Dhanteras 2026 : धनतेरस का त्योहार केवल धन के लिए ही नहीं बल्की आरोग्य , समृद्धि और प्रकृति के लिए भी मनाया जाता है। वर्ष में एक बार आने वाला इस पर्व धनतेरस का जब हम सब नाम सुनते हैं, तो हमारे दिमाग में सबसे पहले सोना, चांदी, गाड़ियां या बर्तन खरीदने की बात आती है। हमें लगता है कि यह त्योहार सिर्फ ‘धन’ यानी पैसे और भौतिक समृद्धि से जुड़ा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे पूर्वजों ने इस त्योहार की शुरुआत सिर्फ तिजोरी भरने के लिए नहीं, बल्कि कुछ और ही बेहद खास वजह से की थी?
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पौराणिक कथाओं के अनुसार, कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि को देवताओं का वैद्य और आयुर्वेद का जनक माना जाता है। जब वे प्रकट हुए, तो उनके एक हाथ में अमृत का कलश था और दूसरे हाथ में औषधियां थीं।
यानी, धनतेरस का पहला संदेश है—”पहला सुख निरोगी काया”। अगर हमारा शरीर स्वस्थ नहीं है, तो दुनिया की सारी दौलत बेकार है। इसीलिए इस दिन सबसे पहली पूजा अच्छी सेहत और बीमारी से मुक्ति के लिए भगवान धन्वंतरि की की जाती है।
धनतेरस के दिन सोने-चांदी के अलावा पीतल और तांबे के बर्तन खरीदने की पुरानी परंपरा है। इसके पीछे भी एक गहरा वैज्ञानिक और प्राकृतिक कारण है। तांबे और पीतल के बर्तनों में पानी पीना और खाना पकाना हमारी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। यह परंपरा हमें याद दिलाती है कि हम प्रकृति से जुड़ें और प्लास्टिक जैसी नुकसानदेह चीज़ों को छोड़कर प्राकृतिक धातुओं को अपने जीवन में शामिल करें। इसके साथ ही, इस दिन घरों की गहरी सफाई की जाती है। स्वच्छता ही बीमारियों को दूर रखती है, और जहां स्वच्छता और शुद्ध हवा होती है, वहीं लक्ष्मी का वास होता है।
धनतेरस की शाम को घर के मुख्य द्वार पर यमराज के नाम का दीपक निकाला जाता है, जिसे ‘यमदीपदान’ कहते हैं। इसे दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके रखा जाता है। यह दीया घर के सदस्यों की अकाल मृत्यु और दुर्घटनाओं से रक्षा के लिए जलाया जाता है। यह इस बात का प्रतीक है कि समृद्धि तभी पूरी होती है, जब हमारा परिवार सुरक्षित और लंबी उम्र जीने वाला हो।
तो इस बार जब आप धनतेरस मनाएं, तो सिर्फ बाजार की चकाचौंध में न खोएं। अपनी सेहत का ध्यान रखने का संकल्प लें, प्रकृति का सम्मान करें और अपने परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें। क्योंकि असली धन सिर्फ बैंक बैलेंस नहीं, बल्कि आरोग्य, शांति और अपनों का साथ है।
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