लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सपा-बसपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कानून-व्यवस्था के मामले में सपा-बसपा सरकार को घेरते हुए कहा कि, 2017 से पहले प्रदेश के हर जिले में दुर्दांत माफिया का बोलबाला था और समानांतर सरकारें चलतीं थीं। माफियाओं के सामने नाक रगड़ी जाती थी, घुटने टेके जाते थे और पुलिस मजबूर थी। राजनीतिक नेतृत्व की रीढ़ ही टेढ़ी हो तो कानून व्यवस्था को सीधा कैसे कर सकते हैं।
पढ़ें :- बालाघाट में जिस तरह आदिवासी बच्चों की जान गई, वो पूरी तरह से मध्य प्रदेश में BJP सरकार की नाकामी है: राहुल गांधी
दरअसल, गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोकभवन में आयोजित एक कार्यक्रम में अपना संबोधन दे रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने 87 इंटरसेप्टर वाहनों को हरी झंडी दिखाई, वीर पुलिसकर्मियों को पदक प्रदान किए और पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की पुस्तक ‘संघर्ष’ का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि, 2017 के बाद सरकार ने पुलिस सुधारों को आगे बढ़ाया। प्रकाश सिंह ने जिस पुलिस रिफॉर्म की वकालत की थी, उसे उत्तर प्रदेश ने देश में सबसे पहले लागू किया।
बंद चैंबर के सुखद माहौल में तभी चिंतन कर सकते हैं, जब बेहतरीन सुरक्षा का माहौल हो…
कोई भी व्यक्ति हो, कितना भी बड़ा क्यों न हो, पद का गुरूर क्यों न हो, अगर उसकी सुरक्षा बाहर कर दी जाए तो उसे ‘भीगी बिल्ली’ बनने में बहुत देर नहीं लगेगी… pic.twitter.com/N1c0eGZu9x
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) October 1, 2026
पढ़ें :- योगी सरकार पीडियाट्रिक ट्रॉमा इंटीग्रेशन से हर साल बचाएगी करीब 1,800 जानें, तैयार किया बाल ट्रॉमा केयर को इमरजेंसी स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने का रोडमैप
इस दौरान मुख्यमंत्री ने विपक्षी दल के नेताओं पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि, बंद कमरे में बैठकर किसी के प्रति कोई भी टिप्पणी करना आसान है। कोई व्यक्ति कितना भी बड़ा क्यों न हो और उसे अपने पद का कितना भी गुरूर हो, सुरक्षा हटा दी जाए तो अराजकता के माहौल में उसे भीगी बिल्ली बनने में देर नहीं लगेगी। स्वस्थ चिंतन तभी संभव है, जब समाज में सुरक्षा का वातावरण हो।
सुरक्षित माहौल में ही समृद्धि की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है। यूपी पुलिस की थीम ‘आपकी सुरक्षा, हमारा संकल्प’ इसी भावना को व्यक्त करती है। जब तराई क्षेत्र आतंकवाद की चपेट में था, तब पुलिस व सेना की सुरक्षा में ही आवागमन संभव था। सूर्यास्त के बाद आवाजाही लगभग बंद हो जाती थी। उस समय डीजीपी के रूप में प्रकाश सिंह ने इन चुनौतियों का सामना किया। पुलिस सुधारों के लिए प्रकाश सिंह को सुप्रीम कोर्ट की शरण लेनी पड़ी थी। उत्तर प्रदेश ने पुलिस सुधारों को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।