Rajya Sabha Elections 2026: महाराष्ट्र में राज्यसभा की सात खाली सीटों के लिए हुए द्विवार्षिक चुनाव में सभी उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। निर्वाचन आयोग की आधिकारिक घोषणा के अनुसार, एनसीपी (SP) प्रमुख शरद पवार, केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास आठवले और भाजपा के वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े समेत सभी सात दिग्गजों को निर्विरोध विजेता घोषित किया गया है। इस चुनाव की सबसे दिलचस्प बात रामदास आठवले की उम्मीदवारी को लेकर रही, जिन्होंने अंतिम समय में अपनी पार्टी की अलग पहचान बनाए रखने में सफलता हासिल की।
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रामदास आठवले ने बरकरार रखी पार्टी की पहचान
इस चुनाव प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम तब सामने आया जब रामदास आठवले को उनकी अपनी पार्टी, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (A) के उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित घोषित किया गया। गौरतलब है कि शुरुआती घोषणा के समय उन्हें भाजपा के आधिकारिक उम्मीदवार के तौर पर पेश किया गया था।
सूत्रों के अनुसार, आठवले ने दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं से संपर्क साधा और इस बात पर जोर दिया कि उन्हें भाजपा के बजाय आरपीआई (आठवले) के चिन्ह पर चुनाव लड़ना चाहिए। उन्होंने समय रहते अपनी पार्टी के ‘ए’ और ‘बी’ फॉर्म जमा किए, जिससे एनडीए में उनकी पार्टी की स्वतंत्र पहचान सुरक्षित रह सकी।
भाजपा के खाते में तीन सीटें
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निर्वाचन आयोग की घोषणा के बाद सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के तीन उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं। इनमें प्रमुख रूप से पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े शामिल हैं, जो लंबे समय बाद चुनावी राजनीति में वापसी कर रहे हैं। इनके अलावा माया इनामदार और रामराव वडकुते भी भाजपा की ओर से उच्च सदन के सदस्य बने हैं।
महायुति और एमवीए का समीकरण
महाराष्ट्र की सात सीटों में से छह सीटें सत्ताधारी महायुति गठबंधन के खाते में गई हैं, जबकि विपक्ष (महा विकास अघाड़ी) से केवल शरद पवार ही उम्मीदवार थे। महायुति की ओर से भाजपा के तीन सदस्यों के अलावा, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की ओर से ज्योति वाघमारे और उपमुख्यमंत्री अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की ओर से उनके बेटे पार्थ पवार निर्वाचित हुए हैं।
शरद पवार का एक बार फिर उच्च सदन पहुंचना विपक्षी एकता के लिए महत्वपूर्ण
शरद पवार का एक बार फिर उच्च सदन पहुंचना विपक्षी एकता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, रामदास आठवले का अपनी पार्टी के बैनर तले जीतना दलित राजनीति में उनके वर्चस्व को और मजबूत करता है। भाजपा ने विनोद तावड़े और अन्य नामों के जरिए राज्य के विभिन्न जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश की है। सभी नवनिर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल 2026 से शुरू होगा।