नई दिल्ली। संसद में बजट सत्र के पहले दिन सोमवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने लोकसभा में आर्थिक सर्वे (Economic Survey) पेश किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कारोबार में सुगमता लाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। जवाब में करीब 11 कदमों का उल्लेख किया गया है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है 63 अपराधों को गैर-अपराधीकरण करना, जिसके परिणामस्वरूप आज कंपनियां अनुपालन की चिंता किए बिना अपना काम कर पा रही हैं। एक केंद्रीय प्रसंस्करण प्रणाली भी स्थापित की गई है।
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इसमें कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025 में GDP ग्रोथ 6.5 से 7% रहने का अनुमान है । दोपहर 2:30 बजे चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर (CEA) अनंत नागेश्वरन (Anant Nageshwaran) की प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी। केंद्रीय बजट कल यानी 23 जुलाई को पेश होगा।
कई चुनौतियों के बाद भी भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2023 में बनी गति को वित्त वर्ष 2024 में भी जारी रखा है। वित्त वर्ष 24 में भारत की वास्तविक जीडीपी (GDP) में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो वित्त वर्ष 24 की चार तिमाहियों में से तीन में 8 प्रतिशत के आंकड़े को पार कर गई। व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित करने से यह सुनिश्चित हुआ कि बाहरी चुनौतियों का भारत की अर्थव्यवस्था पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।
जून में खुदरा महंगाई 4 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंची
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जून में रिटेल महंगाई (Retail Inflation) बढ़कर 5.08% पर पहुंच गई है। यह महंगाई का 4 महीने का उच्चतम स्तर है। अप्रैल में महंगाई 4.85% रही थी। वहीं एक महीने पहले मई में महंगाई 4.75% रही थी। वहीं वित्त वर्ष 2023-2024 के आखिरी महीने यानी मार्च में रिटेल महंगाई 4.85% रही थी।
जून में थोक महंगाई बढ़कर 16 महीनों के ऊपरी स्तर पर
जून में थोक महंगाई (Wholesale Inflation) बढ़कर 16 महीनों के ऊपरी स्तर पर पहुंच गई है। 15 जुलाई को जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, जून में थोक महंगाई बढ़कर 3.36% पर पहुंच गई है। फरवरी 2023 में थोक महंगाई दर 3.85% रही थी। वहीं, मई में थोक महंगाई बढ़कर 15 महीनों के ऊपरी स्तर 2.61% पर थी। इससे पहले अप्रैल 2024 में महंगाई 1.26% रही थी, जो 13 महीने का उच्चतम स्तर था। वहीं मार्च में थोक महंगाई दर 4.85% रही थी।
भारत की रियल GDP 8.2% की दर से बढ़ी
इकोनॉमिक सर्वे (Economic Survey) 2023-24 में कहा गया है कि वैश्विक और बाहरी चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2023 में बनी गति को वित्त वर्ष 2044 में आगे बढ़ाया। व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने पर फोकस करने से यह सुनिश्चित हुआ कि इन चुनौतियों का भारत की अर्थव्यवस्था पर कम से कम प्रभाव पड़े। इससे, वित्त वर्ष 2024 में भारत की रियल जीडीपी 8.2% की दर से बढ़ी। ये लगातार तीसरा साल था जब GDP 7% से ज्यादा दर्ज की गई। स्टेबल कंजंप्शन डिमांड और इन्वेस्टमेंट डिमांड में सुधार ने GDP को ड्राइव किया।
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फीमेल लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट 6 साल से बढ़ रहा
रोजगार के मोर्चे पर, एनुअल PLFS के अनुसार, ऑल इंडिया अनएम्प्लॉयमेंट रेट (All India Unemployment Rate) में महामारी के बाद से गिरावट आ रही है। इसके साथ-साथ लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट और वर्कर-टू-पॉपुलेशन रेश्यू में बढ़ोतरी हुई है। जेंडर पर्सपेक्टिव से, फीमेल लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट 6 साल से बढ़ रहा है, यानी, 2017-18 में 23.3% से बढ़कर 2022-23 में 37% हो गया है। इसे मुख्य रूप से ग्रामीण महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने ड्राइव किया।
FY25 में GDP ग्रोथ 6.5 से 7% रहने का अनुमान
इकोनॉमिक सर्वे (Economic Survey) में वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान 6.5 से 7% तक बताया गया है। वित्त वर्ष 2024-25 (FY24) में भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) के 8.2% से बढ़ने का अनुमान है।