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ईरान के नए सुप्रीम लीडर को अमेरिका-इजरायल ने खात्मे की दी धमकी, आग बबूला चीन बोला- किसी भी देश की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान जरूरी

पश्चिम एशिया (West Asia) में ईरान और अमेरिका-इजरायल (Iran and US-Israel) के बीच जंग लगातार जारी है। दोनों तरफ से लगातार हमले किए जा रहे हैं। इसी बीच ईरान ने दिवंगत सुप्रीम लीडर खामेनेई (Supreme Leader Khamenei) की जगह पर उनके बेटे मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया है। इस फैसले के बाद अमेरिका और इजरायल (US-Israel) ने मोजतबा को भी निशाना बनाने की धमकी है।

By संतोष सिंह 
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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (West Asia) में ईरान और अमेरिका-इजरायल (Iran and US-Israel) के बीच जंग लगातार जारी है। दोनों तरफ से लगातार हमले किए जा रहे हैं। इसी बीच ईरान ने दिवंगत सुप्रीम लीडर खामेनेई (Supreme Leader Khamenei) की जगह पर उनके बेटे मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया है। इस फैसले के बाद अमेरिका और इजरायल (US-Israel) ने मोजतबा को भी निशाना बनाने की धमकी है। अब इन दोनों देशों की धमकी पर चीन का सख्त बयान सामने आया है। चीन (China) ने कहा कि किसी भी देश के आंतरिक मामलों में किसी भी हस्तक्षेप का विरोध करता है।

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चीनी विदेश मंत्रालय (Chinese Foreign Ministry) के प्रवक्ता गुओ जियाकुन (Spokesperson Guo Jiaqun) ने बीजिंग में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei)  की नियुक्ति ईरान का आंतरिक मामला है। इसमें किसी को भी दखल देने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा,कि चीन किसी भी बहाने से दूसरे देशों के आतंरिक मामलों में हस्तक्षेप का विरोध करता है और ईरान की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किए जाने का आह्वान करता है। उन्होंने यह भी कहा कि मोजतबा को सर्वोच्च नेता के रूप में नामित करने की प्रक्रिया ईरान के संवैधानिक ढांचे के अनुसार की गई है।

गौरतलब है कि बीजिंग की तरफ से यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के नए लीडर को चुने जाने में अमेरिकी भूमिका की मांग कर रहे थे। हालांकि, ईरान की तरफ से जब इस पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया न देते हुए मोजतबा के नाम की घोषणा की गई, तो ट्रंप ने कहा कि यह ज्यादा दिनों तक नहीं टिकेंगे। इजरायल की तरफ से भी मोजतबा को निशाना बनाने की बात सामने आई थी। आपको बता दें, चीन, ईरान के तेल निर्यात का एक बड़ा हिस्सा खरीदता है और खुले तौर पर ईरान को मदद करता आ रहा है।

हालांकि, इस युद्ध में उसने केवल ईरान की तरफदारी में बयान ही जारी किए हैं। बीजिंग ने पहले अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों को “अवैध आक्रामकता” बताया था, युद्धविराम की मांग की थी और क्षेत्र में संयम बरतने की अपील की थी। ताकि उसके ऊर्जा हितों और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव की सुरक्षा हो सके। ईरान के लिए चीन का समर्थन कूटनीतिक, आर्थिक और सैन्य-तकनीकी कई स्तरों पर फैला हुआ है। कूटनीतिक स्तर पर, चीन के अधिकारी जैसे विदेश मंत्री वांग यी (Foreign Minister Wang Yi) और माओ निंग (Mao Ning) ने ईरान की संप्रभुता का समर्थन किया है और अंतरिम नेतृत्व के साथ संपर्क बनाए रखा है ताकि शासन की निरंतरता बनी रहे।

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