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CMO कार्यालय और जलकल विभाग साल के आठ महीने प्रतिदिन एक कॉलोनी का लेता है सैंपल, फिर भी गंदा पानी पीने को मजबूर राजधानीवासी, लैब से रिपोर्ट कब हटेगा पर्दा?

By संतोष सिंह 
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लखनऊ। हाल के दिनों में देश के कई शहरों में दूषित पानी पीने से लोग हैजा, डायरिया, टाइफाइड, उल्टी-दस्त जैसी बीमारियों से ग्रसित हुए हैं, जिससे कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हुई हैं और कुछ मामलों में मौतें भी हुई हैं। देश के विकास के तमाम दावों के विपरीत आज भी देश की स्मार्ट सिटी सहित, राज्यों की राजधानियों स्वच्छ पानी जैसी बुनियादी जरूरत ही अब लोगों के लिए जानलेवा बनी हुई हैं।

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अब हम बताने जा रहे हैं देश के सबसे बड़े सूबे की राजधानी लखनऊ की। योगी सरकार के विकास के तमाम दावों की विपरीत राजधानी लखनऊ में दूषित पानी की यह समस्या विकट होती जा रही है, लेकिन जिम्मेदार महकमा (जलकल और स्वास्थ्य विभाग) केवल पानी की गुणवत्ता की जांच के नाम खानापूर्ति कर अपना पल्ला झाड़ लेता है। बता दें कि पानी की गुणवत्ता की जांच का जिम्मा मुख्य रूप से जलकल और स्वास्थ्य विभाग के हाथ में है। इनकी संयुक्त टीम हर साल के मार्च माह से अक्टूबर माह तक प्रतिदिन किसी एक कॉलोनी में पानी की गुणवत्ता की जांच करती है। जांच रिपोर्ट आने के बाद समस्या के निस्तारण का जिम्मा जलकल विभाग का होता है, लेकिन दोनों ही विभाग जांच रिपोर्ट धूल फांकने के लिए रख देते हैं। आज राजधानी के किसी आम आदमी को नहीं मालूम होता कि उसके घर में सप्लाई हो रहे पानी की गुणवत्ता कैसी है?

दूषित पानी की रिपोर्ट प्रतिदिन होता है कलेक्शन

सरकारी नियम के मुताबिक साल के आठ महीने सीएमओ ऑफिस की एक टीम जलकल विभाग के प्रतिनिधियों के साथ प्रतिदिन पानी के जांच के लिए निकलती है। इसमें किसी एक कॉलोनी को चुना जाता है। कॉलोनी से पानी का सैंपल लेकर उसे अलीगंज स्थित लैब में जांच के लिए भेज दिया जाता है। इसके अगले दिन यह रिपोर्ट लैब से सीधे सीएमओ कार्यालय भेजी जाती है। सीएमओ कार्यालय से रिपोर्ट की एक कॉपी जलकल जीएम और नगर स्वास्थ्य अधिकारी (NSA) को भेजने का जिम्मा है। अगर कही से दूषित पानी की रिपोर्ट है तो उसके 24 घंटे में निस्तारण का जिम्मा जलकल विभाग का होता है, लेकिन मौजूदा कुछ वर्षों से यह रिपोर्ट सीएमओ कार्यालय और जलकल विभाग से बाहर नहीं निकल रही है। इस रिपोर्ट को पब्लिक प्लेटफॉर्म पर नहीं लाया जाता, जिससे लोगों को पानी की क्वॉलिटी जानकारी नहीं मिल पाती।

एक फरवरी से स्वास्थ्य विभाग करेगा नियमित जांच

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वेक्टर बोर्न डिजीज नियंत्रण प्रभारी और ACMO डॉ. विशांत निर्माण का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम एक फरवरी से पानी की नियमित जांच शुरू करेगी। आमतौर संक्रामक रोगों का सीजन मार्च से माना जाता है। इसलिए हमारी टीम हर साल 15 मार्च से अक्टूबर तक पानी की जांच करती है। इन दिनों शहर में दूषित पानी की शिकायतें ज्यादा आ रही है। ऐसे में एक फरवरी से जलकल विभाग की टीम स्वास्थ्य विभाग के साथ पानी के गुणवत्ता की जांच करेगी। टीम में स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक लैब टेक्निशन और एक सहयोगी होता है।

दूषित पानी का कारण और उपाय जनता को नहीं है मालूम

दूषित पानी की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। राजधानी की प्रमुख कॉलोनी इंदिरा नगर, खदरा, राजाजीपुरम, आलमबाग, सदर के उदयगंज सहित कई क्षेत्रों में महीनों से लोग गंदे और बदबूदार पानी पीने को मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि शिकायत पर जलकल विभाग की टीम पहुंचती है लेकिन लोगों को यह नहीं बताया जा रहा है कि उनके इलाके में दूषित पानी के क्या कारण है और सुधार के लिए किस स्तर पर कार्रवाई की जा रही है?

दूषित पानी की मुख्य वजह पुरानी पाइप लाइन : जलकल जीएम कुलदीप सिंह

जलकल जीएम कुलदीप सिंह ने बताया कि जिन इलाकों में दूषित पानी की शिकायतें है, उसका मुख्य कारण पुरानी पाइप लाइनों में लीकेज और सीवर लाइन का बिछाया जाना है। जीएम ने बताया कि जलकल की टीम पानी में क्लोरीन का स्तर पता करने के लिए ऑर्थोटोलिडाइन (ओटी) जांच मौके पर ही करती है। हालांकि कई बार लीकेज के कारण सीवर की गंदगी पानी में मिल जाने से क्लोरीन की गुणवत्ता प्रभावित होती है, जो ओटी जांच में आसानी से पकड़ में नहीं आती। ऐसे में पानी के सैंपल भरकर अलीगंज स्थित राज्य स्वास्थ्य संस्थान की लैब में भेजे जाते हैं। पहले सैपल की केमिकल जांच होती है। इसमें क्लोराइड, नाइट्रेड, फ्लोराइड संदिग्ध मिलते है, तो बैक्टीरियल (वायरल) जांच करवाई जाती है। जबकि इसके विपरीत लोगों का आरोप है कि जलकल इन जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं करता। इससे उन्हें पता नहीं चल पाता कि उनके पानी में क्या कमी है और उन्होंने अब तक किस स्तर के पानी का उपयोग किया? रिपोर्ट के बाद जलकल विभाग ने संबंधित क्षेत्र में पानी की गुणवत्ता में सुधार के लिए क्या उपाए किए? यह भी लोगों को नहीं बताया जा रहा है।

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महीनों से दूषित पानी की समस्या से जूझ रहे है इन इलाकों के लोग

इंदिरा नगर में ए ब्लॉक के साथ आसपास के कई इलाकों में एक महीने से अधिक समय से लोग दूषित पानी की शिकायत कर रहे हैं। यही हाल उदयगंज में क्ले स्ववयर हैवलॉक रोड सहित आसपास के इलाकों में है। खदरा में रामलीला मैदान के आसपास के इलाकों में महीनों से दूषित पानी की समस्या से लोग जूझ रहे है। हालांकि, जलकल विभाग के अधिकारी दावा कर रहे है कि खदरा में नई पाइपलाइन बिछाना शुरू कर दिया गया है। एक से डेढ़ महीने में यहां समस्या दूर हो जाएगी। इससे पहले जानकीपुरम विस्तार के कई इलाकों में दूषित पानी को लेकर बीमारियां फैलने की शिकायत कर रहे थे। आलमबाग के आजाद नगर में सीवर युक्त पानी की सप्लाई की लोग आए दिन शिकायत कर रहे हैं।

122 सैंपल की जांच का दावा

जलकल विभाग के अधिकारियों का दावा है कि नियमित तौर पर शहर के विभिन्न इलाकों में पानी की ओटी जांच करवाई जा रही है। एक जनवरी से 15 जनवरी के बीच 2,380 ओटी जांच हुई। जांच रिपोर्ट में पानी में क्लोरीन की सही मात्रा पाई गई। बैक्टीरियल और केमिकल की जांच के लिए 122 सैंपल राज्य स्वास्थ्य संस्थान को भेजे गए। सभी की रिपोर्ट में पानी पीने योग्य बताया जा रहा है। इंदिरा नगर के जेई धनीराम चौधरी ने बताया कि सीवर लाइन बिछाने का काम पूरा होने तक कुछ इलाकों में पानी की समस्या रहेगी।

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