लखनऊ। लोकसभा चुनाव 2024 के करीब आते ही सभी राजनीतिक दल अपनी तैयारियों में जुट गए हैं। विभिन्न राजनीति दल एनडीए और इंडिया गठबंधन में शामिल होकर चुनाव की तैयारियों में जुटी हैं। इन सबके बीच बहुजन समाज पार्टी अकेले चुनाव लड़ने का दंभ भर रही है। हालांकि, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के नींव का पत्थर कहे जाने वाले कई ऐसे नेता रहे जो अब पार्टी छोड़कर दूसरे दलों में सक्रिय होकर राजनीति कर रहे हैं। कभी ये नेता बसपा सुप्रीमो मायावती के कारखास हुआ करते थे। बसपा को उत्तर प्रदेश के बीते विधानसभा चुनाव में भी इसका असर देखने केा मिला था। पूरे उत्तर प्रदेश में बसपा सिर्फ एक विधानसभा में ही जीत दर्ज कर पाई। ऐसे में लोकसभा चुनाव 2024 में मायावती के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं। आइए जानते हैं बसपा के वो कौन कौन से नींव के पत्थर थे, जो पार्टी छोड़कर दूसरे दलों में शामिल हो गए?
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आरके चौधरी
कभी आरके चौधरी की भी गिनती बसपा के दिग्गज नेताओं में हुआ करती थी। वो बसपा सरकार में मंत्री भी रहे लेकिन बसपा सुप्रीमो मायावती से अनबन के बाद उन्हें 2001 में बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। हालांकि, इसके बाद उनकी वापसी हुई लेकिन 2017 में उन्होंने फिर बसपा छोड़ दी। इसके बाद वो कांग्रेस में शामिल हुए। हालांकि, अब उन्होंने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है।
राम अचल राजभर
बसपा सुप्रीमो मायावती के करीबियों में कभी रामअचल राजभर की भी गिनती होती थी। बसपा सरकार में वो दो बार मंत्री भी रहे। उनको प्रदेश अध्यक्ष सहित कई अहम जिम्मेदारियां दी गईं, लेकिन 2020 में पंचायत चुनाव के बाद उनको पार्टी से निकाल दिया गया। इसके बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया और 2022 में सपा से विधायक बने।
लालजी वर्मा
बसपा सरकार में मंत्री रहने वाले लालजी वर्मा की भी गिनती मायावती के करीबियों में होती थी। मायवती के हर सरकर में वो मंत्री रहे। 2020 में बसपा से बाहर कर दिए गए। इसके बाद उन्होंने सपा की सदस्यता ली और यहां से वो विधायक बने।
ओम प्रकाश राजभर
मौजूदा समय सुभासपा के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर का भी कभी नाता बसपा से था। कांशीराम से प्रभावित होकर 1981 में राजनीति में आए। हालांकि, 2001 में उन्होंने बसपा छोड़ दी और अपना दल में शामिल हो गए। हालांकि, अब वो अपनी पार्टी सुभासपा के प्रमुख हैं और योगी सरकार—1 में वो कैबिनेट मंत्री भी रहे।
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डॉ. मसूद अहमद
बसपा के कद्दावर नेताओं में कभी डॉ. मसूद अहमद की गिनती होती थी। सपा—बसपा की 1993 की गठबंधन सरकार में वो मंत्री भी रहे। हालांकि, बसपा सुप्रीमो से अनबन के बाद उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इसके बाद उन्होंने 2010 में सपा में शामिल हो गए। हालांकि, इसके बाद उन्होंने आरएलडी की सदस्तया ली लेकिन उसे छोड़कर उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया।
बाबू सिंह कुशवाहा
बसपा में कभी बाबू सिंह कुशवाहा की तूती बोलती थी। वो मायवती और कांशीराम के करीबियों में शुमार थे। मायावती सरकार में वो मंत्री भी रहे। हालांकि, एनएचआरएम घोटाला मामला उजागर होने के बाद उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा गया गया, जिसके बाद उन्होंने भाजपा की भी सदस्यता हासिल की थी। लेकिन कुछ ही दिनों बाद उन्होंने भाजपा छोड़कर अपनी पार्टी बना ली।
स्वामी प्रसाद मौर्य
पिछड़ जाति के कद्दावर नेता कहे जाने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य भी कभी बसपा के दिग्गज नेता हुआ करते थे लेकिन उन्होंने 2016 में बसपा छोड़कर भाजपा की सदस्यता ली थी। इसके बाद वो योगी सरकार में मंत्री भी रहे। लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने सपा का दामन थाम लिया।
ब्रजेश पाठक
मायावती के करीबियों में शामिल ब्राह्मण नेता ब्रजेश पाठक ने भी 2016 में बसपा छोड़ दिया था। इसके बाद वो भाजपा में शामिल हो गए। 2017 के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद भाजपा सरकार में वो मंत्री बने। इसके बाद 2022 के चुनाव में उन्हें भाजपा ने डिप्टी सीएम बना दिया।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने छोड़ा बसपा
बसपा के दिग्गज नेताओं में कभी नसीमुद्दीन सिद्दीकी की भी गिनती होती थी। बसपा की सरकार में वो कैबिनेट मंत्री भी रहे। लेकिन 2018 में उन्होंने बसपा को छोड़ दिया और कांग्रेस में शामिल हो गए।
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नकुल दुबे
बसपा प्रमुख मायावती ने पार्टी गतिविधियों के चलते नकुल दुबे को बर्खास्त किया था। बसपा नेता सतीश चन्द्र मिश्र के करीबियों में नकुल दुबे की गिनती होती थी। हालांकि, अब नकुल दुबे कांग्रेस में हैं।