होना पड़ा। मई 2017 में अखिलेश यादव सरकार के सत्ता से बाहर होने और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद जौहर ट्रस्ट और आजम खान की मुश्किलें बढ़ गई थीं।

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हालात इतने बिगड़े कि रामपुर में आजम खान (Azam Khan) पर करीब 90 मामलों में केस दर्ज हुए, जिनमें से 30 केस अकेले जौहर यूनिवसिर्टी से जुड़े मामलों में दर्ज हैं। मामले यूनिवर्सिटी के लिए खरीदी गई 1500 बीघा जमीन को लेकर हैं, जिनकी जांच पिछले 5 साल से चल रही है। जांच एजेंसियों की कार्रवाई के कारण यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट भी परेशान हो रहे हैं।

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