नई दिल्ली। इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को एक महिने से ऊपर का समय हो चुका हैं इस बीच भारत ने अपनी मांगों को तेज करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा से खोलने की बात कही हैं। गुरुवार को ब्रिटेन की ओर से एक अहम बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में कई देश शामिल हुए थे। बैठक में भारत की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिस्री शामिल हुए थे, जिन्होने बैठक में साफ कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर आवाजाही तुरंत चालू होनी चाहिए और इसमे किसी तरह को कोई बाधा नहीं आनी चाहिए। विदेश सचिव ने कहा कि इस युद्ध के कारण जलमार्ग पर अपने लोगों को खोने वाला भारत एकमात्र देश है। बता दे कि इस बैठक में अमेरिका शामिल नहीं हुआ था। इस बैठक का मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए कूटनीतिक और राजनीतिक समाधान तलाशना था।
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विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बैठक में शामिल हुए और भारत का पक्ष रखा। उन्होने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा आने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा और असर पड़ रहा है। समुद्री रास्तों की सुरक्षा और फ्री नेविगेशन अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सुनिश्चित किया जाना चाहिए। भारत समुद्री सुरक्षा और खुले व्यापारिक रास्तों का समर्थन करता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत की प्राथमिकता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही बहाल हो। विदेश सचिव ने कहा कि ईरान- अमेरिका और ईजरायल के बीच चल रहे युद्ध में भारत के आठ नागरिकों की मौत हुई है। भारत ही एक मात्र देश है, जिसने अपने लोगों को इस युद्ध में खोया हैं। इस युद्ध के कारण भारत को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस युद्ध में व्यापारी जहाजों पर जो हमले हुए थे उसमे तीन भारतीय नाविकों सहित कुल आठ भारतीयों की मौत हो चुकी है। वहीं ब्रिटेन की गृह मंत्री इवेट कूपर ने बैठक के बाद कहा कि यह वैश्विक प्रयास इस बात का संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस अहम समुद्री मार्ग को फिर से खोलने के लिए गंभीर है और सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीति पर जोर दे रहा है।