नई दिल्ली। ह्यूमन राइट्स फोकस पाकिस्तान (Human Rights Focus Pakistan) ने 12 वर्षीय अल्पसंख्यक किशोरी के अपहरण और यौन उत्पीड़न की भयानक घटना कि निंदा की है। मुकदमा दर्ज होने के बाद भी आरोपी अभी भी फरार हैं और पीड़ित परिवार ने लगातार धमकियां दी जा रही है। HRFP द्वारा किए गए एक फैक्ट-फाइंडिंग मिशन के अनुसार यह घटना आठ दिसंबर 2025 को हुई थी। पीड़ित के पिता ने बताया कि बेटी शाम को घर का कुछ सामान लाने के लिए बाहर गई थी। इस दौरान उसका अपहरण कर किशोरी के साथ दुष्कर्म किया गया।
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ह्यूमन राइट्स फोकस पाकिस्तान की फैक्ट-फाइंडिंग टीम (Fact-finding team) ने परिवार से मुलाकात की और इस भयानक घटना में हर संभव सहायता सुनिश्चित करते हुए तथ्य और रिपोर्ट इकट्ठा कीं। दो गवाहों अदील मसीह और परवेज़ मसीह ने बताया कि पड़ोस के ही दो युवक किशोरी को जबरदस्ती एक घर में ले जा रहे थे। दोनों कि शिनाख्त तलहा शब्बीर और मुहम्मद अरसलान के रूप में हुई है। गवाहों ने आनन—फानन में इसकी जानकारी किशोरी के पिता को दी। स्थानाई लोगों के साथ पिता उस घर में पहुंचे तो आरोपी तलहा शब्बीर को नाबालिग के साथ दुर्व्यवहार करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। पकड़े जाने पर मुहम्मद अरसलान ने सभी पर बंदूक तान दी सभी को जान से मारने की धमकी देते हुए दोनोंं आरोपी फरार हो गए। इस मामले को शुरूआत में सब-इंस्पेक्टर असद हयात ने पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 375-A के तहत प्रोसेस किया और मिल्लत टाउन पुलिस स्टेशन को भेज दिया। हालांकि मामला वर्तमान में स्पेशल सेक्सुअल ऑफेंसेस इन्वेस्टिगेशन यूनिट (SSIOU) के अधिकार क्षेत्र में है, लेकिन मामले में कोई जांच नहीं हो रही है और दोनों आरोपी घटना के लगभग दो माह बाद भी फरार है। गवाहों की गवाही के बाद भी पुलिस ने अभी तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया है। पीड़ित ईसाई परिवार ने बताया कि उन पर मामला वापस लेने के लिए दबाव डाला जा रहा है और जान से मारने की धमकी दी जा रही है। HRFP के अध्यक्ष नवीद वाल्टर ने इस बात पर जोर दिया कि यह मामला कई गंभीर अपराधों का संगम है, जिसमें बाल शोषण, अपहरण और जबरन शादी के माध्यम से जबरन धर्मांतरण की धमकी शामिल है।