Advertisement
  1. हिन्दी समाचार
  2. उत्तर प्रदेश
  3. अभिषेक प्रकाश के साथ मनोज कुमार चीफ सेक्रेटरी और प्रथमेश कुमार जब हर जगह साथ थे तो बलि का बकरा क्यूं बने अभिषेक?

अभिषेक प्रकाश के साथ मनोज कुमार चीफ सेक्रेटरी और प्रथमेश कुमार जब हर जगह साथ थे तो बलि का बकरा क्यूं बने अभिषेक?

By टीम पर्दाफाश 
Updated Date

लखनऊ। सौर ऊर्जा से जुड़े कलपुर्जे बनाने वाली कंपनी एसएफएल सोलर प्राइवेट लिमिटेड से 5 फीसदी कमीशन यानी 400 करोड़ रुपये की मांग करने के मामले में 2006 बैच के आईएएस सचिव औद्योगिक विकास विभाग व इन्वेस्ट यूपी के CEO अभिषेक प्रकाश (CEO of Invest UP Abhishek Prakash) को योगी सरकार ने निलंबित कर दिया । अब यह सवाल उठता है कि इस कमीशन के खेल में सिर्फ आईएएस अभिषेक प्रकाश ही क्यूं दोषी हैं?

पढ़ें :- IAS Corruption Case : निलंबित IAS अभिषेक प्रकाश के खिलाफ विभागीय जांच शुरू, योगी सरकार ने केंद्र को भेजी 36 पन्नों की रिपोर्ट

सूत्रों का कहना है कि जब अभिषेक प्रकाश दोषी हैं तो यूपी के मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह (UP Chief Secretary Manoj Kumar Singh) व तत्कालीन इन्वेस्ट यूपी में अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (एसीईओ) (Additional Chief Executive Officer(ACEO) at Invest UP) प्रथमेश कुमार (Prathamesh Kumar) बेदाग कैसे हैं?

सूत्रों के मुताबिक, इस निवेश प्रस्ताव की फाइल एक उच्च अधिकारी के पास पहुंचने के बाद अटक गई और जब तक 400 करोड़ रुपये की ‘मांग’ पूरी नहीं होती, तब तक इसे मंजूरी नहीं देने की बात कही गई। सूत्र बताते हैं कि कंपनी के आवेदन को बार-बार टाला गया, और जब उच्च अधिकारियों के पास यह फाइल पहुंची, तो 400 करोड़ रुपये की डिमांड सामने आई। एसएफएल सोलर की कुल नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता 6500 मेगावाट बताई जाती है। कंपनी पहले भी यूपी में निवेश कर चुकी है, लेकिन इतनी बड़ी परियोजना को लेकर शासन में अनिश्चितता बनी हुई थी।

एसएफएल सोलर की योजना

एसएफएल सोलर कंपनी ग्रेटर नोएडा में सोलर बैटरी और अन्य सौर उपकरणों का प्लांट लगाना चाहती थी। कंपनी ने इसके लिए औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) को ऑनलाइन आवेदन दिया था। इस प्रस्ताव के तहत कंपनी ने ग्रेटर नोएडा में बड़ी जमीन की मांग रखी थी।

पढ़ें :- यूपी में 8000 करोड़ के सोलर प्रॉजेक्ट को एम्पावर्ड कमेटी ने दी हरी झंडी, जल्द ही योगी कैबिनेट से मिल सकती है अंतिम मंजूरी

जांच के घेरे में कई अधिकारी

इस पूरे प्रकरण के बाद अब कई अधिकारी जांच के दायरे में आ सकते हैं। इस मामले में कंसल्टेंसी फर्मों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि 200 एकड़ जमीन उपलब्ध थी, लेकिन उस समय किसानों से भूमि अधिग्रहण को लेकर विवाद चल रहा था। अब देखना यह होगा कि इस मामले की अंतिम जांच रिपोर्ट कब तक सामने आती है और क्या इसमें दोषियों पर कोई कार्रवाई होगी?

इससे बड़ा घोटाल जलजीवन मिशन में अनुराग श्रीवास्तव ने किया है। जिसका सच बहुत जल्दी हम अपने पाठकों को बताएंगे।

Advertisement