नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी गुरुवार को मध्य प्रदेश के बालाघाट के जगला गांव में आदिवासी परिवारों से मुलाकात की। पिछले कुछ समय में यहां आदिवासी परिवारों के 30 से ज्यादा बच्चों ने कुपोषण और मलेरिया-मीजल्स जैसी बीमारियों के कारण दम तोड़ दिया। राहुल गांधी ने यहां पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें हिम्मत दी और उनकी समस्याओं को मजबूती से उठाने का वादा किया।
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राहुल गांधी ने कहा कि, बालाघाट में आकर ऐसा लगा-जैसे हिंदुस्तान के बीच में ही हिंदुस्तान की सरकार नहीं है। यहां बहुत सारे बच्चों की मृत्यु कुपोषण और अन्य बीमारियों के कारण हुई है, लेकिन सरकार की तरफ से लोगों को कोई सपोर्ट नहीं मिल रहा है। यहां पर लोगों की जमीन से जुड़े मुद्दे हैं, वन अधिकार अधिनियम से जुड़ा मुद्दा है और मनरेगा का भी मुद्दा है। कई परिवारों ने अपने बच्चे खो दिए, लेकिन अभी तक आधे लोगों को मुआवजा नहीं दिया गया है।
उन्होंने आगे कहा, मैं सरकार से कहना चाहता हूं कि वो अपनी जिम्मेदारी निभाएं। बालाघाट में लोगों को स्कूल, अस्पताल की सुविधा दीजिए और इन्हें इनका हक दीजिए। BJP सरकार 24 घंटा विकास की बात करती है, लेकिन जिम्मेदारी निभाने के वक़्त गायब हो जाती है।
अगर सरकार प्रदेश में दो योजनाएं चला रही है तो इन्हें दोनों का फायदा मिलना चाहिए, लेकिन इन्हें एक योजना का फायदा देकर, दूसरे से नाम इनका काट दिया जाता है।
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राहुल गांधी ने कहा कि, मुझे यहां की स्थिति देखकर काफी दुख हुआ। हमने इनसे कहा है कि हम सरकार में आते ही इनकी मदद करेंगे। हम इन्हें वनवासी नहीं, आदिवासी कहते हैं और ये हिंदुस्तान के पहले मालिक हैं, इसलिए इन्हें देश में जगह और सुविधाएं मिलनी चाहिए। मध्य प्रदेश में हर तरफ हालात खराब हैं और ये पूरी तरह से मध्य प्रदेश सरकार का Failure है।
साथ ही कहा, बालाघाट में जिस तरह आदिवासी बच्चों की जान गई, वो पूरी तरह से मध्य प्रदेश में BJP सरकार की नाकामी है। मैं लोकसभा के अंदर इस घटना के साथ ही देश में आदिवासियों के साथ हो रहे अन्याय का मुद्दा उठाऊंगा।